कोरबा DMF फाइल्स – भाग 4

“कोरबा के खदान प्रभावित गांवों तक क्यों नहीं पहुंचा विकास? CAG रिपोर्ट के बाद अब हर परियोजना की होगी पड़ताल”
राष्ट्रीय खोजी श्रृंखला | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
EXCLUSIVE | CAG REPORT EXPOSES – PART 4
“करोड़ों रुपये खर्च हुए… लेकिन सबसे बड़ा सवाल—क्या वास्तव में खदान प्रभावितों का जीवन बदला?”
कोरबा/रायपुर। जिला खनिज न्यास (DMF) की स्थापना एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ हुई थी—खनन से प्रभावित गांवों और परिवारों को विकास की मुख्यधारा में लाना।
लेकिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की Performance Audit Report No. 05 of 2026 यह संकेत देती है कि कई मामलों में योजनाओं की प्राथमिकता, चयन, क्रियान्वयन और निगरानी में गंभीर प्रक्रियागत कमियां रहीं।
अब सवाल केवल खर्च का नहीं, बल्कि विकास के वास्तविक परिणाम (Outcomes) का है।
DMF का असली पैमाना क्या है? DMF की सफलता केवल यह नहीं कि कितने करोड़ रुपये खर्च हुए।
असल सफलता यह होनी चाहिए थी—
✔ कितने गांवों में स्वच्छ पेयजल पहुंचा?
✔ कितने स्कूल बेहतर हुए?
✔ कितने अस्पताल मजबूत हुए?
✔ कितने विस्थापित और प्रभावित परिवारों को सीधा लाभ मिला?
✔ कितने युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण मिला?
यदि इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते, तो केवल व्यय का आंकड़ा विकास का प्रमाण नहीं बन सकता।
CAG का संकेत—योजनाओं की गुणवत्ता पर भी प्रश्न
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि कई परियोजनाओं में योजना निर्माण, प्राथमिकता निर्धारण और निगरानी अपेक्षित स्तर पर नहीं थी।
इसका सीधा अर्थ यह है कि भविष्य में केवल धन स्वीकृत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिणाम-आधारित (Outcome-Based) मूल्यांकन भी आवश्यक होगा।
क्या कोरबा के सबसे प्रभावित गांवों को मिला पहला अधिकार?
कोरबा देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
वर्षों से यहां के कई गांव— प्रदूषण,
धूल, जल संकट,
स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों,
विस्थापन,
पर्यावरणीय प्रभाव
का सामना करते रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है—
क्या DMF योजनाओं में इन्हीं गांवों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली? अब खुलनी चाहिए हर परियोजना की फाइल
जनता यह जानना चाहती है—
किस गांव में कितना पैसा खर्च हुआ?
किस विभाग ने काम कराया?
काम पूरा हुआ या अधूरा है?
किस एजेंसी ने गुणवत्ता जांच की?
क्या किसी परियोजना का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण हुआ?
यदि यह जानकारी सार्वजनिक होती है, तो पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत होंगे।
अब जवाबदेही केवल प्रशासन की नहीं। DMF एक संस्थागत व्यवस्था है। इसलिए जवाबदेही भी सामूहिक होनी चाहिए।
यदि CAG ने कमियां चिन्हित की हैं, तो—
संबंधित विभागों, कार्यान्वयन एजेंसियों, निगरानी तंत्र, और ट्रस्ट की निर्णय प्रक्रिया
सभी की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
देशभर के लिए एक बड़ा संदेश
कोरबा का मामला केवल एक जिले का नहीं है।
यह उन सभी खनन जिलों के लिए एक सीख है जहां DMF के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
यदि CAG की सिफारिशों को गंभीरता से लागू किया जाता है, तो भविष्य में DMF व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकती है।
ग्राम यात्रा की पाँच प्रमुख मांगें
1.कोरबा DMF की सभी परियोजनाओं का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कराया जाए।
2. ग्रामवार और परियोजनावार व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए।
3. CAG द्वारा चिन्हित प्रत्येक आपत्ति पर समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट जारी की जाए।
4. 44 प्रतिशत विकास से वंचित गांवों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर उसकी निगरानी की जाए।
5. DMF ट्रस्ट की बैठकों के कार्यवृत्त और निर्णयों को अधिकतम पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाए।
ग्राम यात्रा का संपादकीय
खनन केवल संसाधन निकालने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की भी परीक्षा है।
यदि खदानों से निकली संपदा का लाभ सबसे पहले उन्हीं लोगों तक नहीं पहुंचता जिन्होंने वर्षों तक उसके दुष्प्रभाव झेले हैं, तो DMF की मूल भावना अधूरी रह जाती है।
CAG की रिपोर्ट किसी अंतिम दोष निर्धारण का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि सुधार और जवाबदेही का अवसर भी है।
अब आवश्यकता है—
हर फाइल की समीक्षा हो।
हर योजना की गुणवत्ता जांच हो।
हर प्रभावित गांव तक विकास पहुंचे।
और हर सार्वजनिक रुपये का हिसाब जनता के सामने रखा जाए।
श्रृंखला का अंतिम और सबसे बड़ा खुलासा
कोरबा DMF फाइल्स – भाग 5
“क्या CAG रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई? कौन देगा जवाब—जिला प्रशासन, राज्य सरकार या DMF ट्रस्ट? सुधार की राह क्या है और आगे क्या होना चाहिए?”
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