BALCO रेंज में जंगल बचाने के नाम पर करोड़ों का खेल ? 3 साल से ज्यादा समय से जमे रेंजर जयंत सरकार पर गंभीर आरोप, RTI से खुला भ्रष्टाचार का राज़ !

BALCO रेंज में जंगल बचाने के नाम पर करोड़ों का खेल ?
3 साल से ज्यादा समय से जमे रेंजर जयंत सरकार पर गंभीर आरोप, RTI से खुला भ्रष्टाचार का राज़ !
कोरबा। कोरबा वनमंडल के अंतर्गत आने वाला BALCO रेंज अब केवल जंगल और वन्य क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार, सेटिंग, फर्जी निर्माण, कागजी विकास और करोड़ों रुपये के CAMPA फंड के खेल को लेकर चर्चा में है। वर्षों से BALCO रेंज में जमे रेंजर जयंत सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने अपने “सेटिंग और जुगाड़” के दम पर ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया, जहां जंगल संरक्षण के नाम पर आने वाला पैसा जमीन पर कम और कागजों में ज्यादा दिखाई देता है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क द्वारा कई महीनों से की जा रही पड़ताल और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने अब पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कार्यों को रिकॉर्ड में पूरा बताया गया है, उनमें से कई कार्य मौके पर दिखाई ही नहीं देते। कहीं सड़क कागजों में बनी मिली, कहीं मजदूरी भुगतान का रिकॉर्ड मिला लेकिन जमीन पर काम का नामोनिशान नहीं, तो कहीं जैव विविधता पार्क और पौधारोपण जैसे कार्य केवल फाइलों में सीमित दिखाई दिए।
अब बड़ा सवाल यही है — क्या BALCO रेंज में जंगल बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल खेला गया ?
RTI से शुरू हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार, ग्राम यात्रा न्यूज नेटवर्क ने जब BALCO रेंज में CAMPA मद और अन्य वन विकास कार्यों की जानकारी RTI के तहत मांगी, तो शुरुआत में जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया गया। इसके बाद प्रथम अपील की गई। अपीलीय आदेश आने के बाद विभाग को रिकॉर्ड अवलोकन कराना पड़ा।
यहीं से वह दस्तावेज सामने आने लगे, जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।
दस्तावेजों में सड़क निर्माण, डेम निर्माण, मुरूम कार्य, पौधारोपण, मजदूरी भुगतान, जैव विविधता पार्क, मिट्टी कार्य, सुरक्षा फेंसिंग और अन्य विकास कार्यों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। लेकिन जब इन कार्यों की मौके पर पड़ताल की गई, तो कई स्थानों पर स्थिति पूरी तरह अलग नजर आई।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई काम ऐसे हैं जो केवल कागजों में दर्ज हैं, लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व नहीं है।
3 साल से ज्यादा समय से एक ही जगह जमे रेंजर पर सवाल
वन विभाग में सामान्यतः अधिकारियों और कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला होता रहता है, लेकिन BALCO रेंज में रेंजर जयंत सरकार लंबे समय से पदस्थ हैं। इनकी कुल नौकरी 6 साल की है, जबकि लगभग 4 साल से ये कोरबा में पदस्थ है। मतलब 2 साल के परिवीक्षा अवधि के बाद ये जब से रेंजर बने है तब से बालको रेंज में पदस्थ है, इससे पहले ये कांकेर में थे। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने अपनी “सेटिंग” और “प्रभाव” के जरिए खुद को यहां टिकाए रखा और इसी दौरान करोड़ों रुपये के कार्यों में बड़ा खेल हुआ।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों तक एक ही जगह जमे रहने के कारण रेंज कार्यालय के भीतर एक ऐसा तंत्र विकसित हो गया, जहां ठेकेदार, सप्लायर और कुछ विभागीय लोग मिलकर काम करते रहे और ऊपर से सब कुछ “नियमों के तहत” दिखाया जाता रहा।
लोगों का कहना है कि BALCO रेंज में बिना सेटिंग के पत्ता भी नहीं हिलता था।
2023-24 : सबसे ज्यादा खेल इसी अवधि में ?
सूत्रों के मुताबिक, सबसे ज्यादा गड़बड़ी वित्तीय वर्ष 2023-24 में हुई। CAMPA मद के तहत हुए कई कार्यों में एक ही काम को अलग-अलग हिस्सों में दिखाकर भुगतान निकाले जाने के आरोप लग रहे हैं।
दस्तावेजों में जिन कार्यों को अलग-अलग दिखाया गया, उनमें मौके पर जाकर देखने पर कई जगह एक ही कार्य क्षेत्र पाया गया। यानी कागजों में काम कई बार और जमीन पर एक बार या कई जगह बिल्कुल नहीं।
विशेष रूप से सड़क निर्माण और मुरूम कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
10 किलोमीटर सड़क का 5 टुकड़ों में खेल ?
दूधीटांगर क्षेत्र में बनाई गई सड़क को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस सड़क को DMF से स्वीकृति मिली थी, लेकिन मौके पर काम BALCO रेंज के माध्यम से कराया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि लगभग 10 किलोमीटर सड़क को 2-2 किलोमीटर के पांच हिस्सों में बांटकर प्रशासनिक स्वीकृतियां ली गईं।
यानी एक बड़े काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा सिस्टम “मैनेज” किया गया ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दर में अच्छी गुणवत्ता वाली डामर सड़क बन सकती थी, उससे भी ज्यादा राशि में केवल मुरूम सड़क तैयार की गई।
अब सवाल उठ रहा है कि:
- क्या जानबूझकर काम को हिस्सों में बांटा गया ?
- क्या गुणवत्ता से समझौता हुआ ?
- क्या लागत बढ़ाकर भुगतान निकाला गया ?
कैशबुक में काम, जमीन पर गायब ?
सूत्रों के अनुसार, RTI अवलोकन के दौरान मिली कैशबुक और भुगतान रजिस्टर में कई कार्यों की एंट्री दर्ज है। मजदूरी भुगतान, सामग्री खरीद और निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपये दर्शाए गए हैं।
लेकिन जब इन कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो कई जगह कुछ भी नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
- कई मजदूरों के नाम दर्ज हैं, लेकिन लोगों को जानकारी ही नहीं
- कुछ निर्माण केवल कागजों में दिखाई देते हैं
- पौधारोपण दिखाया गया, लेकिन मौके पर पौधे तक नहीं
यानी कागजों में जंगल हरा-भरा और जमीन पर सन्नाटा ?
बायोडायवर्सिटी पार्क के नाम पर बड़ा खेल ?
सूत्रों के अनुसार, जैव विविधता पार्क यानी Biodiversity Park के नाम पर भी भारी खर्च दिखाया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर ऐसा कोई विकसित पार्क नजर नहीं आता, जैसा रिकॉर्ड में बताया गया है।
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जनता के पैसे की खुली बर्बादी माना जाएगा।
BALCO को संरक्षण देने के आरोप
BALCO रेंज में लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि बड़े उद्योगों को संरक्षण देने के लिए विभागीय स्तर पर “मौन सहमति” का माहौल बनाया गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि:
- पेड़ों की कटाई पर आंखें बंद की गईं
- कुछ क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को नजरअंदाज किया गया
- कार्रवाई के बजाय “मैनेजमेंट” का रास्ता अपनाया गया
यहां तक आरोप हैं कि “संरक्षण” के नाम पर भारी वसूली का खेल भी चलता रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे दस्तावेज और स्थानीय शिकायतें मामले को गंभीर बनाते हैं।
आदिवासियों और ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीण और आदिवासी परिवारों का कहना है कि छोटे-छोटे मामलों में उन पर कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बड़े स्तर पर जंगल कटाई, कब्जे और फर्जी कामों पर विभाग चुप रहता है।
लोगों का आरोप है कि जंगल बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जंगल लगातार घटते गए और जमीन पर कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आया।
अब उठ रही बड़ी मांग
पूरा मामला सामने आने के बाद अब क्षेत्र में कई बड़ी मांगें उठने लगी हैं:
- BALCO रेंज के सभी CAMPA कार्यों की उच्च स्तरीय जांच
- सैटेलाइट सर्वे के जरिए जंगल कटाई की जांच
- रेंज के सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं
- कैशबुक और भुगतान रजिस्टर की फोरेंसिक जांच
- दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर FIR
- SIT या EOW जांच
जंगल बचा या केवल बिल बने?
BALCO रेंज का यह मामला केवल एक रेंज कार्यालय का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।
यदि दस्तावेजों में दर्ज करोड़ों रुपये के कार्य वास्तव में जमीन पर नहीं हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि जंगल और जनता दोनों के साथ धोखा है।
अब नजर सरकार, वन विभाग और जांच एजेंसियों पर है — क्या वे इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर जंगलों की यह कहानी भी फाइलों में दफन हो जाएगी।
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