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जब एमएस डॉ. गोपाल कंवर हुए नाराज़, कर दिया ऐसा कांड — ठेकेदार की खुली किस्मत, पहले खुद किया नुकसान फिर सेटिंग कर बनवाया भरपाई का इंतज़ाम !

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कोरबा। कोरबा का स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय सबबद्ध चिकित्सालय इन दिनों अवैध ठेका एक्सटेंशन और बिल हेराफेरी के खेल का अड्डा बना हुआ है। यहां पदस्थ मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. गोपाल कंवर की मनमानी और दबंगई का ऐसा किस्सा सामने आया है, जिसे सुनकर किसी का भी सिर घूम जाए। पहले नाराज़गी में ठेकेदार का लाखों का भुगतान काट दिया और फिर सेटिंग-गेटिंग के बाद वही ठेकेदार पूरे अस्पताल की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर कब्ज़ा जमाए बैठा है।

अवैध एक्सटेंशन का गोरखधंधा

पिछले एपिसोड में हमने बताया था कि कैसे नियम विरुद्ध यहां ठेका एक्सटेंशन का खेल चल रहा, इसी में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सिक्योरिटी और हाउसकीपिंग का ठेका ‘कामथेन सिक्योरिटी सर्विसेस’ को दिया गया था। ठेके की वैध अवधि खत्म होने के बावजूद बिना टेंडर प्रक्रिया के इसे एक साल से ज्यादा समय से अवैध रूप से एक्सटेंशन देकर चलाया जा रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी सेवा ठेके का एक्सटेंशन नियमानुसार सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति से और नियत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, लेकिन यहां बिना अनुमति, बिना नोटशीट सिर्फ एमएस के मौखिक आदेश पर लाखों के बिल काटे और पास किए जा रहे हैं।

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कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ठेका घोटाला : डॉ. गोपाल कंवर और लेखाधिकारी अशोक कुमार महिपाल की जोड़ी का कमाल, ठेकेदार मालामाल…

जब मन नहीं भाया तो चला दी कलम

पिछले साल मई-जून महीने की बात है। ठेकेदार अपने हिसाब से सिक्योरिटी गार्ड और सफाईकर्मियों की ड्यूटी करा रहा था। बताया गया कि ठेकेदार ने मई माह में 70 सिक्योरिटी गार्ड ड्यूटी पर लगाने का बिल बनाया। लेकिन डॉ. गोपाल कंवर साहब को ठेकेदार की ये मनमानी रास नहीं आई। साहब ने बिल पर कलम चलाते हुए साफ कहा — “मैं नहीं मानता, सिर्फ 32 गार्ड काम पर आए हैं।” बस फिर क्या था, 11 लाख 43 हजार 941 रुपए का बिल कटकर 5 लाख 85 हजार 700 रुपए में निपटा दिया गया।

यही हाल जून माह में भी हुआ। 70 गार्ड का बिल बना, लेकिन इस बार भी साहब ने गिनती कर डाली 38 की। और फिर 11 लाख 43 हजार 941 का बिल घटाकर 6 लाख 73 हजार 844 रुपए पास कर दिया गया।

सिर्फ सिक्योरिटी ही नहीं, हाउसकीपिंग में भी चले खेल

सिर्फ सिक्योरिटी ही नहीं, हाउसकीपिंग का भी वही हाल। मई-जून में 64 सफाई कर्मियों की ड्यूटी दिखाई गई। पर बिल पास हुआ सिर्फ 58 कर्मियों का। सुपरवाइजर भी 6 की जगह 4। 10 लाख 33 हजार 732.81 रुपए का बिल कटकर 9 लाख 14 हजार 409 पर आ गया।

अंदरखाने चर्चा है कि तब डॉ. गोपाल कंवर ने ठेकेदार को अपनी ताकत का अहसास करा दिया था। ठेकेदार भी समझ गया कि काम करने से ज्यादा जरूरी साहब को खुश रखना है। फिर क्या, साहब और ठेकेदार के बीच ‘जबरदस्त सेटिंग’ हुई।

सेटिंग के बाद खुला खेल फर्रुखाबादी

सेटिंग ऐसी जबरदस्त हुई कि जुलाई से लेकर आज तक एक भी सिक्योरिटी गार्ड या सफाईकर्मी का पेमेंट नहीं काटा गया। बल्कि नियमों को ताक पर रखकर साहब ने आदेश जारी कर 64 सफाईकर्मियों की जगह 94 सफाईकर्मी रखने का फरमान सुना दिया। न सक्षम स्वीकृति, न फाइल नोटिंग — सीधे आदेश।

जबकि नियमानुसार न तो इतने कर्मचारियों की जरूरत थी और न ही शासन स्तर से कोई स्वीकृति। हद तो तब हो गई जब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बाद उसके बिल भी सीधे-सीधे पास कर दिए जाने लगे। ठेकेदार के हिस्से अब लाखों का अतिरिक्त पेमेंट जाने लगा।

साहब की लीला अपरंपार, अगले एपिसोड में GST घोटाला

सूत्र बताते हैं कि अस्पताल में चल रहे कई घोटालों की कड़ियां इसी ‘साहब’ से जुड़ी हैं। मेडिकल कॉलेज में GST के नाम पर बड़ा खेल भी इन दिनों चर्चा में है, जिसमें फर्जी बिलिंग, ओवर इनवॉयसिंग और टैक्स चोरी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके सूत्रधार भी यही एमएस साहब हैं।

कल हम आपको इसी अस्पताल में चल रहे जीएसटी घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी से रूबरू कराएंगे, जिसमें लाखों के बिल के बदले सरकार को टैक्स का एक रुपया भी नहीं जमा कराया जा रहा और सारा खेल साहब की छत्रछाया में चल रहा है।

सवाल जो अब उठने लगे हैं

  • क्या बिना सक्षम स्वीकृति कोई मेडिकल सुपरिटेंडेंट सीधे-सीधे ऐसे नियम विरुद्ध आदेश जारी कर सकता है ?
  • जब ठेका अवैध एक्सटेंशन पर चल रहा था, तो क्यों नहीं नई टेंडर प्रक्रिया कराई गई ?
  • क्या अस्पताल में नियुक्त अधीक्षक के ऊपर जिला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है ?
  • आखिर कब तक कोरबा का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल ऐसे भ्रष्टाचार और सेटिंग के खेल में लिप्त रहेगा ?

जवाबदेही कौन तय करेगा ?

यह मामला सिर्फ ठेका एक्सटेंशन या बिल हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी का प्रमाण है। अब देखना ये होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले में जांच कर कार्रवाई करता है या फिर ये खेल यूं ही जारी रहेगा।

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