क्या छत्तीसगढ़ विधानसभा में बालको वेदांता प्रबंधन के जवाब को अंतिम रूप दिया गया??? खसरा 543/1 का आखिर सच क्या है???

एक ही क्रमांक, एक ही दिनांक—कहीं 5 एकड़, कहीं 15 एकड़; छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पहुंचा दस्तावेजी विवाद…
शिकायतकर्ता ने पूछा—जांच हुई तो रिपोर्ट कहां है, नहीं हुई तो सदन को जवाब किस आधार पर दिया गया?
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। ग्राम रोगबहरी स्थित खसरा नंबर 543/1 का विवाद अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता और विधानसभा को दी गई जानकारी की सत्यता का प्रश्न बन गया है।
शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान का आरोप है कि समान क्रमांक और समान दिनांक वाले दस्तावेजों में संबंधित भूमि का क्षेत्रफल कहीं 5 एकड़, तो कहीं 15 एकड़ दर्शाया गया है। शिकायत का मूल सवाल यही था कि पांच एकड़ भूमि दस एकड़ बढ़कर 15 एकड़ कैसे हो गई और अतिरिक्त भूमि का वैधानिक आधार क्या है।
मामला भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में उठाए जाने के बाद शासन की ओर से उत्तर प्रस्तुत किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि जवाब में भूमि बालको के आधिपत्य में कब आई, इस पर जानकारी दी गई, जबकि शिकायत का केंद्रीय विषय दस्तावेजों में कथित बदलाव, अतिरिक्त दस एकड़ भूमि और रिकॉर्ड की संभावित कूटरचना था।
वृक्षारोपण की भूमि पर राखड़ डैम?
उपलब्ध दस्तावेजों में भूमि पुनरुद्धार और वृक्षारोपण का उल्लेख बताया गया है, जबकि शिकायत में आरोप है कि उसी क्षेत्र में राखड़ डैम बना दिया गया। इससे सवाल उठता है कि क्या वृक्षारोपण की अनुमति को राखड़ भंडारण का आधार बनाया गया और क्या इसके लिए पृथक पर्यावरणीय एवं राजस्व अनुमति ली गई थी?
जांच हुई तो शिकायतकर्ता अंधेरे में क्यों?
अब्दुल सुल्तान का कहना है कि उन्हें आज तक यह नहीं बताया गया:
जांच किस अधिकारी ने की;
मूल दस्तावेजों का मिलान हुआ या नहीं;
बयान क्यों नहीं लिया गया;
जांच रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि जांच नहीं हुई, तो विधानसभा के लिए जिला प्रशासन ने रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की?
अब उच्च स्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:
5 और 15 एकड़ वाले दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच हो;
खसरा 543/1 का डीजीपीएस और ड्रोन सीमांकन कराया जाए;
अतिरिक्त दस एकड़ भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए;
राखड़ डैम की अनुमति और वास्तविक क्षेत्रफल की जांच हो;
विधानसभा को भेजी गई प्रशासनिक रिपोर्ट का पुनः परीक्षण हो;
दोष सिद्ध होने पर अधिकारियों और संबंधित पक्षों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
सवाल सीधा है
भूमि बालको को कब मिली—यह विवाद नहीं।
विवाद यह है कि 5 एकड़, 15 एकड़ कैसे बनी?
जांच हुई तो रिपोर्ट कहां है?
और जांच नहीं हुई तो विधानसभा को जवाब किस आधार पर दिया गया?
अब नजरें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और राज्य सरकार पर हैं कि वे दस्तावेजों का सच सार्वजनिक करते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
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