छत्तीसगढ़ की सरकार ने कटघोरा के अटल प्रतिमा विवाद से क्या सीखा? अब रायपुर में सरदार पटेल के ₹42.38 लाख के टेंडर पर गंभीर सवाल

कथित कूटरचित सहमति-पत्र की शिकायत, पात्रता पर आपत्ति और तकनीकी अंकांकन में विसंगतियां—क्या समय रहते जांच होगी या विवाद बढ़ने का इंतजार करेगा निगम?
रायपुर/कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क महापुरुषों की प्रतिमाओं के निर्माण में गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठने के बाद भी क्या प्रशासनिक व्यवस्था ने पर्याप्त सबक लिया है? कोरबा जिले के कटघोरा में पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से जुड़े विवाद के बाद अब राजधानी रायपुर में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण की ₹42.38 लाख की निविदा के दस्तावेजों पर गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं। उपलब्ध शिकायतों में एक पात्र घोषित निविदाकार के सहमति/MoU संबंधी दस्तावेज को कथित कूटरचित बताया गया है। संबंधित मूर्तिकला संस्था के नाम से उपलब्ध पत्र में भी अनधिकृत हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल पर आपत्ति है। दूसरी ओर, निविदा की तकनीकी अंक प्रणाली में ऐसे अंतर दिखाई देते हैं जिनका स्पष्ट स्पष्टीकरण आवश्यक है। सवाल यह है कि कहीं सत्यापन और निगरानी की कोई बड़ी चूक फिर तो नहीं हो रही? इसका उत्तर आरोपों से नहीं, मूल दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच से मिलेगा।
कटघोरा में विवाद के बाद हुई थी निलंबन की कार्रवाई
कटघोरा का मामला जुलाई–अगस्त 2026 में सुर्खियों में आया था। 31 जुलाई की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अटल परिसर की प्रतिमा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने और जांच प्रतिवेदन के आधार पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को निलंबित किया गया था। रिपोर्टों में प्राक्कलन के विपरीत निर्माण, परत उखड़ने और प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने का उल्लेख था। इस विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन और उच्चस्तरीय जांच की मांग भी हुई थी। कटघोरा और रायपुर अलग प्रकरण हैं। उपलब्ध सामग्री दोनों के ठेकेदारों या अधिकारियों के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं करती। लेकिन कटघोरा का अनुभव प्रतिमा संबंधी कार्यों में दस्तावेज सत्यापन, सामग्री परीक्षण और स्वतंत्र निरीक्षण की जरूरत जरूर रेखांकित करता है।
रायपुर में क्या है मामला?
नगर पालिक निगम रायपुर की उपलब्ध निविदा सूचना के अनुसार, NIT क्रमांक 04/RMC/2026, दिनांक 11 सितंबर 2026, सिस्टम टेंडर क्रमांक 199363 का कार्य “Sardar Vallabh Bhai Patel Ji Beautification Work” है। अनुमानित लागत ₹42.38 लाख, अमानत राशि ₹32,000 और कार्यपूर्णता अवधि दो माह दी गई है। तकनीकी शर्तों में न्यूनतम 10 फीट ऊंची ब्रॉन्ज प्रतिमा और धातु की सतह की न्यूनतम 6 मिमी मोटाई निर्धारित है। बोली जमा करने की अंतिम तारीख 5 अक्टूबर, भौतिक दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और निर्धारित बोली खोलने की तारीख 7 अक्टूबर 2026 दर्ज है।
दो पात्र घोषित, दो की तकनीकी बोली अस्वीकृत
उपलब्ध मूल्यांकन सारणी में पूरणमल गुप्ता और राधे आर्ट गैलरी को पात्र बताया गया है। मिस्टर एंड मिसेस कुर्रे आर्ट तथा परवेज आर्ट भिलाई को पात्रता मानदंड पूरे नहीं करने के आधार पर तकनीकी रूप से अस्वीकृत किया गया है। विस्टा बिल्डकॉन के सामने बोली जमा नहीं होने की स्थिति दर्ज है। यह रिकॉर्ड तकनीकी पात्रता की स्थिति बताता है। इससे अंतिम ठेका, स्वीकृत दर अथवा कार्यादेश जारी होने की पुष्टि नहीं होती। लेकिन जब पात्रता पर ही दस्तावेजी आपत्ति उठ गई हो, तो उसका स्पष्ट निस्तारण निविदा की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
पूरणमल गुप्ता के दस्तावेजों पर दो शिकायतें
26 अक्टूबर 2026 के परवेज आर्ट भिलाई और मिस्टर एंड मिसेस कुर्रे आर्ट के उपलब्ध शिकायत-पत्रों में आरोप है कि पूरणमल गुप्ता ने आवश्यक हस्तशिल्प पंजीयन प्रमाणपत्र तथा सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की धातु परीक्षण रिपोर्ट जमा नहीं की। प्रस्तुत MoU को भी कथित कूटरचित बताया गया है। शिकायतकर्ताओं ने प्रभात मूर्ति कला केन्द्र, ग्वालियर के पत्र का उल्लेख करते हुए संबंधित पात्रता निरस्त करने और अपनी निविदाओं का पुनः अवलोकन करने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए निविदा में वास्तव में अपलोड हुए दस्तावेज, उनका समय, मूल जारीकर्ता की पुष्टि और मूल्यांकन समिति की जांच सूची सामने आनी चाहिए।
जिस संस्था के नाम का दस्तावेज, उसी के नाम से आपत्ति
प्रभात मूर्ति कला केन्द्र के लेटरहेड पर उपलब्ध पत्र में स्वयं को संस्था का पार्टनर बताने वाले अनुज राय ने संस्था के नाम, हस्ताक्षर और मुहर के कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज की है। पत्र में ऐसे दस्तावेज को अधिकृत मानने से इनकार करते हुए उसका इस्तेमाल रोकने, वापस लेने, लिखित स्पष्टीकरण देने और मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग है।
हालांकि इस पत्र में भी सत्यापन योग्य अंतर है—पहले पृष्ठ पर “Ref. Date: 01.04.2026”, जबकि अंतिम पृष्ठ पर “Date: 24.10.2026” दिखाई देता है।
इस अंतर, पत्र की प्रामाणिकता और निविदा में प्रस्तुत कथित MoU से उसके वास्तविक संबंध की पुष्टि आवश्यक है। विवादित मूल MoU उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है। इसलिए अभी किसी दस्तावेज को अंतिम रूप से फर्जी घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन लिखित आपत्ति के बाद उसकी प्रामाणिकता जांचना अनिवार्य प्रशासनिक प्राथमिकता होनी चाहिए।
40 अंक की प्रणाली में “30 MARKS” क्यों?
तकनीकी मूल्यांकन पन्नों में कुल अंक 40 और वित्तीय बोली खोलने के लिए न्यूनतम 30 अंक बताए गए हैं। छह मानदंडों के अधिकतम अंकों का योग भी 40 है। इसके बावजूद तालिका के शीर्षक में “TECHNICAL EVALUATION MATRIX–30 MARKS” लिखा है। अनुभव वाले मानदंड का शीर्षक 12 फीट प्रतिमा है, जबकि उसके विवरण में 10 फीट ऊंची धातु प्रतिमाओं का अनुभव लिखा है। स्केल्ड मिनिएचर मॉडल के लिए अधिकतम 20 अंक निर्धारित हैं, लेकिन दिखाई दे रहे उपमानदंडों में 5 और 3 अंक का विवरण है। पूरे 20 अंकों के वितरण का स्पष्ट आधार इन पन्नों में नहीं दिखता।
जिस अंकांकन से किसी की वित्तीय बोली खुलनी है और किसी को बाहर होना है, उसका प्रत्येक मानक स्पष्ट और समान रूप से लागू होना चाहिए। निगम बताए कि अंतिम स्वीकृत अंक प्रणाली कौन-सी थी और किस प्रतिभागी को किस आधार पर कितने अंक मिले।
निविदा बंद होने से पहले भी उठी थी आपत्ति
5 अक्टूबर 2026 के भारत श्रीवास्तव के हस्ताक्षर वाले शिकायत-पत्र में शर्तों को प्रतिस्पर्धा प्रभावित करने वाला बताते हुए दो फीट के स्केल मॉडल और विशेषज्ञ मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। पत्र में राधे आर्ट गैलरी को संभावित लाभ पहुंचने की आशंका भी जताई गई थी। यह शिकायतकर्ता की आशंका है; उपलब्ध रिकॉर्ड अनुचित लाभ पहुंचना सिद्ध नहीं करता। फिर भी निगम से यह पूछा जाना चाहिए कि उस शिकायत पर क्या निर्णय लिया गया और क्या उसका कारणयुक्त उत्तर उपलब्ध कराया गया?
कागज से लेकर तैयार प्रतिमा तक जांच की स्पष्ट व्यवस्था हो
तकनीकी शर्तों में धातु परीक्षण, मोटाई, मॉडल अनुमोदन, परिवहन और सुरक्षित स्थापना का उल्लेख है। भुगतान भी चरणों में प्रस्तावित है—मॉडल अनुमोदन के बाद 35 प्रतिशत, प्रतिमा निर्माण के अनुमोदन एवं स्थल तक परिवहन के बाद 35 प्रतिशत और स्थापना के बाद 30 प्रतिशत। इसलिए प्रत्येक भुगतान से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि निरीक्षण किसने किया, क्या परीक्षण हुआ और स्वीकृति किस रिकॉर्ड के आधार पर दी गई।
कटघोरा जैसे विवाद की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रायपुर में अभी से निम्न रिकॉर्ड स्पष्ट किए जाने चाहिए:
– सभी प्रतिभागियों की मानदंडवार अंकतालिका और अस्वीकृति के विस्तृत कारण।
– विवादित सहमति/MoU का मूल जारीकर्ता से सत्यापन।
– पंजीयन, अनुभव और धातु परीक्षण रिपोर्ट की जांच।
– तकनीकी शर्तों के अंतरों पर जारी संशोधन या स्पष्टीकरण।
– मॉडल अनुमोदन और प्रतिमा की गुणवत्ता जांच करने वाली समिति का विवरण।
– वित्तीय बोली, अंतिम स्वीकृति और कार्यादेश की वर्तमान स्थिति।
महापुरुषों के सम्मान में गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी शामिल है
अटल बिहारी वाजपेयी हों या सरदार वल्लभभाई पटेल—उनकी स्मृति में सार्वजनिक धन से बनने वाले कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर स्पष्ट जवाबदेही जरूरी है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का सवाल है—कटघोरा के अनुभव के बाद रायपुर में सत्यापन कितना मजबूत किया गया? शिकायतें मिलने पर कौन-से दस्तावेज जांचे गए और क्या निष्कर्ष निकला?
समय रहते मूल रिकॉर्ड जांचे जाएं, संबंधित पक्षों के जवाब लिए जाएं और कारणयुक्त निर्णय सामने रखा जाए। शिकायत सही मिले तो कार्रवाई हो; गलत मिले तो उसका तथ्यात्मक आधार स्पष्ट किया जाए। यह रिपोर्ट उपलब्ध रायपुर निविदा दस्तावेजों, मूल्यांकन सारणी, शिकायत-पत्रों और कटघोरा प्रकरण की प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। रायपुर निगम तथा संबंधित निविदाकारों का इन विशिष्ट शिकायतों पर जवाब उपलब्ध सामग्री में नहीं है। रायपुर में कूटरचना, पक्षपात या घटिया प्रतिमा निर्माण का अंतिम निष्कर्ष स्थापित नहीं हुआ है।
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