सुप्रीम कोर्ट में BALCOवेदांता के खिलाफ बड़ी लड़ाई: जंगल, जमीन और कानून पर घिरा कॉर्पोरेट

नई दिल्ली/रायपुर- ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क..छत्तीसगढ़ में वन भूमि के कथित दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन को लेकर भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO), जो कि वेदांता समूह का हिस्सा है, के खिलाफ मामला अब सुप्रीम कोर्ट में गंभीर रूप ले चुका है।
मामला रिट याचिका (सिविल) नंबर 202/1995 के अंतर्गत चल रहा है, जिसमें हाल ही में राज्य सरकार ने केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की रिपोर्ट पर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है।
क्या है पूरा मामला?
दस्तावेजों के अनुसार:
*BALCO को 1971 में लगभग 1,136 एकड़ जमीन लीज पर दी गई थी, जिसमें बड़ी मात्रा में राजस्व वन भूमि शामिल थी।आरोप है कि इस भूमि का उपयोग गैर-वन कार्यों (औद्योगिक उपयोग) के लिए किया गया, जबकि आवश्यक वन स्वीकृति (Forest Clearance) नहीं ली गई।CEC की रिपोर्ट (17 मार्च 2025) में भी कहा गया है कि कंपनी ने वन कानूनों का उल्लंघन किया और उचित अनुमति के बिना जमीन का उपयोग किया।
चौंकाने वाले तथ्य
कुल 1,136 एकड़ में से: 947.95 एकड़ पर कुछ हद तक मुआवजा (tree compensation) दिया गया लेकिन 137.1 एकड़ वन भूमि पर कोई मुआवजा नहीं दिया गया. करीब 86.42 एकड़ पर ही आधिकारिक वन अनुमति प्राप्त होने का दावा
शेष भूमि पर बिना अनुमति उपयोग का आरोप
CEC की सख्त टिप्पणी
केंद्रीय सशक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा:
BALCO ने लगभग 148 एकड़ वन भूमि पर बिना अनुमति काम किया बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण हुआ कंपनी को कंपेंसटरी अफॉरेस्टेशन (CA) और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) का भुगतान करना चाहिए
राज्य सरकार का पक्ष
छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा: कंपनी ने लंबे समय तक वन कानूनों का उल्लंघन किया BALCO के खिलाफ नोटिस, वसूली कार्यवाही (RRC) और अन्य कानूनी कदम उठाए गए
सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि बिना अनुमति उपयोग वाली जमीन पर NPV और CA लागू किया जाए
कानूनी और पर्यावरणीय असर
यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है—इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं: देशभर में राजस्व वन भूमि के उपयोग पर सख्ती बढ़ सकती है
बड़े उद्योगों की पर्यावरणीय जवाबदेही तय हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में कॉर्पोरेट-वन नीति को प्रभावित कर सकता है
क्यों है ये मामला बड़ा?
ये सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं—
यह तय करेगा कि उद्योग vs पर्यावरण में कानून किसके साथ खड़ा है
भविष्य में कॉर्पोरेट जवाबदेही की दिशा तय हो सकती है*
अब नजर सुप्रीम कोर्ट पर…
फैसला आएगा तो असर पूरे देश की वन नीति पर पड़ेगा।*
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट अब:
CEC की रिपोर्ट…
राज्य सरकार का जवाब…
और BALCO का पक्ष…
इन सभी को देखते हुए आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी पर भारी जुर्माना, पर्यावरणीय दायित्व और कानूनी कार्रवाई संभव है।

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