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अब पौधरोपण की होगी सेटेलाइट से मॉनीटरिंग

सेटेलाइट डेस्कबोर्ड के लिए तैयार किया जा रहा साफ्टवेयर, माह भर के अंदर शुरू होने की संभावना

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बिलासपुर। अब पौध रोपण की निगरानी सेटेलाइट के जरिए होगी। वन विभाग इसके लिए सेटेलाइट डेस्क बोर्ड तैयार कर रहा है। मांह भर के अंदर यह प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

पौधरोपण का फर्जीवाड़ा रोकने और उनकी निगरानी करने के लिए वन विभाग ने कमर कस लिया है। अब पौधों की निगरानी मैनुअली न होर सेअेलाइट के जरिए होगी। सेटेलाइट से पेड़-पौधों की निगरानी की जाएगी, वहीं वहीं नष्ट हुए पेड़ों की जानकारी भी हासिल हो सकेगी। वनों की बहुलता वाले राज्य में पौधरोपण के नाम पर रही लगातार शिकायतों को दूर करने के लिए वन विभाग अभिनव प्रयोग करने जा रहा है।

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वन विभाग ने लगभग छह माह की मशक्कत के बाद इस डेस्कबोर्ड सिस्टम को तैयार किया है। इसके लिए एक साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। एक माह के अंदर यह सिस्टम कार्य करने लगेगा। गौरतलब है कि विभाग में पौधरोपण के क्षेत्रफल, पौधों की संख्या, उनके जीवित रहने की स्थिति को लेकर अक्सर अलग-अलग रिपोर्ट विभाग के सामने आते हैं। इससे सही आंकलन नहीं हो पाता। ऐसे में कुछ अधिकारी विभाग को गुमराह कर ऐसे स्थानों पर पौधरोपण की रिपोर्ट देते हैं,

जहां की मॉनीटरिंग संभव ही नहीं है। ऐसे में यह सेटेलाइट सिसटम कारगर सिद्ध होगा। विभाग ने सेटेलाइट आधारित डेस्कबोर्ड बनाकर पौधरोपण की नियमित मॉनिटरिग करने का रास्ता निकाला है। आगामी समय में राज्य में जहां भी पौधरोपण होगा, वहां की जीपीएस लोकेशन फीड की जाएगी और रायपुर में बैठा अधिकारी बस्तर के घोर इलाके में हुए पौधरोपण को सीधा देख सकेगा।

सिस्टम के जरिए एक-एक पौधे को गिना जा सकेगा। इसके अलावा वर्ष भर में कितने पौधे रोपित किए गए। कितने पौधे बचे और कितने नष्ट हो गए, इसकी गणना भी इस सिस्टम को माध्यम से हो पाएगी।

बाक्स…

० पौध रोपण अभियान में होने वाली गड़बड़ी रुकेगी

बिलासपुर वन वृत के मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडये का कहना है कि अब कहीं भी पौध्ो रोपे जाएगें, उसकी सेटेलाइट के माध्यम मॉनिटरिंग हो सकेगी। जहां पौध्ो लगाए गए हैं, एक क्लिक में उसे देखा जा सकेगा। इससे पौध रोपण में होने वाली गड़बड़ी तो रुकेगी ही, सूख रहे पौध्ों को बचाया भी जा सकेगा।

० इस तरह होगा काम

भौगोलिक स्थिति यानी कौन सा कार्य कितनी ऊंचाई और कितनी दूरी पर है। किस कार्य की क्या स्थिति है और कितना धन खर्च हो रहा है। इससे पहले हुए कार्य पर दोबारा फर्जी काम नहीं हो पाएगा। जिस स्थान पर कोई काम होता है तो काम से पहले, काम के दौरान और काम पूरा होने के बाद की फोटो जीपीएस ग्लोबल पोजीशन सिस्टम लोकेशन पर इंटरनेट पर ऑनलाइन की जाती है। अक्षांतर और देशांतर सहित सारा विवरण भी दर्ज किया जाता है। दर्ज किए गए लोकेशन को सेटेलाइट के माध्यम से देखा जा सकेगा।

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