कोरबा नगर निगम में अधिकारियों का नया कारनामा। GeM की फाइल में ‘कोरबा’नगर निगम के नाम पर ‘कटघोरा’ की निविदा! ₹102.43 लाख के श्रमिक ठेके में दस्तावेजों का ऐसा घालमेल—लापरवाही या चहेते ठेकेदार के लिए बिछाई गई पात्रता की सुरंग?

Bid नंबर अलग, निकाय अलग, तारीख अलग, EMD अलग और श्रमिक संख्या भी अलग—नगर निगम कोरबा बताए, निविदा चला रहा है या बोलीदाताओं को भ्रम के दलदल में धकेल रहा है?
लंबे समय से लग रहे GeM में ‘खेल’ के आरोपों को. दस्तावेजों ने दी नई धार; राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा की निविदाओं में पारदर्शिता के दावों पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। जलप्रदाय कार्य के लिए श्रमिक उपलब्ध कराने से संबंधित लगभग ₹102.43 लाख की निविदा के 21 पृष्ठों की पड़ताल में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्हें केवल साधारण टंकण त्रुटि कहकर फाइलों के नीचे दबाना आसान नहीं होगा।
दस्तावेजों के शुरुआती पृष्ठ नगर पालिक निगम कोरबा के हैं, लेकिन आगे उन्हीं कागजात में नगर पालिका कटघोरा की पूरी तरह अलग GeM निविदा के 11 पृष्ठ जुड़े दिखाई देते हैं। संस्था अलग, Bid नंबर अलग, जारी होने की तारीख अलग, EMD अलग, अधिकारी अलग, श्रमिक संख्या अलग और निविदा बंद होने की तारीख भी अलग!
सवाल सीधा है—क्या नगर निगम कोरबा में निविदाएं पढ़े और जांचे बिना जारी हो रही हैं, या जान-बूझकर शर्तों का ऐसा जाल बुना जा रहा है
जिसमें सामान्य बोलीदाता उलझ जाए और रास्ता केवल किसी ‘पहले से तैयार’ एजेंसी के लिए खुला रहे?
कोरबा की फाइल में कटघोरा की Bid कैसे घुसी?
नगर पालिक निगम कोरबा के आमंत्रण पत्र में Bid संख्या GEM/2026/B/8068462, जारी होने की तारीख 23 सितंबर 2026, अनुमानित राशि ₹102.43 लाख और EMD ₹1 लाख दर्ज है। इसके विपरीत संलग्न GeM दस्तावेज में Bid संख्या GEM/2026/B/7992434, दिनांक 3 सितंबर 2026, कार्यालय का नाम नगर पालिका कटघोरा और EMD ₹1,21,635 लिखी हुई है। कोरबा की Bid जमा करने की तारीख 15 अक्टूबर 2026 बताई गई है, जबकि संलग्न कटघोरा की Bid 14 सितंबर 2026 को बंद और 15 सितंबर 2026 को खुलने वाली थी।
यानी नगर निगम कोरबा का निविदा आमंत्रण जारी होने से पहले ही संलग्न कटघोरा की Bid समाप्त हो चुकी थी!
क्या यह महज कागजी भूल है?
यदि हां, तो लाखों-करोड़ों की निविदाओं के दस्तावेज तैयार करने और अनुमोदित करने वाले अधिकारी किस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं?
और यदि यह भूल नहीं है, तो क्या अलग-अलग शर्तों और दस्तावेजों का घालमेल कर तकनीकी पात्रता को मनमाफिक ढंग से इस्तेमाल करने की जमीन तैयार की गई?
निकाय कोरबा, लाभार्थी अधिकारी कटघोरा का!
संलग्न GeM दस्तावेज में Beneficiary/Reporting Officer के रूप में अनिल कुमार राम, सब इंजीनियर, नगर पालिका कटघोरा तथा पता नगर पालिका परिषद कटघोरा, 495445 दर्ज है।
जब निविदा नगर पालिक निगम कोरबा के जलप्रदाय कार्य के लिए बताई जा रही है, तब कटघोरा के अधिकारी और कटघोरा का पता इस फाइल में किसने और किस आधार पर जोड़ा?
दस्तावेज किस शाखा ने तैयार किया?
किस अधिकारी ने जांचा?
किसने अनुमोदित किया?
किसकी डिजिटल स्वीकृति के बाद इसे जारी किया गया?
इन प्रश्नों का उत्तर अब नगर निगम कोरबा को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।
₹102.43 लाख का एक प्रतिशत आखिर ₹1 लाख कैसे?
कोरबा की निविदा में अनुमानित लागत ₹102.43 लाख है और अमानत राशि को वार्षिक लागत का एक प्रतिशत बताते हुए ₹1 लाख निर्धारित किया गया है। जबकि ₹102.43 लाख का एक प्रतिशत ₹1,02,430 होता है। ₹2,430 की यह कमी अपने आप में बहुत बड़ी राशि नहीं हो सकती, लेकिन निविदा में प्रतिशत आधारित EMD को बिना गणना-पत्र और सक्षम स्वीकृति के गोल करके लिखना प्रशासनिक गंभीरता पर प्रश्न खड़ा करता है।
वहीं संलग्न कटघोरा दस्तावेज में EMD ₹1,21,635 है। बोलीदाता आखिर किस राशि और किस शर्त को सही माने?
टर्नओवर की शर्त भी दो मुंह वाली!
एक पृष्ठ पर फर्म का तीन वर्षों का वार्षिक टर्नओवर ₹1 करोड़ होना आवश्यक बताया गया है। दूसरे पृष्ठ पर लिखा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में से किसी एक वर्ष में संबंधित क्षेत्र का ₹1 करोड़ टर्नओवर पर्याप्त होगा।
दोनों शर्तों का अर्थ एक नहीं है।
– क्या प्रत्येक वर्ष ₹1 करोड़ का टर्नओवर चाहिए?
– क्या तीन वर्षों का औसत ₹1 करोड़ चाहिए?
– या किसी एक वर्ष में ₹1 करोड़ पर्याप्त है?
– “संबंधित क्षेत्र” का अर्थ केवल श्रमिक आपूर्ति है या कोई भी सेवा?
यह अस्पष्टता सामान्य एजेंसियों के लिए फंदा और पसंदीदा एजेंसी के लिए दरवाजा बन सकती है। तकनीकी मूल्यांकन में जिस शर्त को चाहें लागू करें और जिसको चाहें नजरअंदाज—क्या यही इस दिग्भ्रमित भाषा का उद्देश्य है? इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है। आयकर और GST के वर्ष भी अलग-अलग!
एक स्थान पर वित्तीय वर्ष:
– 2023-24,
– 2024-25,
– 2025-26
के दस्तावेज मांगे गए हैं।
दूसरे स्थान पर:
– 2022-23,
– 2023-24,
– 2024-25
के आयकर एवं GST रिटर्न अनिवार्य बताए गए हैं।
एक ही निविदा में दो अलग-अलग तीन-वर्षीय अवधियां क्यों?
क्या दस्तावेज अलग-अलग पुरानी निविदाओं से उठाकर बिना जांचे जोड़ दिए गए?
या पात्रता जांच के समय मनपसंद वर्ष चुनने की गुंजाइश जान-बूझकर छोड़ी गई?
‘पिछले पांच वर्ष’ लिखकर अवधि केवल साढ़े तीन वर्ष की!अनुभव शर्त में पिछले पांच वित्तीय वर्षों के भीतर समान कार्य का अनुभव मांगा गया है, लेकिन गणना की अवधि 31 मार्च 2023 से Bid Submission Date के एक माह पूर्व तक लिखी गई है। सितंबर-अक्टूबर 2026 तक यह अवधि लगभग साढ़े तीन वर्ष बनती है—पांच वर्ष नहीं।
नगर निगम को स्पष्ट करना होगा कि “पांच वर्ष” सही है या 31 मार्च 2023 की तारीख?
ऐसी विरोधाभासी शर्तें प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए रखी गई हैं या चुनिंदा एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार पात्रता की खिड़की बनाने के लिए?
अनुबंध विस्तार में भी दो नियम—चार माह या 25 प्रतिशत?
एक शर्त अनुबंध को आवश्यकता अनुसार चार माह तक बढ़ाने की अनुमति देती है। दूसरी शर्त अवधि अथवा मात्रा को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात करती है। एक वर्ष का 25 प्रतिशत केवल तीन माह होता है। तो वास्तविक सीमा तीन माह है या चार माह? यह अंतर बाद में अतिरिक्त कार्यादेश और भुगतान का रास्ता खोल सकता है। क्या विस्तार की अस्पष्ट शर्त भविष्य में बिना नई निविदा के काम बढ़ाने की तैयारी है?
GeM में MSE को छूट, निगम की शर्तों में कठोर दीवार! संलग्न GeM दस्तावेज में MSE और स्टार्टअप को अनुभव तथा टर्नओवर में छूट, पात्र सेवा प्रदाताओं को EMD छूट और Surety Bond स्वीकार करने जैसे प्रावधान दिखाई देते हैं। दूसरी तरफ कोरबा की शर्तों में ₹1 करोड़ टर्नओवर, भारी अनुभव और मूल FDR/TDR की ऑफलाइन अनिवार्यता है।
दो विरोधी दस्तावेजों के बीच बोलीदाता किस नियम का पालन करे?
यदि निगम की कठोर शर्त मान्य है तो GeM की छूट का क्या होगा?
यदि GeM का मूल प्रावधान लागू है तो निगम की अतिरिक्त शर्त किस अधिकार से जोड़ी गई?
86 श्रमिक कटघोरा के, निविदा बताई जा रही कोरबा जलप्रदाय की!
कटघोरा के संलग्न GeM दस्तावेज में:
– 2 उच्च-कुशल,
– 5 कुशल,
– 79 अकुशल,
– कुल 86 मानव संसाधन दिखाए गए हैं।
लेकिन कोरबा के आमंत्रण में जलप्रदाय कार्य के लिए अकुशल श्रमिक उपलब्ध कराने की बात है। कोरबा के लिए कितने श्रमिक चाहिए, कहां तैनात होंगे, कितनी शिफ्ट होंगी, कितने मानव-दिवस की गणना हुई और ₹102.43 लाख का अनुमान कैसे बना—इन मूल प्रश्नों का स्पष्ट लागत-पत्र साझा दस्तावेजों में दिखाई नहीं देता।
यदि श्रमिक संख्या और लागत गणना सार्वजनिक नहीं होगी तो निविदा की अनुमानित राशि का सत्यापन कैसे होगा?
कटघोरा की Bid में भी ‘अकुशल’ का पदनाम Highly Skilled! संलग्न दस्तावेज में अकुशल श्रमिक की श्रेणी के नीचे भी Designation “HIGHLY SKILLED” लिखा हुआ दिखाई देता है। Skilled श्रेणी में भी Highly Skilled पदनाम अंकित है। यह महज शब्दों का खेल नहीं है। श्रमिक की श्रेणी के अनुसार न्यूनतम मजदूरी, EPF, ESIC और कुल भुगतान बदलता है। गलत श्रेणी अथवा पदनाम से लागत और भुगतान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
GST को श्रमिक कटौती की भाषा में क्यों रखा गया?
परिशिष्ट में EPF, ESIC और GST को एक ही वैधानिक कटौती तालिका में रखा गया है। GST किसी श्रमिक के वेतन से काटी जाने वाली राशि नहीं है। कर्मचारी अंशदान, नियोक्ता अंशदान, सेवा शुल्क और GST अलग-अलग दिखने चाहिए। अस्पष्ट वित्तीय प्रारूप बाद में श्रमिकों के भुगतान, एजेंसी के सेवा शुल्क और निगम के बिल में भ्रम अथवा अनावश्यक हेरफेर की गुंजाइश पैदा कर सकता है।
क्या GeM में ‘खेल’ के आरोप यूं ही लग रहे हैं?
नगर निगम कोरबा में GeM के माध्यम से जारी निविदाओं को लेकर लंबे समय से शर्तों में बदलाव, असंगत पात्रता, जल्दबाजी, संदिग्ध दस्तावेज और चुनिंदा एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के आरोप उठते रहे हैं। वर्तमान दस्तावेज उन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं करते, लेकिन स्वतंत्र जांच की आवश्यकता को अत्यंत मजबूत अवश्य बनाते हैं।
सवाल केवल इतना नहीं कि गलत Bid Document कैसे जुड़ गया। सवाल यह भी है कि:
– इसे तैयार किसने किया?
– सत्यापन किसने किया?
– अनुमोदन किस अधिकारी ने दिया?
– गलत दस्तावेज के बावजूद Bid जारी कैसे हुई?
– क्या संभावित बोलीदाताओं को समान और स्पष्ट जानकारी मिली?
– क्या किसी एजेंसी को पहले से सही शर्तों की जानकारी थी?
– क्या भ्रमित दस्तावेजों का लाभ तकनीकी मूल्यांकन में उठाया जाना था?
यदि अधिकारी इसे मात्र “क्लेरिकल एरर” बताएं, तो उन्हें यह भी बताना होगा कि करोड़ रुपये से अधिक की निविदा में संस्था, Bid नंबर, तारीख, EMD, अधिकारी और कार्यक्षेत्र तक बदल जाना किस श्रेणी की लापरवाही है। बिना अंदरूनी स्वीकृति के ऐसा घालमेल संभव कैसे? निविदा दस्तावेज किसी अदृश्य हाथ से अपने आप तैयार और अपलोड नहीं होते। फाइल बनाने, शर्त तय करने, तकनीकी परीक्षण, वित्तीय स्वीकृति और पोर्टल पर प्रकाशन तक अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित होती है।
इसलिए दस्तावेजी विसंगतियों की जवाबदेही तय किए बिना केवल सुधार-पत्र जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों की भूमिका, डिजिटल लॉग और नोटशीट की जांच आवश्यक है। जांच से पहले किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती, लेकिन यह कहना भी कठिन है कि इतनी परतों से गुजरने के बाद यह सब किसी जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी के बिना हुआ होगा।
राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग की आंखों पर पट्टी क्यों?
जब नगर निगमों की निविदाओं में संस्था तक बदल जाए, Bid नंबर दूसरी निकल आए और पात्रता शर्तें एक-दूसरे का गला काटती दिखाई दें,
तब नगरीय प्रशासन विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है?
क्या विभाग केवल शिकायत मिलने का इंतजार करेगा?
क्या राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेगी?
क्या GeM पर प्रकाशित दस्तावेजों की तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराई जाएगी?
या कागजी जांच के नाम पर फिर वही फाइल उन्हीं अधिकारियों के पास भेज दी जाएगी जिनकी भूमिका सवालों के घेरे में है?
तत्काल स्वतंत्र जांच और निविदा स्थगित करने की जरूरत
निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन और नगरीय प्रशासन विभाग को तत्काल:
1. Bid संख्या GEM/2026/B/8068462 की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित करनी चाहिए।
2. मूल GeM-generated PDF और Modification History निकाली जानी चाहिए।
3. दस्तावेज अपलोड करने वाले User ID एवं Digital Audit Log की जांच होनी चाहिए।
4. ₹102.43 लाख की स्वीकृत Cost Sheet सार्वजनिक की जानी चाहिए।
5. EMD ₹1 लाख निर्धारित करने की गणना और अनुमोदन जांचा जाना चाहिए।
6. अनुभव तथा टर्नओवर शर्तों की स्वीकृत नोटशीट जब्त की जानी चाहिए।
7. कटघोरा की Bid संख्या 7992434 के पृष्ठ जोड़ने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
8. सभी सहभागी एजेंसियों, तकनीकी पात्रता और अपात्रता के कारण सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
9. जांच पूरी होने तक विवादित निविदा की कार्यवाही स्थगित की जानी चाहिए।
10. मिलीभगत अथवा अनुचित लाभ के प्रमाण मिलने पर विभागीय कार्रवाई के साथ आर्थिक अपराध जांच की अनुशंसा की जानी चाहिए।
कागज चीख रहे हैं—अब सरकार कब सुनेगी?
नगर निगम कोरबा को यह समझना होगा कि सार्वजनिक धन की निविदा किसी अधिकारी की निजी फाइल नहीं है। उसमें लिखा प्रत्येक शब्द, प्रत्येक तारीख और प्रत्येक राशि जनता के प्रति जवाबदेही से जुड़ी है। कोरबा के नाम पर कटघोरा की Bid, ₹102.43 लाख की लागत पर अस्पष्ट गणना और परस्पर विरोधी पात्रता—यह केवल अव्यवस्था की दुर्गंध नहीं, बल्कि जांच की घंटी है।
यदि शासन अब भी मौन रहा तो यह सवाल और गहरा होगा
—क्या अधिकारी इतने बेलगाम हो चुके हैं कि GeM की फाइलों में निकाय, नियम और संख्या बदलने के बाद भी किसी कार्रवाई का भय नहीं?
या निगरानी की कुर्सियों पर बैठे लोग सचमुच आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं?
नगर निगम कोरबा और नगरीय प्रशासन विभाग से इन दस्तावेजी सवालों पर आधिकारिक पक्ष अपेक्षित है। उनका उत्तर प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
संपादक – अब्दुल सुल्तान
Live Cricket Info