नगर निगम कोरबा में ‘GeM का गेम’? पौधे पहले पहुंचे—अब दूसरे विक्रेताओं के लिए पोर्टल का दरवाजा बंद!

3,070 पौधों की निविदा में Catalogue Offering पर अटक रही कंपनियां; ₹50 लाख OEM टर्नओवर की दीवार—क्या चहेते ठेकेदार के नाप से सिली गई टेंडर की शर्तें?
दो कंपनियों की कथित बोलियों के पीछे एक ही नियंत्रण-कक्ष तो नहीं? निविदा रोककर IP, device, catalogue और बैंक संबंधों की जांच जरूरी
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम कोरबा की पौधा खरीदी में अब मिट्टी से ज्यादा ‘सेटिंग’ की गंध उठ रही है। जिस निविदा के बंद होने से पहले पौधे कथित रूप से निगम परिसर में पहुंच चुके थे, अब उसी tender में दूसरे विक्रेताओं द्वारा GeM portal पर catalogue जोड़ने और bid में प्रवेश नहीं कर पाने की शिकायत सामने आई है।
शिकायतकर्ता seller का दावा है—
«“दो कंपनियों से tender डलवाने की कोशिश हो रही है। हमारी कंपनी का catalogue स्वीकार नहीं हो रहा। लगता है tender पहले से किसी तय कंपनी के हिसाब से बनाया गया है।”»
यह आरोप अभी स्वतंत्र जांच का विषय है। Catalogue rejection तकनीकी mismatch अथवा seller-side कमी से भी हो सकता है। लेकिन पहले पौधों का पहुंचना, फिर कठोर पात्रता शर्तें और अब प्रतिस्पर्धी कंपनियों का catalogue स्तर पर अटकना—इन परिस्थितियों को केवल “portal error” बताकर दबाया नहीं जा सकता।
3,070 पौधे—आठ दस्तावेजों का पहरा
संबंधित निविदा GEM/2026/B/7982716, Tender ID 9831335 है। इसे 3 सितंबर 2026 को नगर निगम कोरबा के लिए 3,070 पौधों की खरीदी हेतु जारी किया गया।
इसमें:
– bidder का न्यूनतम turnover ₹18 लाख;
– OEM annual turnover ₹50 लाख;
– एक वर्ष का अनुभव;
– 20 प्रतिशत past performance;
– OEM Authorization Certificate;
– ATC Certificate और BOQ Compliance सहित आठ दस्तावेज अनिवार्य हैं।
सवाल है—पौधों की खरीद में ₹50 लाख turnover वाला OEM कौन है? नर्सरी संचालक, पौधा उत्पादक, ब्रांड स्वामी या वह कंपनी जिसके दस्तावेज देखकर शर्तों का पूरा जाल बुना गया?
प्रतिस्पर्धा tender खुलने से पहले ही खत्म?
स्क्रीनशॉट में पौधों की 11 अलग-अलग मदें और उनके सामने “SELECT CATALOGUE” दिखाई दे रहा है। शिकायत इसी स्तर पर bid participation बाधित होने की है। यदि specifications बाजार की सामान्य उपलब्धता पर आधारित हैं, तो अनेक पात्र nurseries को catalogue जोड़ने में सक्षम होना चाहिए। लेकिन यदि variety, height, age, pot size अथवा category किसी खास seller के catalogue के अनुरूप lock की गई है, तो बाकी कंपनियां कीमत प्रस्तुत करने से पहले ही बाहर हो जाएंगी। तब L-1 का मुकाबला financial bid में नहीं—tender लिखते समय ही समाप्त हो चुका होगा।
पौधे पहले पहुंचे, प्रक्रिया पीछे दौड़ती रही!
उपलब्ध फोटो, वीडियो, nursery slip, freight voucher और waybill के अनुसार 8 सितंबर को आंध्र प्रदेश से पौधों का वाहन CG04 RB 0409 निगम के पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर में पहुंचने का दावा पहले ही सामने आ चुका है।
उस समय:
– bid बंद नहीं हुई थी;
– technical और financial bids नहीं खुली थीं;
– L-1 तय नहीं था;
– सार्वजनिक work order सामने नहीं था। दस्तावेज में “Umesh Sir” का उल्लेख भी सवालों के घेरे में है।
अब प्रशासन बताए—यदि ठेकेदार तय नहीं था तो पौधे किसने मंगाए?
किस आदेश से स्वीकार किए?
और यदि वे इस tender के पौधे नहीं थे तो उनकी खरीदी, आपूर्ति और भुगतान का अलग वैध रिकॉर्ड कहां है?
दो कंपनियां या दो मुखौटे?
यदि tender में दो कंपनियां bid डालती हैं तो उनकी संख्या देखकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। जांच में सामने आना चाहिए:
– दोनों bids किस IP और device से डाली गईं?
– directors, partners और beneficial owners कौन हैं?
– consultant, accountant अथवा authorised person एक तो नहीं?
– OEM authorization किस nursery ने दिया?
– catalogue creation और bid submission का समय क्या है?
– GST, bank account, mobile, email या address में कोई संबंध है?
– पौधे पहुंचाने वाले supplier और “Umesh Sir” से दोनों कंपनियों का क्या रिश्ता है?
दो कंपनी नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन यदि पीछे बैठा संचालक एक है तो प्रतिस्पर्धा केवल कागजी पर्दा होगी। मामला यहीं नहीं रुकेगा—निविदा रोककर डिजिटल जांच हो
नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, नगरीय प्रशासन विभाग और GeM प्रशासन को तत्काल:
1. Tender की opening, evaluation, award और भुगतान पर अस्थायी रोक लगानी चाहिए।
2. GeM का bid creation और modification audit log सुरक्षित करना चाहिए।
3. buyer login की catalogue search और view history निकालनी चाहिए।
4. सफल और असफल sellers के catalogue IDs, error codes और timestamps जांचने चाहिए।
5. bidders के IP, device, DSC, GST, bank और ownership records का मिलान करना चाहिए।
6. ₹50 लाख OEM turnover तथा अन्य ATC शर्तों का लिखित औचित्य मांगना चाहिए।
7. वाहन, nursery invoice, waybill, freight voucher, CCTV, inward और stock register जब्त करने चाहिए।
8. कम से कम तीन स्वतंत्र sellers से catalogue-mapping trial कराना चाहिए।
यदि प्रारंभिक जांच में specifications किसी खास seller के अनुसार बनाए जाने, tender से पहले माल मंगाने अथवा bidders की मिलीभगत के संकेत मिलते हैं तो वर्तमान निविदा तत्काल निरस्त कर सरल, vendor-neutral और पारदर्शी शर्तों के साथ पुनः tender जारी किया जाए।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ के सीधे सवाल
क्या निगम की आवश्यकता देखकर tender बनाया गया या चहेती कंपनी की qualification देखकर?
Bid बंद होने से पहले पौधे किस आदेश से पहुंचे?
पात्र seller का catalogue भीतर क्यों नहीं जा रहा?
₹50 लाख OEM turnover गुणवत्ता की शर्त है या प्रतिस्पर्धा काटने की कैंची?
और सबसे बड़ा सवाल—
GeM पर निष्पक्ष बोली चल रही है या पहले से तय सौदे को डिजिटल वैधता पहनाई जा रही है?
सरकारी portal कोई सजावटी पर्दा नहीं, जिसके पीछे पूर्वनिर्धारित खरीद को छिपा दिया जाए। निगम को अब प्रेस नोट नहीं—मूल फाइल, server log, IP trail और भुगतान रिकॉर्ड सामने रखना होगा। मामला यहीं नहीं रुकेगा—पौधों की जड़ों से लेकर GeM के डिजिटल गलियारों तक हर कड़ी की स्वतंत्र जांच जरूरी है। जल्द बड़ा खुलासा—दो कंपनियां, एक IP या एक ही नियंत्रण-कक्ष? Digital trail खोलेगा कथित ‘GeM के गेम’ का पूरा राज!
«संपादकीय स्पष्टीकरण: स्क्रीनशॉट catalogue selection में बाधा दर्शाता है, लेकिन अपने आप मिलीभगत प्रमाणित नहीं करता। समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, पूर्व घटनाक्रम और शिकायतकर्ता पक्ष के आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों और bidders का तथ्यात्मक जवाब आमंत्रित है तथा उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।»
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