विधानसभा तक पहुंचा खसरा 543/1 का विवाद, अब उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान ने उठाए गंभीर सवाल—
“क्या जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा को अधूरी या भ्रामक जानकारी दी गई?”
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। ग्राम रोगबहरी के खसरा नंबर 543/1 से जुड़े कथित दस्तावेजी विरोधाभास और राखड़ डैम प्रकरण अब छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पहुंच चुका है। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सदन में जवाब प्रस्तुत किया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान (प्रदेश सचिव, भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ एवं संपादक, ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क) ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अब्दुल सुल्तान का कहना है कि उनकी शिकायत का मूल आधार उपलब्ध दस्तावेजों में दिखाई देने वाले कथित विरोधाभास, रिकॉर्ड के सत्यापन और संभावित फर्जीवाड़े की जांच था। लेकिन अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया कि शिकायत की जांच किस अधिकारी ने की, कब की, किन मूल अभिलेखों का मिलान किया गया और किस आधार पर विधानसभा के लिए रिपोर्ट तैयार की गई।

उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया है कि यदि जांच हुई थी, तो शिकायतकर्ता को न तो जांच में शामिल किया गया और न ही जांच रिपोर्ट अथवा निष्कर्ष से अवगत कराया गया । ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या जिला प्रशासन द्वारा राज्य शासन को भेजी गई जानकारी पूरी तरह सत्यापित थी?
सरकार से प्रमुख मांगें
खसरा नंबर 543/1 प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।
विधानसभा में भेजी गई जिला प्रशासन की रिपोर्ट और मूल अभिलेखों का पुनः सत्यापन कराया जाए।
यदि जांच में तथ्य छिपाने, अधूरी या भ्रामक जानकारी भेजने अथवा दस्तावेजों में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित राजस्व एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता को पूरी जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए तथा जांच प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
जनहित का प्रश्न
यह मामला केवल एक शिकायत का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता, जिला प्रशासन की जवाबदेही और छत्तीसगढ़ विधानसभा को उपलब्ध कराई गई जानकारी की प्रामाणिकता से जुड़ा है। यदि किसी स्तर पर तथ्यों का सही सत्यापन नहीं हुआ है, तो निष्पक्ष जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास दोनों के लिए आवश्यक है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर हैं कि क्या वे इस गंभीर प्रकरण में स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कराकर पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक करेंगे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रामक सूचना देने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
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