सड़कें खोद दीं—अब जवाबदेही मत दबाइए! ₹14.34 करोड़ के सीवरेज पर कोरबा निगम से कड़े सवाल

निर्माण से पहले NIT की डिजाइन मंजूरी अनिवार्य—अनुमोदन पत्र कहां है? मई की निविदा में अप्रैल की अंतिम तारीख: करोड़ों के काम के कागज भी ठीक से नहीं जांचे गए?
कोरबा। जनता के लिए गड्ढे, अधिकारियों के लिए फाइलें और मंचों पर विकास के दावे—शिवाजी नगर–एमपी नगर की सीवरेज परियोजना पर उठ रहे सवाल नगर निगम कोरबा से इस व्यवस्था का हिसाब मांग रहे हैं। ₹14.34 करोड़ की बताई जा रही परियोजना में नागरिक परेशानियां गिनाएं और निगम केवल उपलब्धियां सुनाए, तो सवाल और तीखे होंगे।
ग्राम यात्रा को मिली संबंधित मूल निविदा में ऐसी शर्तें हैं, जिनका जवाब भाषण से नहीं, दस्तावेज से देना होगा। निर्माण शुरू करने से पहले NIT से डिजाइन अनुमोदन जरूरी है। निर्माण पद्धति की मंजूरी भी आवश्यक है। निगम बताए—इन शर्तों का पालन हुआ है तो प्रमाण जनता के सामने कब आएगा?
पाइप बिछाने की जल्दी—मंजूरी का कागज दिखाने में देर क्यों हो?
निविदा संख्या 247/Pt.RSS Nagar/2025, दिनांक 19 मई 2025 की शर्त 22 के अनुसार, कार्यादेश के बाद सभी परियोजना संबंधी ड्राइंग और डिजाइन का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी—NIT से अनुमोदन लेना अनिवार्य है। औपचारिक अनुमोदन से पहले काम शुरू नहीं होना चाहिए।
अब निगम आयुक्त और संबंधित अभियंताओं से सीधा सवाल है—
किस NIT ने डिजाइन जांचा?
किस तारीख को स्वीकृति दी?
किस अधिकारी ने उस स्वीकृति के आधार पर निर्माण शुरू कराया?
अनुमोदन की स्थिति अभी प्रमाणित नहीं है। लेकिन दस्तावेज में दर्ज अनिवार्य शर्त के पालन का प्रमाण मांगना जनता का पूरा अधिकार है। करोड़ों की परियोजना में “सब ठीक है” कह देना पर्याप्त नहीं। ठीक है तो कागज दिखाइए, गणना दिखाइए और मौके पर उसका पालन दिखाइए।
मई में निकली निविदा—अप्रैल में दस्तावेज जमा करें! यह कैसी जांच?
मूल निविदा में भौतिक दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख एक स्थान पर 28 अप्रैल 2025 है। जबकि निविदा 19 मई 2025 की है और समयसारणी में अंतिम तारीख 6 जून 2025 लिखी है।
निविदा निकले मई में, कागज जमा हों अप्रैल में—क्या बोलीदाता को समय में पीछे लौटना था?
यह विरोधाभास दस्तावेज में मौजूद है। निगम बताए कि संशोधन जारी हुआ था या नहीं और बोलीदाताओं को सही समयसीमा किस तरह बताई गई। यह त्रुटि घोटाले का प्रमाण नहीं है। मगर सवाल बेहद असहज है—जिन कागजों के आधार पर करोड़ों का काम देना था, उनकी तारीखें जांचने की जिम्मेदारी किसने निभाई?
ठेकेदार पर उंगली उठाकर अधिकारी बच नहीं सकते
निविदा की शर्त 23 में विस्तृत कार्य कार्यक्रम और निर्माण पद्धति को काम शुरू होने से पहले सक्षम अधिकारी से मंजूर कराने की व्यवस्था है। इसलिए निगम की जिम्मेदारी ठेका जारी करके समाप्त नहीं होती। किस तरीके से खुदाई होगी, पाइप कैसे बिछेगी और निर्माण किस क्रम में चलेगा—स्वीकृत योजना और मौके के काम का मिलान अधिकारियों को करना होगा। ठेकेदार काम करता है; अधिकारी काम स्वीकार करते हैं। कमी प्रमाणित हुई तो जवाब दोनों से मांगा जाएगा।
नागरिकों की शिकायतों में धंसती मिट्टी, कीचड़ और बाधित आवागमन का उल्लेख है। निगम सड़क बहाली की अनुबंध शर्त और समयसीमा सार्वजनिक करे। घर तक पहुंचने का रास्ता नागरिकों की रोज की परेशानी बन जाए, तो विकास का बोर्ड उस परेशानी को छोटा नहीं कर देता।
जमीन के नीचे दबने से पहले गुणवत्ता का हिसाब दीजिए
पाइपलाइन की क्षमता और चैंबर की गुणवत्ता पर उठी आपत्तियों का फैसला स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण से होना चाहिए। स्वीकृत BOQ, ड्राइंग और डिजाइन सामने आएं, ताकि निर्माण की वास्तविक तुलना हो सके। निविदा में व्यवस्था चालू करने से पहले प्रभारी अभियंता की मौजूदगी में नेटवर्क परीक्षण और सीवेज बिना रिसाव वेट-वेल तक पहुंचना सुनिश्चित करने की शर्त है। आज जांच में ढिलाई हुई तो कल की खराबी नागरिकों के दरवाजे तक पहुंचेगी। इसलिए गुणवत्ता की परीक्षा निर्माण के दौरान होनी चाहिए—समस्या फैलने के बाद नहीं।
करोड़ों की रकम—अलग आंकड़े, स्पष्ट हिसाब कहां?
संबंधित मूल निविदा में संभावित अनुबंध राशि ₹11.541 करोड़ है। प्रकाशित खबरों में परियोजना के लिए ₹14.34 करोड़ और उद्घाटन रिपोर्टों में लगभग ₹14.40–₹14.42 करोड़ का उल्लेख है। इन राशियों में अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। निगम स्वीकृत लागत, कर, कार्यक्षेत्र और अंतिम स्वीकार की गई राशि का विवरण सामने रखे।
जनता का पैसा है। उसका हिसाब जनता से छिपा रहने का कोई औचित्य नहीं। स्वतंत्र पोर्टल पर Shree Enterprises का नाम न्यूनतम बोलीदाता के रूप में मिला है, लेकिन अंतिम कार्यादेश की पुष्टि बाकी है। निगम वास्तविक ठेका एजेंसी और स्वीकार की गई दर सार्वजनिक करे।
शिकायत का जवाब फाइल में नहीं—मैदान में चाहिए
पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, पार्षद अनुज कुमार जायसवाल ने निर्माण को लेकर शिकायत की है। उस पर क्या जांच हुई? कौन अधिकारी मौके पर गया? क्या निष्कर्ष निकला और सुधार के क्या निर्देश दिए गए? शिकायत को प्राप्त कर लेना कार्रवाई नहीं। कार्रवाई वह है जो नागरिकों को मौके पर दिखाई दे। नगर निगम कार्यादेश, NIT अनुमोदन, स्वीकृत निर्माण पद्धति, परीक्षण रिपोर्ट और भुगतान का विवरण सार्वजनिक करे। कमियां प्रमाणित हों तो सुधार कराया जाए और निगरानी में चूक करने वालों की जवाबदेही भी तय हो। सड़कें खोदने का अधिकार मिला है, सवालों को मिट्टी में दबाने का नहीं। कोरबा निगम अब बताए—करोड़ों की परियोजना में उसकी निगरानी कितनी मजबूत है? जनता को अगला आश्वासन नहीं, जवाब और प्रमाण चाहिए।
दस्तावेजी आधार: संबंधित मूल निविदा की उपलब्ध पांच पृष्ठों की प्रति। अंतिम कार्यादेश, संपूर्ण BOQ, डीपीआर और डिजाइन अनुमोदन की पुष्टि बाकी है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
हमेशा सच के साथ…!
Live Cricket Info

