नगरीय निकायों में ‘25% कमीशन’ का कथित खेल!

पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा के खिलाफ EOW का करीब 1500 पन्नों का चालान
₹1.76 करोड़ से अधिक के कथित असम्यक लाभ के साक्ष्य; नकदी ही नहीं—हीरे की अंगूठी, टाइल्स-ग्रेनाइट, AC और स्मार्ट फैन तक का जिक्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में विकास कार्यों की निविदा और बिल भुगतान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी न्यायिक कार्रवाई की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा के खिलाफ विशेष न्यायालय, रायपुर में करीब 1500 पृष्ठों का अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया है।
जांच में वर्ष 2019 से 2021-22 के दौरान ₹1 करोड़ 68 लाख 52 हजार नकद तथा ₹7 लाख 77 हजार 582 की मूल्यवान सामग्री—कुल ₹1 करोड़ 76 लाख 29 हजार 582 का कथित असम्यक लाभ प्राप्त करने से संबंधित साक्ष्य सामने आने की बात कही गई है। मामले में आरोप न्यायालय में अंतिम रूप से सिद्ध होना शेष है।
काम चाहिए तो कमीशन? बिल चाहिए तो कमीशन?
प्रकरण का सबसे गंभीर पहलू वह आरोप है जिसके अनुसार वर्मा ने वर्ष 2019 से 2023 तक मुख्य अभियंता रहते हुए विभिन्न नगरीय निकायों में निविदा कार्य आवंटित कराने और कार्यों के बिलों का भुगतान कराने के बदले कथित तौर पर 25 प्रतिशत कमीशन की मांग की।
यदि जांच में सामने आया यह कथित पैटर्न अदालत में प्रमाणित होता है, तो सवाल केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगा।
क्या नगरीय निकायों में विकास कार्यों के पीछे समानांतर ‘कमीशन व्यवस्था’ चल रही थी?
कार्य स्वीकृत कराने से लेकर भुगतान तक और कौन-कौन इस श्रृंखला का हिस्सा था?
और यदि इतनी बड़ी राशि का लेन-देन हुआ, तो व्यवस्था के दूसरे स्तरों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
शिकायत से खुलीं परतें, आठ ठिकानों तक पहुंची जांच
शिकायतकर्ता राघवेन्द्र तिवारी की शिकायत के आधार पर EOW मुख्यालय रायपुर ने 15 जून 2026 को अपराध दर्ज कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 11 के तहत विवेचना शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो रायपुर एवं बिलासपुर में छह तथा मध्यप्रदेश के उज्जैन में दो स्थानों सहित कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई में संपत्तियों से जुड़े अभिलेख, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
WhatsApp चैट से बैंक खातों तक—EOW ने जोड़ी कथित कमीशन की कड़ियां
जांच में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई कथित WhatsApp चैट, बैंक खातों के लेन-देन, दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्य तथा गवाहों के बयान महत्वपूर्ण आधार बने।
EOW की जांच के मुताबिक आरोपी के निर्देश पर विभिन्न खातों में रकम भेजे जाने की कड़ियां सामने आईं। इनमें सहयोग किराना स्टोर्स में ₹55 हजार, ओम किराना स्टोर्स में ₹75 हजार, महेन्द्र सागर भोई के खाते में ₹60 हजार तथा कम्प्यूटर ऑपरेटर चुम्मन साहू के खाते में ₹20 हजार ट्रांसफर किए जाने का उल्लेख है।
इस तरह ₹2.10 लाख के बैंक/डिजिटल ट्रांसफर के संबंध में साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है। अभिलेख में ओमप्रकाश पैकरा के खाते में ₹10 हजार भेजे जाने का भी अलग उल्लेख है।
कमीशन सिर्फ कैश में नहीं? हीरे की अंगूठियों तक पहुंची जांच
विवेचना में सामने आए आरोप इस प्रकरण को और गंभीर बनाते हैं। जांच के मुताबिक वर्ष 2019 में कथित तौर पर ₹32.65 लाख नकद के साथ लगभग ₹40,250 मूल्य की दो हीरे की अंगूठियां दिए जाने की बात सामने आई।
वर्ष 2019-20 में आरोपी के आवास के लिए करीब ₹3.39 लाख के टाइल्स और ग्रेनाइट उपलब्ध कराने के साक्ष्य जुटाए जाने की बात कही गई है।
वर्ष 2020 में विभिन्न माध्यमों से ₹42.65 लाख कथित कमीशन दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई। हाईमास्ट LED का काम और घर पहुंच गए AC-स्मार्ट फैन?
वर्ष 2021-22 से जुड़ा हिस्सा भी बेहद गंभीर है।
विभिन्न नगरीय निकायों में हाईमास्ट LED लाइट लगाने के कार्यों के एवज में कथित तौर पर पांच AC और दो स्मार्ट फैन मांगे जाने का आरोप है। जांच के मुताबिक करीब ₹1.72 लाख के पांच Lloyd AC, ₹15,850 के दो स्मार्ट फैन तथा लगभग ₹1.40 लाख की LED लाइट आरोपी के आवास तक पहुंचाई गई।
EOW की जांच में अग्रोहा कॉलोनी स्थित आवास पर संबंधित कंपनी के AC और टाइल्स लगे पाए जाने तथा इनके संबंध में खरीदी बिल, भुगतान रिकॉर्ड और गवाहों के बयान जांच का हिस्सा बनाए जाने की बात कही गई है।
17 जून को गिरफ्तारी, अब अदालत में 1500 पन्नों की कहानी
EOW ने विवेचना में कथित संलिप्तता पाए जाने के बाद 17 जून 2026 को भागीरथी वर्मा को गिरफ्तार किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध हैं।
अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 एवं 11 के तहत विशेष न्यायालय में करीब 1500 पृष्ठों का अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि यह स्पष्ट रहना चाहिए कि चार्जशीट में आरोप लगना दोषसिद्धि नहीं है। आरोपों का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर करेगा।
लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं—अब ‘कमीशन चेन’ की बारी?
EOW की आगे की जांच इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण चरण हो सकती है।
एजेंसी यह पता लगाने की दिशा में जांच जारी रखे हुए है कि कथित अवैध रकम आगे किन लोगों तक पहुंची, शिकायतकर्ता की फर्म के कार्य किन अधिकारियों अथवा व्यक्तियों के माध्यम से स्वीकृत हुए और इस कथित व्यवस्था में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 193(9) के तहत अग्रिम विवेचना जारी रहने की बात कही गई है।
ग्राम यात्रा के 5 बड़े सवाल
1. यदि 25% कमीशन की कथित व्यवस्था थी तो क्या यह अकेले एक अधिकारी के स्तर पर संभव थी?
2. जिन नगरीय निकायों के कार्यों और बिलों के एवज में कथित भुगतान हुआ, उन सभी कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच होगी क्या?
3. जिन खातों में रकम भेजे जाने की बात जांच में आई, उन खातों और लाभार्थियों की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
4. कथित अवैध रकम यदि आगे पहुंची तो उसकी अंतिम मंजिल कौन थी?
5. क्या EOW अब इस प्रकरण को केवल एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले के बजाय पूरी कथित ‘कमीशन चेन’ की जांच तक ले जाएगी?
₹1.76 करोड़ के आरोप से बड़ा सवाल—सिस्टम कितना गहरा?
यह मामला केवल ₹1.76 करोड़ से अधिक के कथित असम्यक लाभ का नहीं है। असली प्रश्न उस व्यवस्था का है जिसके माध्यम से सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्य स्वीकृत होते हैं और ठेकेदारों के बिलों का भुगतान होता है।
यदि विकास कार्यों के बीच वास्तव में कथित 25 प्रतिशत कमीशन जैसी कोई व्यवस्था अदालत में प्रमाणित होती है, तो इसका आर्थिक बोझ अंततः सरकारी खजाने और जनता पर ही पड़ता है।
अब निगाह EOW की अग्रिम विवेचना पर है—क्या जांच एक आरोपी पर समाप्त होगी, या कथित कमीशन व्यवस्था की पूरी श्रृंखला सामने आएगी?
— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क | विशेष रिपोर्ट
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