POCSO मामले में कारोबारी चेतन चौधरी को कोर्ट से झटका!

अग्रिम जमानत आवेदन खारिज—अब सवाल, पुलिस की गिरफ्त में कब आएगा आरोपी?
नाबालिग कर्मचारी से छेड़छाड़ और गाली-गलौज के आरोप; विशेष लोक अभियोजक ने किया जमानत का विरोध
कोरबा। शहर के व्यस्त पावर हाउस रोड स्थित एसएस प्लाजा में संचालित शारदा टेलीकॉम के संचालक चेतन चौधरी के खिलाफ नाबालिग से कथित छेड़छाड़ के मामले में कानूनी शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपी की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) के न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
अब इस प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल है—एफआईआर दर्ज होने और अग्रिम जमानत आवेदन खारिज होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी कब होगी? दुकान में काम करने वाली नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप
मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। आरोप है कि 9 अगस्त 2026 को दुकान में काम करने वाली एक नाबालिग लड़की के साथ गाली-गलौज एवं छेड़छाड़ की घटना हुई। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले में नाबालिग की पहचान और उससे जुड़ी किसी भी ऐसी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके। गिरफ्तारी से पहले अदालत की शरण, लेकिन नहीं मिली राहत
प्राप्त जानकारी के मुताबिक एफआईआर के बाद चेतन चौधरी की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया।
इस आदेश का सीधा अर्थ दोषसिद्धि नहीं है—आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगा। लेकिन अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर निगाहें टिक गई हैं।
एफआईआर हुई, जमानत भी खारिज—फिर गिरफ्तारी कब?
शहर में अब यही प्रश्न चर्चा में है कि यदि आरोपी पुलिस को उपलब्ध नहीं है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं, तो उसे तलाशने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
क्या उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई?
क्या पुलिस ने उसके परिजनों और संपर्कों से पूछताछ की?
क्या तकनीकी माध्यमों से उसकी लोकेशन तलाशने का प्रयास किया जा रहा है?
और यदि वह लगातार पुलिस से बचता है तो आगे कानून के तहत क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
इन सवालों का आधिकारिक जवाब पुलिस से सामने आना आवश्यक है। रसूख नहीं, कानून तय करे कार्रवाई की रफ्तार
मामले को लेकर व्यापारी वर्ग और शहर में चर्चाएं होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी व्यक्ति के प्रभाव या रसूख को लेकर बिना प्रमाण निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद यह प्रकरण पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी जरूर है। नाबालिग से संबंधित अपराध के आरोप वाले मामले में कार्रवाई ऐसी दिखनी भी चाहिए कि कानून सबके लिए समान है।
यदि एक सामान्य आरोपी के खिलाफ जिस तत्परता से गिरफ्तारी के प्रयास किए जाते हैं, वही तत्परता किसी प्रभावशाली कारोबारी के मामले में भी दिखाई देती है, तभी कानून के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होता है।
हाईकोर्ट जाएगा या पुलिस करेगी गिरफ्तार?
अग्रिम जमानत आवेदन खारिज होने के बाद आरोपी के पास कानून के तहत उच्च न्यायालय का रुख करने जैसे न्यायिक विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ पुलिस के पास भी एफआईआर की जांच और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार एवं दायित्व है।
इसलिए अब निगाहें दो तरफ हैं—एक ओर आरोपी का अगला कानूनी कदम और दूसरी ओर कोरबा पुलिस की कार्रवाई।
नाबालिग की सुरक्षा और न्याय सबसे ऊपर
यह मामला किसी व्यापारी की प्रतिष्ठा अथवा सामाजिक हैसियत से अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि शिकायतकर्ता नाबालिग है। ऐसे मामलों में पीड़िता की गरिमा, पहचान की गोपनीयता, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सर्वोपरि होनी चाहिए।
अदालत में आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है और आरोपी को कानूनन दोषी तभी माना जाएगा जब सक्षम न्यायालय ऐसा निर्णय देगा। लेकिन एफआईआर और अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद जांच तथा गिरफ्तारी से जुड़ी पुलिस कार्रवाई पर जनता की निगाह रहना स्वाभाविक है।
ग्राम यात्रा का सवाल
“कानून की नजर में जब हर व्यक्ति बराबर है, तो अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई कब और किस गति से होगी?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस प्रकरण में पुलिस की आगामी कार्रवाई और न्यायालयीन घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा।
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