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ईमानदार अफसरों पर ही सबसे ज्यादा वार क्यों?”

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महतारी वंदन योजना के नाम पर कलेक्टर अजीत वसंत को घेरने की कोशिश… या अवैध कारोबारियों की बौखलाहट?

सरगुजा।  जिले में अवैध कब्जों, जमीन की अवैध प्लाटिंग, भूमाफियाओं और संरक्षण प्राप्त अवैध कारोबारों पर लगातार कार्रवाई करने वाले कलेक्टर अजीत वसंत इन दिनों कुछ लोगों के निशाने पर दिखाई दे रहे हैं। “महतारी वंदन योजना” को लेकर जनदर्शन में हुई सामान्य प्रशासनिक चर्चा को जिस तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, उससे अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इसके पीछे मकसद क्या है?

क्या सचमुच यह महिलाओं की चिंता का मुद्दा है…
या फिर प्रशासन की सख्ती से परेशान लोगों की सुनियोजित नाराजगी?

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असल मामला क्या था?

जानकारी के अनुसार, जनदर्शन में महिलाओं का एक समूह अपने क्षेत्र से शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था। महिलाओं ने ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में शराब दुकान के कारण हो रही सामाजिक परेशानियों को सामने रखा।

कलेक्टर अजीत वसंत ने महिलाओं की बात गंभीरता से सुनी और मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।

 

लेकिन इसके बाद पूरे घटनाक्रम को अचानक “महतारी वंदन योजना” से जोड़कर सोशल मीडिया में ऐसा प्रचारित किया गया मानो महिलाओं के मुद्दे को गलत दिशा में ले जाया गया हो। जबकि वास्तविकता यह है कि प्रशासनिक संवाद को काट-छांटकर अलग नैरेटिव देने की कोशिश की गई।

जनदर्शन में सवाल पूछना गुनाह है क्या?

जनदर्शन जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद का मंच होता है। वहां लोग अपनी समस्याएं रखते हैं और अधिकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत समझने की कोशिश करते हैं।

 

महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजना है। यदि कलेक्टर ने महिलाओं से यह जानने की कोशिश की कि योजना का पैसा कहां उपयोग हो रहा है, उसका परिवार और समाज पर क्या असर पड़ रहा है — तो क्या यह प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है?

 

लेकिन अफसोस, इसी संवाद के एक हिस्से को काटकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई मानो कोई असंवेदनशील टिप्पणी कर दी गई हो। जबकि मौके पर मौजूद कई लोगों का कहना है कि पूरे संवाद को जानबूझकर गलत एंगल देकर वायरल किया गया।

 

कार्रवाई से बौखलाए अवैध कारोबारी?

कलेक्टर अजीत वसंत के आने के बाद जिले में कई बड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई हुई। अवैध प्लाटिंग पर रोक लगी। नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कारोबारों पर शिकंजा कसा गया।

 

यही वजह है कि लंबे समय से सिस्टम को अपनी जागीर समझने वाले कुछ तथाकथित नेता, दलाल और अवैध कारोबार से जुड़े लोग अब असहज महसूस कर रहे हैं। प्रशासन की सख्ती ने उनके हितों पर चोट पहुंचाई है।

 

राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा है कि जिन लोगों की “दुकानें” बंद हुई हैं, वही अब माहौल बनाकर ईमानदार प्रशासनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

“जो झुकता नहीं, वही सबसे ज्यादा खटकता है”

कलेक्टर अजीत वसंत की पहचान एक शांत, संयमित और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में रही है। वे नियमों से समझौता नहीं करते और गलत को संरक्षण देने से साफ इनकार करते हैं।

 

यही कारण है कि आम जनता में उनकी साफ-सुथरी छवि है, लेकिन ठेकेदारी, अवैध जमीन कारोबार और राजनीतिक दबाव की राजनीति करने वालों के बीच वे कभी “सेट” नहीं हो पाए।

 

सवाल यह भी है कि क्या आज ईमानदारी से काम करना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है?

तथ्यों से ज्यादा “नैरेटिव” बनाने की कोशिश

सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान का छोटा हिस्सा काटकर माहौल बनाना आसान हो गया है। लेकिन जनता अब समझदार है। लोग यह भी देख रहे हैं कि कौन विकास और व्यवस्था के लिए काम कर रहा है और कौन सिर्फ भ्रम फैलाकर राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है।

 

सरगुजा की जनता यह अच्छी तरह जानती है कि जिले में अवैध गतिविधियों पर लगातार सख्ती दिखाई दे रही है। ऐसे में प्रशासन को बदनाम करने की कोशिशों को लोग किस नजर से देखेंगे, यह आने वाला समय तय करेगा।

 

जनता का सवाल — क्या सख्त और ईमानदार अफसरों को काम नहीं करने दिया जाएगा?

आज जरूरत इस बात की है कि जनहित में काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया जाए, न कि उन्हें झूठे विवादों में घसीटकर दबाव बनाने की कोशिश की जाए।

क्योंकि जब प्रशासन ईमानदारी से काम करता है, तब सबसे ज्यादा परेशानी उन्हीं लोगों को होती है जिनके स्वार्थ पर चोट पहुंचती है।

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