तीवरता के कोयला कारोबार की ‘काली छाया’ पर सवाल—खुर्शीद की भूमिका, वाशरी के आर्थिक रिश्ते और SECL की निगरानी की परतें कब खुलेंगी?

अशोक के तीवरता समूह से जुड़े कारोबार की दस्तावेजी पड़ताल जारी; खदान से वाशरी तक रिकॉर्ड के मिलान और संभावित छिपी हिस्सेदारी की जांच की मांग
कोरबा/बिलासपुर। सरकारी खदान का कोयला निजी कारोबारी शृंखला में पहुंचता है तो उसके साथ जवाबदेही भी पहुंचनी चाहिए। किसका डिलीवरी ऑर्डर था, किसने निकासी मंजूर की, किस वाहन ने कोयला उठाया और वाशरी ने कितना प्राप्त किया—इन सवालों का उत्तर हर चरण के रिकॉर्ड में मिलना चाहिए। राष्ट्रीय संपदा का हिसाब किसी अधिकारी की सुविधा या किसी कारोबारी के प्रभाव पर नहीं छोड़ा जा सकता।
ग्राम यात्रा की पूर्व रिपोर्ट ने एन. खुर्शीद, राजेश सिंह और संतोष सिन्हा की सूत्रों से बताई गई भूमिकाओं सहित सेल्स, रोड-सेल, लोडिंग और डिस्पैच व्यवस्था की जांच का प्रश्न उठाया था। इन भूमिकाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी अपेक्षित है। अगली पड़ताल का केंद्र है—संबंधित निर्णयों, निजी कारोबारी हितों और निगरानी की जिम्मेदारियों का दस्तावेजी परीक्षण।
खुर्शीद और संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल की फाइल खुले
एन. खुर्शीद किस अवधि में किस पद पर रहे?
उनके पास कौन-से प्रशासनिक और डिजिटल अधिकार थे?
संबंधित अवधि में किन ग्राहकों के डिलीवरी ऑर्डर जारी या संशोधित हुए और निकासी की प्राथमिकता किस आधार पर तय हुई?
राजेश सिंह, संतोष सिन्हा और संबंधित कर्मचारियों की पदस्थापना, कार्यकाल तथा निर्णयों का भी यही परीक्षण होना चाहिए। केवल नाम पूछकर जांच पूरी नहीं होगी। हस्ताक्षर, लॉगिन, आदेश और उनके परिणाम मिलाने होंगे। किसी खरीदार को रोका गया और किसी अन्य को प्राथमिकता मिली हो, तो उसका कारण रिकॉर्ड में होना चाहिए। मौखिक सफाई उस रिकॉर्ड का विकल्प नहीं बन सकती।
वाशरी में किसी अधिकारी का आर्थिक हित है? प्रतिशत की चर्चा को प्रमाण की कसौटी पर रखिए
तीवरता समूह और संबंधित कोयला कारोबार की जांच में यह प्रश्न भी शामिल होना चाहिए कि क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आर्थिक हित है। क्या घोषित शेयरधारिता, साझेदारी, ऋण, निवेश या लाभकारी स्वामित्व का कोई ऐसा संबंध है जो सरकारी पद की जिम्मेदारी से टकराता हो?
वाशरी में किसी अधिकारी का कथित “प्रतिशत तय” होने का दावा अभी प्रमाणित नहीं है। इसलिए जांच कंपनी के स्वामित्व रिकॉर्ड, वैधानिक संपत्ति विवरण और सक्षम एजेंसी द्वारा वित्तीय लेन-देन के परीक्षण से होनी चाहिए।
यहां कठोर सवाल पूछना जरूरी है: जिस कारोबार पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी है, उसमें कोई निजी आर्थिक संबंध निकले तो उसे घोषित किया गया था या नहीं? संबंध होने और भ्रष्टाचार सिद्ध होने में अंतर है; जांच को दोनों का स्पष्ट निर्धारण करना होगा।
अशोक और तीवरता समूह के कारोबार का भी पूरा हिसाब सामने आए
कंपनी की वेबसाइट पर अशोक कुमार धुल्यानी का नाम और कोयला हैंडलिंग, व्यापार, बेनिफिशिएशन तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियां दर्ज हैं। इन कारोबारी गतिविधियों की जांच में प्रत्येक कंपनी की अलग कानूनी पहचान और वास्तविक भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए।
किस ग्राहक का कितना कच्चा कोयला आया? धुलाई के बाद कितना वाश्ड कोल और रिजेक्ट निकला? माल ग्राहक को लौटाया गया या उसके निर्देश पर किसी अन्य गंतव्य पहुंचा? शुरुआती स्टॉक, आवक, प्रसंस्करण, निकासी और अंतिम स्टॉक का मिलान क्या कहता है?
खदान की कांटा-पर्ची और वाशरी की प्राप्ति-पर्ची साथ रखिए। फिर उत्पाद, रिजेक्ट और भुगतान का हिसाब मिलाइए। गड़बड़ी है तो उसका प्रमाण इसी शृंखला में तलाशना होगा।
सड़क जनता की है—वाशरी की निजी पार्किंग नहीं
वाशरी के संचालन से जुड़ा नवंबर 2024 का CECB पत्र ट्रकों की पार्किंग परिसर के भीतर रखने और सार्वजनिक स्थान का उपयोग पार्किंग के लिए नहीं करने की शर्त रखता है। इसमें धूल नियंत्रण, पक्की सड़क और अन्य पर्यावरणीय व्यवस्थाएं भी निर्धारित हैं।
20 मार्च 2024 के सहमति दस्तावेज में सड़क इस्तेमाल के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, यांत्रिक रूप से ढके वाहनों से कोयला परिवहन और प्रवेश–निकास पर व्हील वाशिंग जैसी शर्तें दर्ज हैं।
यदि मौके पर सार्वजनिक सड़क पर ट्रक पार्किंग, खुले कोयले का परिवहन या धूल नियंत्रण की विफलता मिले, तो संबंधित शर्त के साथ उसका प्रमाण दर्ज कर कार्रवाई हो। निरीक्षण में दिन, समय, तस्वीर, वाहन और वास्तविक स्थिति सामने आए। केवल “व्यवस्था संतोषजनक है” लिख देने से जनता के प्रश्न समाप्त नहीं होंगे।
मुख्य मार्ग के पास स्थित होना अपने आप में अवैधता नहीं है। सार्वजनिक दस्तावेज वाशरी को लिम्हा, बिलासपुर में बताते हैं। उसी स्थल की नवीनतम अनुमति और वर्तमान अनुपालन की जांच जरूरी है।
क्षमता का विस्तार—प्रस्ताव और स्वीकृति का अंतर स्पष्ट हो
पर्यावरणीय ड्राफ्ट में वाशरी की क्षमता 0.96 से 2.48 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने का प्रस्ताव दर्ज है। उसमें ग्राहकों के कोयले का स्रोत SECL की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानें बताया गया है। अंतिम विस्तार मंजूरी और वर्तमान स्वीकृत क्षमता की पुष्टि अभी जरूरी है।
इसलिए जांच बताए—वास्तविक आवक और प्रसंस्करण संबंधित अवधि की स्वीकृत क्षमता के भीतर था या नहीं? प्रस्ताव को मंजूरी मानकर और पुराने आदेश को वर्तमान अनुमति मानकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
CMD हरीश दुहन और संबंधित GM/CGM—जवाबदेही नीचे तक ही क्यों सीमित रहे?
SECL CMD हरीश दुहन, संबंधित अवधि के GM/CGM, बिक्री, डिस्पैच, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा अधिकारियों से संस्थागत जवाब मांगा जाना चाहिए। हरीश दुहन का CMD पद 2026 के आधिकारिक स्रोत में दर्ज है।
कौन रिकॉर्ड सुरक्षित करेगा?
कौन स्वतंत्र मिलान कराएगा?
संभावित हितों के टकराव की जांच किसके जिम्मे होगी?
शिकायत प्राप्त हुई हो तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
वरिष्ठ पद पर बैठना केवल उपलब्धियों का श्रेय लेना नहीं है; अपने अधिकार क्षेत्र की निगरानी का हिसाब देना भी है। वाशरी की पर्यावरणीय शर्तों का उत्तर कंपनी और CECB दें। खदान से कोयला निकासी तथा लागू अनुबंधों का उत्तर SECL दे। जहां दोनों रिकॉर्ड जुड़ते हैं, वहां समन्वित जांच हो।
ग्राम यात्रा की दस्तावेजी पड़ताल जारी—अगली परत नाम, पद और रिकॉर्ड के साथ
आगे की रिपोर्ट में सत्यापित पदस्थापना, कंपनी रिकॉर्ड, अनुमतियां, कोयला आवक–निकासी और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने रखी जाएंगी। दस्तावेज मिलने पर उनका परीक्षण होगा—पहले से दोष तय करके नहीं।
कोयले का कारोबार बड़ा है तो जांच छोटी क्यों हो? खदान का गेट, सेल्स की मेज, कांटा घर, वाशरी और मुख्यालय—जवाबदेही की कोई कड़ी छूटनी नहीं चाहिए।
किसी उल्लिखित व्यक्ति की निजी हिस्सेदारी, अवैध लाभ या मिलीभगत अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है। संबंधित पक्षों का तथ्यात्मक उत्तर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक—अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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