क्या छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री का आदेश भी बेअसर हो गया?

स्थानीय युवाओं के रोजगार पर उठे सबसे बड़े सवाल—
कोरबा के लोकप्रिय विधायक व मंत्री का पत्र, जिला प्रशासन की चुप्पी और RTI में ‘रिकॉर्ड नहीं’ का जवाब
BALCO से 7 दिन में मांगी गई थी स्थानीय और बाहरी कर्मचारियों की जानकारी… लेकिन महीनों बाद सरकारी विभाग बोला—’रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’
कोरबा/रायपुर। यह केवल एक RTI का मामला नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के लाखों युवाओं के रोजगार, सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक अभिलेखों की विश्वसनीयता से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रश्न है।
तत्कालीन उद्योग एवं श्रम मंत्री तथा कोरबा के लोकप्रिय विधायक लखन लाल देवांगन ने 12 मई 2024 को BALCO प्रबंधन को पत्र क्रमांक 510 जारी कर स्थानीय एवं बाहरी कर्मचारियों का पूरा विवरण सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसी विषय में पत्र क्रमांक 511 के माध्यम से जिला कलेक्टर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
लेकिन जब इसी विषय पर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई, तब श्रम विभाग ने लिखित उत्तर दिया कि संबंधित शाखा में ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
यहीं से पूरा मामला सामान्य पत्राचार से निकलकर प्रशासनिक जवाबदेही के केंद्र में पहुंच जाता है।
आखिर मंत्री का आदेश गया कहां?
यदि मंत्री का पत्र जारी हुआ था—तो विभागीय रिकॉर्ड में क्यों नहीं मिला?
यदि रिकॉर्ड नहीं मिला— तो उसका उत्तरदायित्व किसका है?
यदि BALCO ने जवाब भेजा— तो वह किस फाइल में है?
यदि जवाब नहीं भेजा— तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई?
यदि जिला प्रशासन को प्रति भेजी गई— तो उसने क्या कदम उठाए?
इन प्रश्नों का उत्तर आज तक सार्वजनिक नहीं है।
सवाल केवल एक कंपनी का नहीं, पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का यह मामला केवल किसी एक उद्योग या कंपनी तक सीमित नहीं है।
यह उस व्यवस्था की परीक्षा है जिसमें सरकार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की बात करती है, मंत्री निर्देश जारी करते हैं, लेकिन बाद में उसी आदेश का रिकॉर्ड विभाग में उपलब्ध नहीं मिलता।
यदि यह स्थिति सही है, तो यह प्रशासनिक अभिलेख प्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
कोरबा के युवाओं का सबसे बड़ा सवाल
कोरबा वर्षों से खनिज संपदा और बड़े उद्योगों का केंद्र रहा है।
फिर भी स्थानीय युवाओं में लंबे समय से यह भावना व्यक्त होती रही है कि उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे।
इसी पृष्ठभूमि में मंत्री द्वारा स्थानीय और बाहरी कर्मचारियों का विवरण मांगा जाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल थी।
ऐसी स्थिति में यदि उस पत्र की कार्रवाई का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो यह स्वाभाविक रूप से जनहित का विषय बन जाता है।
अब सरकार को स्पष्ट करना होगा
राज्य सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं—
मंत्री के आदेश पर वास्तविक कार्रवाई क्या हुई?
BALCO से कोई उत्तर प्राप्त हुआ था या नहीं?
यदि हुआ था, तो वह रिकॉर्ड कहां है?
यदि नहीं हुआ, तो आगे क्या कदम उठाए गए?
जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या कार्रवाई की?
स्थानीय युवाओं के रोजगार संबंधी निर्देशों की वर्तमान स्थिति क्या है?
उच्चस्तरीय जांच क्यों आवश्यक?
यदि सरकारी रिकॉर्ड वास्तव में उपलब्ध नहीं है, तो यह प्रशासनिक जांच का विषय हो सकता है।
यदि रिकॉर्ड मौजूद था लेकिन RTI में उपलब्ध नहीं बताया गया, तो सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी इसकी जांच आवश्यक हो सकती है।
दोनों ही परिस्थितियों में पारदर्शी जांच जनहित में महत्वपूर्ण होगी।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की मांग
उद्योग मंत्री के पत्र क्रमांक 510 एवं 511 की संपूर्ण कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
BALCO द्वारा भेजे गए उत्तर (यदि कोई हो) सार्वजनिक किए जाएं।
जिला प्रशासन की कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पत्र प्राप्ति, डिस्पैच और रिकॉर्ड प्रबंधन की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
स्थानीय एवं बाहरी कर्मचारियों के अद्यतन आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की नीति के पालन की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल
यदि छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री के निर्देशों का अनुपालन हुआ, तो उसका रिकॉर्ड जनता के सामने क्यों नहीं है?
और यदि अनुपालन नहीं हुआ, तो स्थानीय युवाओं के रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?
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