कोरबा में 100+ करोड़ टैक्स बकाया का दावा, फिर भी निर्माण की अनुमति? बड़े सवालों से घिरा BALCO–वेदांता मामला

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा और BALCO–वेदांता के बीच टैक्स देनदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दस्तावेज़ों में जहाँ ₹28 करोड़ के समायोजन की बात सामने आती है, वहीं 100+ करोड़ टैक्स बकाया होने का दावा भी चर्चा में है।
सबसे बड़ा सवाल
जब नगर निगम के रिकॉर्ड/दावों के अनुसार BALCO–वेदांता पर करोड़ों का टैक्स बकाया है, तो—
*नए निर्माण की अनुमति कैसे दी गई?*
*बाउंड्री वॉल, सड़क निर्माण, G+9 और अन्य परियोजनाओं को किस आधार पर मंजूरी मिली?*
*क्या बकाया रहते अनुमति देना नियमों के अनुरूप है?*
मामले को और गंभीर बनाता है
BALCO द्वारा चिमनी डिस्मेंटल से जुड़ा विवाद, जिसमें कथित रूप से अनुमति से जुड़ी आपत्तियाँ पहले सामने आई थीं जिला प्रशासन और निगम कोरबा कोरबा आयुक्त ने साफ शब्दों में लेटर के माध्यम से अनुमति देने से इंकार किया और कारण बताया की बालको वेदांता प्रबंधन पर करोड़ों का टैक्स बकाया है जब तक इनका भुगतान नहीं होता कोई भी अनुमति नहीं दिया जा सकता
फिर कैसे दी गई अनुमति
*जब 2024-25 मे चिमनी डिस्मेंटल की अनुमति यह कहकर रोका गया की नगर निगम की टैक्स बकाया है तो फिर
G9+को फिर कैसे नगर निगम कोरबा ने 2024-25 में ही दी अनुमति
क्या नियम बदल गया या कारण कुछ और रहा
जवाब देही किसकी
एक विभाग और एक समय में नियम अलग-अलग
जारी कर्ता अधिकारी के ऊपर क्या कार्यवाही सुनिश्चित की गई*
फिर सवाल उठता है
क्या बिना पूर्ण अनुमति के कार्य हुआ?
अगर हाँ, तो नगर निगम या जिला प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
RTI से जुड़े आरोप भी सामने
* जानकारी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं
* जवाबों में स्पष्टता का अभाव
* पारदर्शिता पर सवाल
अब सवाल जिंदा है
₹28 करोड़ का हिसाब और 100+ करोड़ बकाया का सच क्या है?
क्या नियमों का पालन हुआ या कहीं चूक हुई?
कोरबा की जनता जवाब चाहती है
जब बकाया है, तो अनुमति कैसे?
बालको वेदांता द्वारा बिना अनुमति के बाउंड्री वॉल निर्माण पर नगर निगम कोरबा के द्वारा तोडूं दस्ता द्वारा बाउंड्री वॉल के कुछ आंशिक हिस्से को तोडा गया तो पुरे बाउंड्री वॉल को क्यों नहीं…..??
सवाल है पर जवाब अब तक नहीं
क्या पुरा मामला नगर निगम कोरबा एवं बालको वेदांता के साठ -गाठ से ?? जोड़ा जाएगा या संदेह के दायरे में है तो इसकी जवाबदेही तय कौन करेगा!
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अगर जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो
यह मामला
वित्तीय ऑडिट
प्रशासनिक जांच
और उच्च स्तरीय हस्तक्षेप
तक जा सकता है।
जल्द बड़ा खुलासा
बने रहें
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क के साथ
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