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बड़ा खुलासा: बालको-वेदांत पर शासकीय जमीन हड़पने का आरोप, फर्जी दस्तावेज़ों से बना राखड़ डेम—प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

 

कोरबा –  ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क की विशेष रिपोर्ट ….
कोरबा में बालकों के द्वारा सरकारी संपत्ति पर बेजाकब्जा रूकने का नाम नहीं ले रहा
अब तो दस्तावेजों के साथ भी छेड़छाड़ व फर्जीवाड़ा करने से भी वेदांता बालको प्रबंधन को परहेज़ नहीं रह गया ।

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मामला देखे

जिले के ग्राम रोकबेहरी तहसील व जिला कोरबा में खसरा नंबर 543/1 को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने राजस्व तंत्र और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

सूत्रों के अनुसार, इस खसरा नंबर से जुड़े दस्तावेज़ों में भारी विरोधाभास पाया गया है—जहाँ एक आधिकारिक रिकॉर्ड में भूमि का रकबा 5 एकड़ दर्ज है, वहीं दूसरे दस्तावेज़ में यही रकबा बढ़ाकर 15 एकड़ दिखाया गया है। इस स्पष्ट अंतर ने फर्जीवाड़े की आशंका को बल दिया है।

आरोप ही नहीं दस्तावेज साक्ष्य है कि बालकों वेदांता ने फर्जी दस्तावेज के सहारे छत्तीसगढ़ शासन की शासकीय भूमि पर कुटरचना कर छल पूर्वक कब्जा किया है

एल्युमिनियम कंपनी (बालको), वेदांत समूह से जुड़े तत्वों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज़ों का सहारा लेकर शासकीय भूमि पर बड़ा कब्जा जमा लिया और उसी पर विशाल राखड़ डेम (Ash Dam) का निर्माण कर दिया। यह निर्माण न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन दर्शाता है, बल्कि पर्यावरणीय मानकों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतना बड़ा निर्माण कार्य शासन-प्रशासन की नाक के नीचे होता रहा, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे प्रशासन की भूमिका और संभावित मिलीभगत को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा है।

 

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

जनता के तीखे सवाल:

– क्या फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर शासकीय जमीन पर कब्जा वैध ठहराया जाएगा?
– क्या इतने बड़े निर्माण के लिए बिना अनुमति काम होता रहा?
– आखिर जिला प्रशासन अब तक मौन क्यों है?
– क्या इस मामले में उच्च स्तर की मिलीभगत है?

जनहित में प्रमुख मांगें:

* उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच (SIT/राजस्व विभाग)
* फर्जी दस्तावेज़ों की फोरेंसिक जांच
* दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR और कड़ी कार्रवाई
* शासकीय भूमि को कब्जे से मुक्त कराना
* जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करना

 

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या प्रशासन इस गंभीर भूमि घोटाले पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा?

बालको-वेदांता प्रबंधन पर गंभीर आरोप: वनभूमि पर पेड़ों की कटाई, शासकीय भूमि पर कूटरचित दस्तावेज़ों से अवैध कब्जा—प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल

 

स्थानीय स्तर पर यह आरोप सामने आए हैं कि बालको-वेदांता प्रबंधन से जुड़े पक्षों द्वारा कथित रूप से कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज़ तैयार कर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया गया, और उसी क्षेत्र में वनभूमि पर स्थित हरे-भरे वृक्षों की कटाई भी की गई।

 

आरोप यह भी हैं कि इस प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र में बड़े स्तर पर औद्योगिक उपयोग हेतु भूमि का विस्तार करते हुए राखड़ डेम (Ash Dam) जैसी संरचना विकसित की गई, जिससे भूमि उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि यह सब कार्य जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और वन विभाग की निगरानी के बावजूद कथित रूप से चलता रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतें देने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इस पूरे मामले ने अब राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता, वन संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

मुख्य आरोप:

– कूटरचित दस्तावेज़ों के आधार पर शासकीय भूमि पर कब्जा
– वनभूमि पर पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई
– औद्योगिक उपयोग हेतु भूमि का कथित विस्तार
– शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक निष्क्रियता
– राजस्व एवं वन विभाग की भूमिका पर सवाल

*जिला प्रशासन व छत्तीसगढ़ की सरकार क्या करा पाएगा कोई जांच*
* उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच (SIT/राज्य स्तरीय समिति)
* राजस्व रिकॉर्ड और भूमि नक्शों की फोरेंसिक जांच
*वनभूमि पर कटाई की विस्तृत जांच रिपोर्ट
* अवैध कब्जे और निर्माण पर तत्काल कार्रवाई
* जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय कर जवाबदेही सुनिश्चित करना

अब निगाहें प्रशासन पर:

यह मामला अब केवल एक भूमि विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और कानून के क्रियान्वयन की गंभीर परीक्षा बन गया है।

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