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आठ घंटे की तालाबंदी से बिलासपुर मुख्यालय तक पहुंची भूविस्थापितों की आवाज

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विधायक प्रेमचंद पटेल की मौजूदगी में SECL के निदेशकों से सीधी वार्ता; कुछ मांगों पर बनी सहमति, शेष पर 4–5 दिनों में लिखित जवाब देने का भरोसा

 

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आमगांव, दर्राखांचा, मलगांव और सुआभोड़ी के लंबित नौकरी-मुआवजा प्रकरण 15 दिनों में निपटाने पर सहमति; जयंती नगर को पूर्ण विकसित बसाहट बनाने की उठी मांग

 

हरदीबाजार | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क दीपका महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर आठ घंटे चली तालाबंदी के बाद हरदीबाजार, रेंकी और सराईसिंगार के भूविस्थापितों की आवाज आखिरकार एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर तक पहुंची। सोमवार, 21 सितंबर को सीएमडी सभागार में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में भूविस्थापितों और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक में पुनर्वास, बसाहट, रोजगार और मुआवजे से जुड़े वर्षों पुराने मामलों पर सीधी तथा विस्तृत चर्चा हुई। कुछ मांगों पर सहमति बनी, जबकि शेष मुद्दों पर एसईसीएल प्रबंधन ने परीक्षण के लिए समय मांगते हुए चार से पांच दिनों के भीतर लिखित जवाब देने का भरोसा दिलाया।

तालाबंदी ने खोला मुख्यालय की बातचीत का दरवाजा

हरदीबाजार, रेंकी और सराईसिंगार के भूविस्थापितों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 19 सितंबर को विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में दीपका महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी की थी। आंदोलन करीब आठ घंटे चला। तीन दौर की वार्ता के बाद कटघोरा एसडीएम नितिन दुबे और दीपका महाप्रबंधक ने एसईसीएल मुख्यालय से चर्चा कर 21 सितंबर को बिलासपुर स्थित सीएमडी कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक कराने पर सहमति दी। इसके बाद शाम लगभग पांच बजे आंदोलन स्थगित किया गया था। यह बैठक उसी सहमति का परिणाम रही, जिसमें भूविस्थापितों ने स्थानीय स्तर पर वर्षों से उलझे मामलों को पहली बार एसईसीएल के वरिष्ठ प्रबंधन के सामने सीधे रखा।

उतरदा की जमीन पर बसाहट को लेकर नहीं बनी सहमति

बैठक में सुपेतपारा बाईपास के किनारे उतरदा की भूमि पर प्रस्तावित बसाहट का विषय प्रमुखता से उठा, लेकिन इस विकल्प पर सहमति नहीं बन सकी। भूविस्थापितों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि उन्हें अधूरी अथवा विवादित जगह भेजने के बजाय जयंती नगर को सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ पूर्ण रूप से विकसित कर वहीं बसाहट दी जाए। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास का अर्थ केवल जमीन का एक टुकड़ा देना नहीं है। बसाहट स्थल पर सड़क, बिजली, पानी, नाली, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधा और आजीविका से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी एसईसीएल की जिम्मेदारी है।

अधिग्रहण के बाद खरीदे गए मकानों के मुआवजे पर हुई अहम चर्चा

वर्ष 2004 से 2010 के बीच भूमि अधिग्रहण के बाद हुई खरीद-बिक्री तथा मकानों की नापी से संबंधित मामलों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मांग रखी गई कि वास्तविक मकान मालिकों को नियमानुसार सोलैटियम सहित उचित मुआवजा दिया जाए। ड्रोन सर्वेक्षण के बाद निर्मित बताए जा रहे मकानों को नया मानकर उनके मुआवजे में 60 प्रतिशत कटौती करते हुए केवल 40 प्रतिशत भुगतान निर्धारित किए जाने पर भूविस्थापितों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। प्रभावितों ने मांग की कि ऐसे मकानों का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए और पात्र हितग्राहियों को सोलैटियम सहित पूरा न्यायसंगत मुआवजा मिले। इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच गंभीर और सार्थक चर्चा हुई, लेकिन अंतिम निर्णय लिखित रूप में सामने आना अभी बाकी है।

प्रति खाते नौकरी के पुराने प्रावधान पर मांगा गया जवाब

भूविस्थापितों ने वर्ष 2004 में अधिग्रहण के समय लागू नीति के अनुसार प्रति खाते रोजगार देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। एसईसीएल प्रबंधन ने संबंधित नीति, पात्रता और पुराने अभिलेखों का परीक्षण कर निर्णय बताने की बात कही। इसके साथ ही अधिग्रहण से शेष बची लगभग 212 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर प्रभावित परिवारों को समुचित बसाहट प्रदान करने की मांग रखी गई। प्रबंधन ने इस विषय पर भी परीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट करने का भरोसा दिया।

चार गांवों के लंबित प्रकरण 15 दिनों में निपटाने पर सहमति

विधायक प्रेमचंद पटेल ने आमगांव, दर्राखांचा, मलगांव और सुआभोड़ी के भूविस्थापितों के लंबित रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास प्रकरणों को बैठक में मजबूती से उठाया। चर्चा के दौरान इन मामलों में आवश्यक कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के भीतर समाधान की दिशा में कदम उठाने पर सहमति बनने की बात सामने आई। यदि यह समयसीमा जमीन पर लागू होती है, तो लंबे समय से कार्यालयों के चक्कर लगा रहे अनेक प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकती है।

मुआवजे के लिए फिलहाल मकान नहीं तोड़े जाएंगे

बैठक का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष हरदीबाजार के मकानों से जुड़ा रहा। एसईसीएल के निदेशक स्तर के अधिकारियों की टीम ने कहा कि मुआवजा प्रक्रिया के नाम पर फिलहाल मकान नहीं तोड़े जाएंगे।  इस आश्वासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत अवश्य मिली है, लेकिन ग्रामीणों की निगाह अब लिखित आदेश पर टिकी है। उनका कहना है कि मौखिक आश्वासन तभी भरोसेमंद होगा, जब उसे स्पष्ट समयसीमा और अधिकारी की जिम्मेदारी के साथ लिखित रूप दिया जाए।

चार–पांच दिनों में लिखित जवाब का इंतजार

एसईसीएल प्रबंधन ने शेष सभी मांगों पर विचार कर चार से पांच दिनों के भीतर लिखित उत्तर देने पर सहमति जताई। अब इस वार्ता की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि बैठक में बनी सहमतियां कागज से निकलकर जमीन पर कब उतरती हैं। आठ घंटे की तालाबंदी के बाद मुख्यालय तक पहुंचा मामला फिलहाल बातचीत की मेज पर है। भूविस्थापितों को अब आश्वासन नहीं, स्पष्ट आदेश, निर्धारित समयसीमा और वास्तविक क्रियान्वयन की प्रतीक्षा है।

एसईसीएल की ओर से ये अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में एसईसीएल की ओर से निदेशक मानव संसाधन वीरंची दास, निदेशक तकनीकी पीएंडपी मोहपात्रा, महाप्रबंधक एलएंडआर बिपिन कुमार लाल, दीपका महाप्रबंधक अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। भूविस्थापितों की ओर से कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, हरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर, उपसरपंच रेखा जायसवाल, श्यामू जायसवाल, रघुराज सिंह उईके, नरेश टंडन, व्यास राठौर, महेंद्र राठौर, राजेश जायसवाल, शिव यादव, फिरोज खान, जगदीश अग्रवाल, अनिल टंडन, मन्नू राठौर, राजाराम राठौर, प्रदीप पांडेय, ममता ओग्रे, प्रेम डिक्सेना, शशिधर सोनी, सुरेंद्र राठौर, प्रदीप राठौर, इंद्रभूषण ओढ़े, सुधीर कंवर, चंद्रिका प्रजापति, दिलीप राठौर, कमलेश राठौर, पंकज धुर्वा, रमन कुल्हाड़े, गणेश श्रीवास सहित बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण शामिल हुए।

अब लिखित आदेश बताएगा—वार्ता सार्थक थी या सिर्फ आंदोलन टालने की कवायद?

बैठक ने संवाद का रास्ता अवश्य खोला है, लेकिन भूविस्थापितों के वर्षों पुराने अनुभव बताते हैं कि मौखिक भरोसे और वास्तविक न्याय के बीच अक्सर लंबा फासला रह जाता है। अब एसईसीएल के सामने अपनी विश्वसनीयता साबित करने की जिम्मेदारी है। चार से पांच दिनों में लिखित जवाब और 15 दिनों में लंबित मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मुख्यालय की यह बैठक समाधान का मंच कम और आंदोलन को कुछ दिनों के लिए टालने की कवायद अधिक मानी जाएगी।

भूविस्थापितों ने अपनी बात स्पष्ट कर दी है—कोयला निकालने से पहले जमीन ली गई थी; अब अधिकार देने की बारी है।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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