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7,000+ मेगावाट के बोझ तले कोरबा… अब Adani का 1600 MW दांव! केंद्र की निगरानी, बढ़ता विरोध और आज की सुनवाई… क्या अटक जाएगा Adani का 1600 MW प्रोजेक्ट?

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कोरबा | Gram Yatra Chhattisgarh कोरबा पहले ही 7,000 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता के औद्योगिक दबाव में है। राज्य की लगभग 1840 मेगावाट यूनिट, BALCO की 1740 मेगावाट क्षमता, NTPC की 2600 मेगावाट इकाई और स्वयं Adani की लगभग 1800 मेगावाट उत्पादन क्षमता पहले से संचालित है। ऐसे में अब Adani Power Limited की सहायक कंपनी Korba Power Limited द्वारा प्रस्तावित 1600 मेगावाट Phase-III विस्तार ने पूरे क्षेत्र में नए विवाद को जन्म दे दिया है।

आज दोपहर 12 बजे पर्यावरणीय जनसुनवाई, नजरें पूरे प्रदेश की

आज दोपहर 12 बजे आयोजित होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई को निर्णायक माना जा रहा है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कोरबा की हवा, जल और स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव को लेकर जनता और कंपनी के दावों के बीच सीधा टकराव है।

केंद्र सरकार पहले ही मांग चुकी है compliance रिपोर्ट

मामला तब और गंभीर हो गया जब पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार ने परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) शर्तों की बिंदुवार अनुपालन रिपोर्ट मांगी। इससे यह स्पष्ट है कि विस्तार परियोजना अब राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में है।

रोजगार के दावे बनाम प्रदूषण की आशंका

कंपनी रोजगार और निवेश के बड़े दावे कर रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल राख (फ्लाई ऐश) प्रबंधन, वायु प्रदूषण और संचयी पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर उठ रहा है। यदि मौजूदा संयंत्र ही शत-प्रतिशत राख उपयोग सुनिश्चित नहीं कर पा रहे, तो अतिरिक्त 1600 मेगावाट के बाद स्थिति क्या होगी?

क्या दिल्ली से भी बदतर होगी कोरबा की हवा?

स्थानीय संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कोरबा पहले से प्रदूषण के दबाव में है। 10 किलोमीटर के दायरे में भारी उद्योगों और कोयला आधारित संयंत्रों की मौजूदगी ने पर्यावरण संतुलन को प्रभावित किया है। ऐसे में 1600 मेगावाट का नया संयंत्र शहर की वायु गुणवत्ता को और चुनौती दे सकता है।

जनसुनवाई बनेगी टर्निंग पॉइंट?

आज की जनसुनवाई तय करेगी कि Adani Power के विस्तार को हरी झंडी मिलती है या बढ़ते विरोध और केंद्र की निगरानी के बीच परियोजना अटक जाती है। प्रभावित ग्रामीणों और संगठनों के लिए यह अपनी बात आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराने का महत्वपूर्ण मंच है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी पर्यावरण और रोजगार से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देती है, या फिर 1600 मेगावाट का यह दांव कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों में फंस जाता है।  

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