कोर्ट बोला कार्रवाई करो… जमीन पर बालको बोला काम चालू रखो ? WPC No. 1091/2026 : दो नोटिस, हाईकोर्ट का आदेश… फिर भी नहीं रुकी बाउंड्रीवाल, सीईओ राजेश कुमार की कार्यशैली पर बड़े सवाल

कोरबा। एक तरफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट कार्रवाई के निर्देश दे रहा है, दूसरी तरफ कोरबा में बालको की दीवार हर दिन ऊंची होती जा रही है। सवाल सीधा है—आखिर जमीन पर आदेश कौन चला रहा है, प्रशासन या कंपनी ?
बेलाकछार नदी किनारे और नेहरू नगर क्षेत्र में चल रहे इस बाउंड्रीवाल निर्माण पर नगर पालिक निगम ने 02 फरवरी और 03 फरवरी 2026 को दो नोटिस जारी किए। स्पष्ट कहा गया कि बिना अनुमति निर्माण हो रहा है और इसे तत्काल रोका जाए। धारा 293, 302 और 307 का हवाला देते हुए कार्रवाई और खर्च वसूली की चेतावनी भी दी गई।
लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुका। मौके पर मजदूर काम करते दिखे, मशीनें चलती रहीं और बाउंड्रीवाल लगातार आगे बढ़ती रही।
मामला जब बढ़ा तो यह सीधे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर पहुंचा। WPC No. 1091/2026 में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नोटिस के बावजूद बालको निर्माण कार्य जारी रखे हुए है और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। 0
सुनवाई के बाद माननीय हाईकोर्ट ने कलेक्टर और नगर पालिक निगम को निर्देश दिया कि नोटिस के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और 30 दिन के भीतर उचित कदम उठाएं। 1
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब कोर्ट का स्पष्ट निर्देश आ चुका है, तो मौके पर निर्माण कार्य अब भी कैसे जारी है ?
सीईओ और प्रबंधन पर सीधा सवाल
स्थानीय स्तर पर सीईओ राजेश कुमार और प्रशासनिक प्रमुख कैप्टन धनंजय मिश्रा की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज है। आरोप है कि पहले निर्माण शुरू किया गया और बाद में अनुमति की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया।
क्या यह केवल लापरवाही है या फिर नियमों को खुली चुनौती ?
ठेकेदार हेमस कॉर्पोरेशन भी सवालों में
यह निर्माण कार्य हेमस कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया जा रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ठेकेदार को जमीन की कानूनी स्थिति, नोटिस और कोर्ट केस की जानकारी नहीं थी ? या सब कुछ जानते हुए भी काम जारी रखा गया ?
सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप
हाईकोर्ट में दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह बाउंड्रीवाल सरकारी आबादी भूमि पर बनाई जा रही है। 2
यदि यह तथ्य सही साबित होता है, तो मामला केवल अनुमति का नहीं बल्कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जैसा गंभीर रूप ले सकता है।
नोटिस, कोर्ट… फिर भी असर शून्य ?
निगम ने नोटिस दिया।
कोर्ट ने कार्रवाई का आदेश दिया।
लेकिन जमीन पर काम जारी है।
अब सवाल उठ रहा है—क्या बालको प्रबंधन खुद को कानून और कोर्ट दोनों से ऊपर मान रहा है ?
ग्रामीणों पर सीधा असर
इस निर्माण से दोन्द्रो बेला के ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जो रास्ता वर्षों से उपयोग में था, वह अब बाउंड्रीवाल के कारण बाधित हो गया है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर घूमकर शहर आना पड़ रहा है।
अब क्या करेगा प्रशासन ?
हाईकोर्ट ने 30 दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन वास्तव में सख्त कदम उठाता है या मामला फिर कागजों तक सीमित रह जाता है।
फिलहाल तस्वीर साफ है—नोटिस कागज में, आदेश फाइल में और दीवार जमीन पर खड़ी हो रही है।
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