BALCO जमीन सीमांकन मामला: एक साल से जांच रिपोर्ट गायब, आखिर किसे बचा रहा राजस्व तंत्र?

कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज हुआ मामला, अपर कलेक्टर न्यायालय ने बार-बार मांगी रिपोर्ट—फिर भी SDM कोरबा से प्रतिवेदन नहीं!
BALCO ने प्रकरण खत्म कराने की लगाई अर्जी, न्यायालय ने ठुकराई; अब सवाल—सिर्फ प्रशासनिक देरी या पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल?
कोरबा। BALCO के आधिपत्य वाले विशाल भू-क्षेत्र की मापी और सीमांकन से जुड़ा राजस्व प्रकरण अब केवल BALCO की जमीन का मामला नहीं रह गया है। अपर कलेक्टर न्यायालय, कोरबा के आधिकारिक कार्यवाही विवरण को देखें तो यह मामला राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ही गंभीर सवाल खड़े करता दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल बेहद सीधा है—
जब कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू हुई, अपर कलेक्टर न्यायालय ने बार-बार जांच रिपोर्ट मांगी, स्मरण पत्र जारी किए—तो लगभग एक वर्ष तक SDM कोरबा से जांच प्रतिवेदन न्यायालय क्यों नहीं पहुंचा?
क्या यह केवल सामान्य प्रशासनिक विलंब है?
या फिर BALCO की जमीन की वास्तविक सीमाओं की जांच सामने आने से रोकने के पीछे कोई और कारण है?
इन सवालों का जवाब अब जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
कलेक्टर के निर्देश से शुरू हुआ था मामला
अपर कलेक्टर न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार प्रकरण क्रमांक 202508052900003/06/2024-25, ब-121 (विविध सामान्य राजस्व मामले) में आवेदक पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल तथा अनावेदक मुख्य कार्यपालन अधिकारी, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) हैं। 18 अगस्त 2025 की न्यायालयीन कार्यवाही में साफ दर्ज है कि BALCO/Vedanta के आधिपत्य क्षेत्र में आने वाले—
BALCO संयंत्र,
BALCO संयंत्र विस्तार परियोजना,
BALCO नगर आवासीय परिसर,
ऐश डाइक आदि
के लिए अधिग्रहित भूमि की मापी एवं सीमांकन कराने संबंधी शिकायत प्राप्त हुई थी।
न्यायालय ने प्रकरण दर्ज किया, SDM (राजस्व) कोरबा को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए पत्र भेजने और BALCO के CEO को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। यानी मामला किसी मौखिक आरोप पर नहीं, बल्कि बाकायदा राजस्व न्यायालय की कार्यवाही में पहुंच चुका था।
लेकिन जांच रिपोर्ट कहां है?
यहीं से इस पूरे मामले का सबसे गंभीर अध्याय शुरू होता है।
4 सितंबर 2025 को न्यायालय ने दर्ज किया—
«SDM (राजस्व) कोरबा से जांच प्रतिवेदन अप्राप्त।»
इसके बाद भी रिपोर्ट नहीं आई।
23 अक्टूबर 2025 को फिर वही स्थिति। इस बार न्यायालय को बाकायदा स्मरण पत्र जारी करने का आदेश देना पड़ा।
11 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट फिर नहीं आई और न्यायालय ने पुनः स्मरण पत्र जारी करने का आदेश दिया।
15 जनवरी 2026 को भी रिपोर्ट अप्राप्त रही और एक बार फिर स्मरण पत्र जारी करने की नौबत आई।
26 फरवरी 2026 को भी जांच प्रतिवेदन नहीं आया। फिर स्मरण पत्र जारी हुआ।
9 अप्रैल 2026 को भी रिपोर्ट नहीं।
21 मई 2026 को भी रिपोर्ट नहीं।
11 जून 2026 को भी रिपोर्ट नहीं।
और मामला यहीं खत्म नहीं होता।
9 जुलाई को BALCO पहुंचा मामला खत्म कराने!
इसी बीच 9 जुलाई 2026 की न्यायालयीन कार्यवाही ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया। BALCO की ओर से अधिवक्ता ने धारा 151, सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत आवेदन देकर प्रकरण को अपास्त/समाप्त कराने की मांग की।
BALCO की ओर से तर्क दिया गया कि यह ऐसा राजस्व मामला नहीं है जिसे पंजी-‘ब’ में दर्ज किया जाए तथा यह केवल शिकायत-पत्र है, इसलिए प्रकरण को समाप्त किया जाए। लेकिन अपर कलेक्टर न्यायालय ने BALCO का तर्क स्वीकार नहीं किया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आवेदन कलेक्टर कोरबा को प्रस्तुत किया गया था और कलेक्टर द्वारा अपर कलेक्टर को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद इसे ब-121 में दर्ज किया गया।
इसके बाद न्यायालय की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई—
“वादबिन्दु सीमांकन की कार्यवाही से संबंधित है जो राजस्व मामले से संबंधित है।” इसके आधार पर BALCO की ओर से धारा 151 CPC में प्रस्तुत आवेदन को “समाधानकारक नहीं” मानते हुए अस्वीकार कर दिया गया।
एक तरफ रिपोर्ट नहीं, दूसरी तरफ मामला खत्म कराने की कोशिश—संयोग या जांच का विषय?
यहीं से गंभीर सवाल उठते हैं।
एक तरफ जिला कलेक्टर के निर्देश पर मामला दर्ज होता है।
अपर कलेक्टर न्यायालय SDM कोरबा से जांच रिपोर्ट मांगता है।
बार-बार स्मरण पत्र जारी होते हैं।
महीने गुजरते जाते हैं।
लेकिन रिपोर्ट न्यायालय नहीं पहुंचती।
और दूसरी तरफ BALCO इसी बीच मूल प्रकरण को ही समाप्त कराने के लिए न्यायालय पहुंच जाता है।
इन दोनों घटनाक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर किसी मिलीभगत को सिद्ध करना अभी संभव नहीं है। उपलब्ध दस्तावेज़ ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं देता। लेकिन परिस्थितियां स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग जरूर करती हैं।
क्योंकि सवाल यह है—
SDM कार्यालय में ऐसा क्या था कि न्यायालय के बार-बार निर्देश के बावजूद जांच रिपोर्ट तैयार अथवा प्रस्तुत नहीं हुई?
रिपोर्ट किस अधिकारी के स्तर पर लंबित रही?
क्या मौके पर सीमांकन किया गया था?
यदि सीमांकन हुआ तो उसका पंचनामा और प्रतिवेदन कहां है?
यदि सीमांकन ही नहीं हुआ तो लगभग एक वर्ष तक न्यायालय को रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई?
स्मरण पत्र मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या BALCO के आधिपत्य वाली जमीन का वास्तविक सीमांकन होने पर कोई ऐसा तथ्य सामने आने की आशंका थी जिसे कोई पक्ष सार्वजनिक नहीं होने देना चाहता था?
इस प्रश्न का उत्तर अनुमान से नहीं, रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से आना चाहिए।
6 अगस्त तक भी रिपोर्ट नहीं!
9 जुलाई को BALCO का प्रकरण खत्म कराने वाला आवेदन खारिज होने के बाद भी स्थिति नहीं बदली।
6 अगस्त 2026 को BALCO की ओर से अधिवक्ता उपस्थित हुए और जवाब दाखिल किया गया।
लेकिन न्यायालयीन रिकॉर्ड में उस दिन भी दर्ज है—
SDM (राजस्व) से जांच प्रतिवेदन अप्राप्त।
अपर कलेक्टर न्यायालय को फिर स्मरण पत्र जारी करने का निर्देश देना पड़ा। अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 निर्धारित की गई।
यानी जिस रिपोर्ट की प्रक्रिया अगस्त 2025 में शुरू हुई, वह 6 अगस्त 2026 तक न्यायालय को प्राप्त नहीं हुई थी।
क्या अपर कलेक्टर न्यायालय के निर्देशों की भी परवाह नहीं?
यह प्रश्न किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि एक राजस्व न्यायालय किसी अधीनस्थ राजस्व कार्यालय से जांच प्रतिवेदन मांगता है और बार-बार स्मरण पत्र भेजने के बावजूद रिपोर्ट महीनों तक प्रस्तुत नहीं होती, तो जिला प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि—
देरी किस स्तर पर हुई और उसके लिए जिम्मेदार कौन है?
क्योंकि ऐसी स्थिति न्यायिक/अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न खड़ा करती है।
अब कलेक्टर को खुद देखनी चाहिए पूरी फाइल
इस प्रकरण में अब केवल सीमांकन कर देना पर्याप्त नहीं दिखाई देता। जरूरत है कि जिला कलेक्टर स्वयं यह जांच कराएं कि 18 अगस्त 2025 के बाद अपर कलेक्टर न्यायालय से SDM कार्यालय को कितने पत्र और स्मरण पत्र भेजे गए, वे कब प्राप्त हुए, किस अधिकारी/कर्मचारी को मार्क किए गए और प्रत्येक पत्र पर क्या कार्रवाई हुई।
फाइल की नोटशीट, पत्र प्राप्ति रजिस्टर, डिस्पैच रजिस्टर, सीमांकन आदेश, राजस्व निरीक्षक/पटवारी को दिए गए निर्देश और मौका पंचनामा सामने आते ही यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला सामान्य प्रशासनिक देरी का है या कहीं जानबूझकर जांच को लंबित रखने की कोशिश हुई।
BALCO से भी जवाब जरूरी
BALCO को भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि उसने सीमांकन से जुड़े मूल प्रकरण को समाप्त कराने के लिए धारा 151 CPC का आवेदन आखिर क्यों दिया?
हालांकि किसी पक्ष द्वारा कानूनी आवेदन प्रस्तुत करना उसका वैधानिक अधिकार है और मात्र इससे किसी गलत मंशा को सिद्ध नहीं किया जा सकता।
लेकिन जनहित का सवाल फिर भी कायम है—
यदि कंपनी का कब्जा और अधिग्रहण रिकॉर्ड पूरी तरह स्पष्ट है तो निष्पक्ष सरकारी सीमांकन से आपत्ति क्यों?
इस प्रश्न का सबसे अच्छा उत्तर भी रिकॉर्ड आधारित सीमांकन ही दे सकता है।
मिलीभगत सिद्ध नहीं—लेकिन जांच की पर्याप्त वजह जरूर
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क उपलब्ध न्यायालयीन रिकॉर्ड के आधार पर किसी अधिकारी और BALCO के बीच मिलीभगत को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
लेकिन लगभग एक वर्ष तक जांच रिपोर्ट का न्यायालय तक नहीं पहुंचना, बार-बार स्मरण पत्र जारी होना और इसी अवधि में BALCO द्वारा प्रकरण समाप्त कराने की कोशिश—ऐसी परिस्थितियां जरूर पैदा करती हैं जिनकी स्वतंत्र जांच आवश्यक दिखाई देती है।
यह जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि यदि अधिकारियों पर लग रहा संदेह निराधार है तो वह भी समाप्त हो सके और यदि किसी स्तर पर जानबूझकर फाइल रोकी गई है तो जिम्मेदारी तय हो।
अब सवाल जमीन से बड़ा है—सवाल राजस्व व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।
आखिर रिपोर्ट किसने रोकी?
किस स्तर पर रोकी?
क्यों रोकी?
और किसे इससे फायदा मिलता?
इन सवालों का उत्तर फाइलों में छिपा हो सकता है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस प्रकरण से जुड़े सभी पक्षों—जिला प्रशासन, SDM कार्यालय और BALCO—का पक्ष प्रकाशित करने के लिए तैयार है।
— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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