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सुप्रीम कोर्ट में BALCO को तगड़ा झटका!

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हाईकोर्ट से मिली राहत धड़ाम—₹3.71 करोड़ का Arbitral Award फिर बहाल

 

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अतिरिक्त 1.95 लाख MT बॉक्साइट का काम कराया, दर बाद में तय करने की बात रही—विवाद पहुंचा सर्वोच्च अदालत, BALCO की दलीलें नहीं बचा सकीं हाईकोर्ट का फैसला..

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—Section 37 में साक्ष्यों को दोबारा परखकर अपनी राय थोपना स्वीकार्य नहीं

 

विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

 

कोरबा/नई दिल्ली। देश की दिग्गज एल्युमिनियम कंपनी भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) को करीब ढाई दशक पुराने बॉक्साइट खनन-परिवहन विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है।

जिस Arbitral Award को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द कर BALCO को बड़ी राहत दी थी, वही राहत देश की सर्वोच्च अदालत में टिक नहीं सकी।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई 2023 के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए ₹3,71,80,584 के Arbitral Award को पुनः बहाल कर दिया। और कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

 

मूल Award में Award की तारीख से भुगतान तक statutory interest का भी निर्देश था। यानी ₹3.71 करोड़ को आज की अंतिम देय राशि मानना उचित नहीं होगा; वास्तविक देयता भुगतान/execution की स्थिति और लागू ब्याज पर निर्भर करेगी।

काम BALCO ने लिया… अतिरिक्त काम का भुगतान बना वर्षों की कानूनी लड़ाई!

 

मामले की जड़ में मैनपाट खदान से BALCO के कोरबा Alumina Plant तक बॉक्साइट Mining और Transportation का ठेका था।

11 दिसंबर 1999 को रमेश कुमार जैन के साथ 2,22,000 MT बॉक्साइट के लिए ₹634.20 प्रति MT की दर से समझौता हुआ।

निर्धारित कार्य के बाद BALCO ने ठेकेदार को काम जारी रखने को कहा और अतिरिक्त काम की दर बाद में तय करने की बात सामने आई।  इसके बाद ठेकेदार ने 1,95,000 MT अतिरिक्त बॉक्साइट का काम किया।

लेकिन भुगतान को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि मामला Arbitration से Commercial Court, फिर High Court और अंततः Supreme Court तक जा पहुंचा।

₹2.34 करोड़ का दावा… ब्याज जुड़ा तो Award पहुंचा ₹3.71 करोड़

15 जुलाई 2012 को Sole Arbitrator ने विभिन्न मदों में कुल ₹2,34,57,783 का Award निर्धारित किया।

इसके ऊपर 1 सितंबर 2007 से 15 जुलाई 2012 तक 12 प्रतिशत ब्याज के ₹1,37,22,801 जुड़े और कुल रकम पहुंच गई— ₹3,71,80,584! इसके बाद भुगतान तक statutory interest का निर्देश अलग था।

Commercial Court में चुनौती—BALCO को राहत नहीं। BALCO ने Section 34 के तहत Award को चुनौती दी।

लेकिन Commercial Court ने Arbitrator के निष्कर्षों को मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित reasoned findings माना और 2 जनवरी 2017 को Award में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट में पलटी बाजी… लेकिन सुप्रीम कोर्ट में फिर पलटा फैसला!

 

BALCO ने इसके बाद Section 37 के तहत छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की।

3 मई 2023 को हाईकोर्ट ने BALCO की अपील स्वीकार कर Arbitral Award रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने अतिरिक्त ₹10 प्रति MT निर्धारित किए जाने सहित अन्य निष्कर्षों को लेकर Award में “Patent Illegality” मानी।लेकिन यही निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाया।

सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश—Arbitration में अदालत दोबारा ट्रायल नहीं चला सकती

सुप्रीम कोर्ट ने Arbitration कानून की सीमाओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि Sections 34 और 37 के तहत अदालतें Arbitral Award के खिलाफ सामान्य अपीलीय अदालत की तरह बैठकर evidence का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकतीं।

विशेष रूप से Section 37 में समीक्षा का दायरा सीमित है।

सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण फर्क भी स्पष्ट किया—No Evidence” और “कम/कमजोर Evidence” एक बात नहीं है।

 

यदि Arbitrator के सामने कुछ प्रासंगिक evidence मौजूद है, तो केवल इसलिए Award को patently illegal नहीं कहा जा सकता कि अदालत उस evidence से कोई दूसरा निष्कर्ष निकाल सकती थी।

BALCO का अपना 5 जनवरी 2002 का पत्र बना महत्वपूर्ण कड़ी

फैसले का सबसे धारदार हिस्सा अतिरिक्त 1,95,000 MT बॉक्साइट के काम से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज किया कि अतिरिक्त काम BALCO के कहने पर किया गया और उसकी कीमत बाद में आपसी सहमति से तय की जानी थी। इसके लिए न्यायालय ने BALCO के 5 जनवरी 2002 के पत्र का उल्लेख किया। लेकिन दर तय करने की वह प्रक्रिया बाद में पूरी नहीं हुई।

इसीलिए Arbitrator द्वारा ₹634.20 में ₹10 प्रति MT जोड़कर ₹644.20 प्रति MT के आधार पर reasonable compensation निर्धारित करने को सुप्रीम कोर्ट ने contract को “rewrite” करना नहीं माना।

काम का फायदा लिया तो उचित भुगतान के सवाल से बचना इतना आसान नहीं!

 

सुप्रीम कोर्ट ने Contract Act की Section 70 का उल्लेख करते हुए समझाया कि जहां एक व्यक्ति दूसरे के लिए वैध रूप से ऐसा कार्य करता है जिसे वह मुफ्त में करने का इरादा नहीं रखता और दूसरा उसका लाभ प्राप्त करता है, वहां compensation का दायित्व पैदा हो सकता है।

यानी इस फैसले का संदेश सिर्फ BALCO तक सीमित नहीं—

 

किसी पक्ष से अतिरिक्त काम लेकर केवल इसलिए भुगतान के दायित्व से बचना संभव नहीं कि उस अतिरिक्त काम की कीमत contract में पहले से स्पष्ट नहीं लिखी गई थी—बशर्ते कानूनी आवश्यकताएं और साक्ष्य मौजूद हों।

BALCO की “No Evidence” वाली दलील पर भी सुप्रीम कोर्ट ने देखा रिकॉर्ड

सर्वोच्च न्यायालय ने Arbitral Award का परीक्षण किया और पाया कि Arbitrator के सामने claimant और BALCO के तत्कालीन Assistant General Manager & Engineer-in-Charge A. Hussain की oral evidence, affidavits तथा correspondence letters मौजूद थे।

इतना ही नहीं, Arbitrator ने सारे claims आंख बंद करके स्वीकार नहीं किए।

जहां पर्याप्त आधार नहीं मिला वहां claim घटाया गया और एक claim पूरी तरह अस्वीकार भी किया गया। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने Award को “no evidence” पर आधारित मानने से इनकार किया।

और आखिर में चला सुप्रीम कोर्ट का कानूनी हथौड़ा!

18 दिसंबर 2025।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार की।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का 03 मई 2023 का फैसला रद्द।

और— Commercial Court का फैसला बहाल!

₹3,71,80,584 का Arbitral Award फिर प्रभावी!

 

हाईकोर्ट से मिली राहत सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर नहीं बच सकी।

करीब ढाई दशक पहले शुरू हुआ बॉक्साइट परिवहन का यह विवाद अब BALCO के लिए एक बड़े न्यायिक फैसले के रूप में सामने है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने Arbitration के मामलों में यह भी स्पष्ट कर दिया कि Section 37 की सीमित शक्ति को evidence की दोबारा सुनवाई का रास्ता नहीं बनाया जा सकता।

अब इस प्रकरण में अगला बड़ा दस्तावेजी सवाल भी खड़ा होता है—

 

₹3.71 करोड़ के Award के बाद statutory interest जोड़कर कुल वित्तीय दायित्व कितना बना?

क्या पूरी राशि का भुगतान हो चुका है, या Award की Execution अभी भी शेष है?

इन दोनों सवालों का उत्तर सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय में नहीं दिया गया है। इसकी पुष्टि Execution Court के रिकॉर्ड और BALCO के भुगतान संबंधी दस्तावेजों से ही होगी।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क इस मामले के अगले दस्तावेजी पहलुओं पर भी नजर रखेगा।

 

विशेष खोजी रिपोर्ट
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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