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KORBA : 28 करोड़ के पौधरोपण में बड़ा खेल ! PMO से शिकायत के बाद राज्यपाल ने लिया संज्ञान, अब होगी केंद्रीय स्तर की जांच ?

कोरबा । छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम, कोरबा में करोड़ों रुपए के पौधरोपण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है । वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच डिपॉजिट रोपण के तहत करीब 28 करोड़ 38 लाख रुपए की राशि विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में खर्च की गई, लेकिन इस पूरे कार्य में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं ।

मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय ( PMO ) तक पहुंचने के बाद अब राज्यपाल सचिवालय ने भी इस पर संज्ञान ले लिया है । राज्यपाल के अवर सचिव ने छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव को निर्देश जारी कर केंद्रीय स्तर की संयुक्त जांच टीम गठित कराने को कहा है । इस आदेश के बाद लंबे समय से लंबित इस मामले में अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ गई है ।

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बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला NTPC कोरबा, SECL के कुसमुंडा, दीपका, गेवरा क्षेत्र, CSPGCL कोरबा पूर्व एवं पश्चिम क्षेत्रों में किए गए पौधरोपण, एक वर्षीय रखरखाव, ग्रासबेड, फेंसिंग, वर्मीकम्पोस्ट, कंटूर ट्रेंच, चेकडेम, पत्थर बोल्डर और बांध निर्माण कार्यों से जुड़ा हुआ है । शिकायत के अनुसार इन सभी कार्यों में प्राक्कलन, सामग्री क्रय, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं ।

इस संबंध में पूर्व में भी राज्य स्तर पर जांच की मांग की गई थी । प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम रायपुर को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच, भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण कराने का अनुरोध किया गया था । साथ ही 30 दिनों के भीतर जांच समिति गठित कर रिपोर्ट देने की बात कही गई थी, लेकिन तय समयसीमा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ।

 फील्ड जांच से बचने का आरोप, दफ्तर में ही निपटाने की कोशिश !

सूत्रों के मुताबिक, फील्ड स्तर की शिकायत होने के बावजूद जांच को कार्यालय स्तर पर ही सीमित रखने की कोशिश की गई । शिकायतकर्ता को बुलाकर साक्ष्य प्रस्तुत करने का दबाव बनाया गया, जबकि उसने स्पष्ट रूप से फील्ड में भौतिक सत्यापन की मांग की थी । यहां तक कि शिकायत के स्रोत और आधार की जानकारी भी मांगी गई, जिसे लेकर कानूनी सवाल भी खड़े हो रहे हैं ।

 तीन पूर्व DM को बचाने की कोशिश ?

मामले में आरोप है कि तत्कालीन मंडल प्रबंधकों — बी.एस. सरोटे, एच.सी. पहारे और देवेंद्र कुमार के कार्यकाल में हुए कार्यों को बचाने के लिए जांच को प्रभावित किया गया । बिना पारदर्शी जांच के औपचारिकता निभाकर क्लीनचिट देने की कोशिश की गई, ताकि शासकीय राशि की रिकवरी से बचा जा सके ।

 MD कार्यालय पर भी उठे सवाल !

शिकायतकर्ता ने बार-बार प्रबंध संचालक कार्यालय को पत्र लिखकर राज्य स्तरीय जांच की मांग की, लेकिन 30 दिनों की तय अवधि के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया । इससे विभागीय स्तर पर संरक्षण देने के आरोप और मजबूत हो गए हैं ।

???? रेंजर और अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध !

प्रकरण में यह भी सामने आया है कि कुछ रेंजर और अधिकारी लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थ हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं । शिकायतकर्ता ने पारदर्शी जांच के लिए संबंधित अधिकारियों के तबादले की मांग भी की, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

राज्य एजेंसियों से भरोसा टूटा, PMO तक पहुंची शिकायत !

लगातार अनदेखी और कार्रवाई न होने के कारण शिकायतकर्ता का राज्य स्तर की जांच एजेंसियों से भरोसा उठ गया । इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच टीम से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई ।

 अब राज्यपाल सचिवालय की एंट्री से बढ़ी उम्मीद !

PMO और अन्य उच्च स्तरों पर शिकायत पहुंचने के बाद राज्यपाल सचिवालय ने आखिरकार मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय स्तर की संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं । इससे अब उम्मीद जताई जा रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी ।

जमीनी हकीकत चौंकाने वाली ?

सूत्रों का दावा है कि कई स्थानों पर पौधे लगाए ही नहीं गए, और जहां लगाए गए वहां बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं । वहीं चेकडेम, फेंसिंग और अन्य निर्माण कार्यों में भी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल हैं ।

फिलहाल अब पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि यदि आरोप सही पाए गए तो यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े पौधरोपण घोटालों में से एक साबित हो सकता है ।

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