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BALCO पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

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 46 प्रभावित परिवारों को मुआवजा, पर्यावरण उल्लंघन पर सख्त टिप्पणी

 

हाईकोर्ट और NGT के आदेशों के बीच कोरबा प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

 

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ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क….

कोरबा। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) की औद्योगिक गतिविधियों, राखड़ प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अपर कलेक्टर न्यायालय, कोरबा द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को जारी विस्तृत आदेश में कंपनी की गतिविधियों, प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों, पर्यावरणीय नियमों के पालन और मुआवजा वितरण से जुड़े कई गंभीर तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया गया है।

 

आदेश में साफ कहा गया है कि BALCO की औद्योगिक गतिविधियों और राखड़ प्रबंधन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। मामले में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, जल अधिनियम 1974 और वायु अधिनियम 1981 सहित कई कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने यह भी माना कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से प्रदूषण, राखड़ उड़ने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायतें की जाती रही हैं।

 

मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि इसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और विभिन्न न्यायिक याचिकाओं का हवाला आदेश में दर्ज है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि BALCO से जुड़े विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे बल्कि न्यायालयों तक पहुंचे और कई बार जांच तथा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए।

46 परिवारों को प्रभावित मानते हुए मुआवजा प्रक्रिया

आदेश में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि राखड़ डंपिंग और औद्योगिक प्रभाव से प्रभावित 46 परिवारों को चिन्हित किया गया। इन परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और भूमि संबंधी दावों पर प्रशासन ने विस्तृत विचार किया है। दस्तावेज में करोड़ों रुपये के मुआवजा वितरण का भी उल्लेख किया गया है।

 

प्रशासन ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि प्रभावित परिवारों द्वारा लगातार शिकायतें की गईं कि राखड़ उड़ने से खेती, जल स्रोत और स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर राखड़ प्रबंधन और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाए गए।

प्रशासन ने दिए सख्त निर्देश

अपर कलेक्टर न्यायालय ने आदेश में संबंधित विभागों और BALCO प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रभावित परिवारों की सूची, मुआवजा प्रक्रिया और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई को नियमानुसार पूरा करने पर जोर दिया गया है।

आदेश में यह भी कहा गया कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण यदि स्थानीय आबादी प्रभावित होती है तो कंपनी की जवाबदेही तय होगी। प्रशासन ने राखड़ प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लेकर संबंधित एजेंसियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

 

BALCO की दलील भी दर्ज

दस्तावेज में BALCO प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत पक्ष का भी उल्लेख किया गया है। कंपनी ने कई आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने नियमानुसार पर्यावरणीय अनुमति और आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और पुनर्वास प्रक्रिया में प्रशासनिक निर्देशों का पालन किया गया है।

हालांकि प्रशासन ने मामले में विभिन्न रिपोर्टों, निरीक्षणों और शिकायतों को आधार मानते हुए विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश पारित किया।

फिर केंद्र में आया राखड़ और प्रदूषण का मुद्दा

कोरबा लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण और राखड़ डंपिंग को लेकर चर्चा में रहा है। BALCO से जुड़े इस आदेश ने एक बार फिर पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती से निगरानी करे तो प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी लाई जा सकती है।

 

अब निगाह इस बात पर है कि BALCO प्रशासनिक निर्देशों और पर्यावरणीय मानकों का पालन कितनी गंभीरता से करता है। वहीं प्रभावित परिवारों को न्याय और राहत मिलने की उम्मीद भी इस आदेश के बाद बढ़ गई है।

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