CSR के करोड़ों दावे… लेकिन IT कॉलेज कोरबा के लिए 14 साल से लंबित करोड़ों?

BALCO प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
कलेक्टर के पत्र, मुख्यमंत्री जनदर्शन और सरकारी दस्तावेजों ने खोली परतें
क्या कॉर्पोरेट CSR केवल प्रचार तक सीमित?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
कोरबा | रायपुर …देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में शामिल BALCO (भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड) और उसकी पैरेंट समूह Vedanta एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में हैं। इस बार मामला पर्यावरण या प्रदूषण का नहीं, बल्कि शिक्षा और CSR फंडिंग से जुड़ा है।
सरकारी दस्तावेजों, कलेक्टर कार्यालय के पत्राचार और मुख्यमंत्री जनदर्शन में दिए गए आवेदन से यह सवाल खड़ा हो गया है कि: “क्या BALCO–Vedanta CSR के बड़े-बड़े दावे तो कर रही है, लेकिन कोरबा के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज को वर्षों से लंबित सहायता राशि नहीं दे रही?”
दस्तावेज बताते हैं कि कोरबा जिले के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज — इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईटी कॉलेज), कोरबा — को बचाने के लिए जिला प्रशासन को बार-बार BALCO प्रबंधन को पत्र लिखना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
शासन की जनभागीदारी योजना के तहत वर्ष 2008 में कोरबा जिले के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज “इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोरबा” की स्थापना औद्योगिक संस्थानों के सहयोग से की गई थी
इस परियोजना में जिले की प्रमुख कंपनियों:
– BALCO
– NTPC
– SECL
– CSEB
– LANCO
– PIL/HARIPA
आदि से CSR/TSR मद से सहयोग अपेक्षित था। लेकिन अब सामने आए सरकारी दस्तावेजों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
कलेक्टर का 08 अगस्त 2022 का डी.ओ. पत्र
दिनांक 08/08/2022 को कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, कोरबा ने BALCO के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को एक आधिकारिक डी.ओ. पत्र भेजा।
इस पत्र में साफ लिखा गया:
▪ IT कॉलेज कोरबा गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है
▪ BALCO से अपेक्षित ₹10 करोड़ CSR सहायता में से केवल लगभग ₹2.20 करोड़ ही प्राप्त हुए
▪ शेष ₹7.80 करोड़ राशि लंबित है पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि: इस विषय पर मुख्यमंत्री और तकनीकी शिक्षा मंत्री स्तर तक बैठकें हो चुकी थीं।
मुख्यमंत्री की बैठक का भी उल्लेख
पत्र में दो महत्वपूर्ण बैठकों का संदर्भ दिया गया:
▪ 20 मार्च 2007
मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन की अध्यक्षता में बैठक
▪ 24 जून 2021 से 30 अक्टूबर 2021
तकनीकी शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक इन बैठकों में IT कॉलेज कोरबा को सहायता देने का विषय चर्चा में था। इसके बावजूद यदि वर्षों बाद भी राशि लंबित रही, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
“कॉलेज बचाने” के लिए कलेक्टर को फिर लिखना पड़ा पत्र दूसरे सरकारी पत्र में कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट लिखा कि संस्था का अस्तित्व बनाए रखने हेतु CSR मद से ₹7.80 करोड़ उपलब्ध कराए जाएं।”
पत्र में यह भी कहा गया कि:
– शासन पहले ही राशि दे चुका है
– लेकिन वर्तमान में कॉलेज संचालन के लिए पर्याप्त धन नहीं है
यानी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि जिला प्रशासन को कॉलेज बचाने के लिए BALCO से CSR राशि जारी करने का अनुरोध करना पड़ा।
मामला मुख्यमंत्री जनदर्शन तक पहुंचा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि IT कॉलेज कोरबा के स्टाफ को मुख्यमंत्री जनदर्शन तक आवेदन देना पड़ा।
आवेदन में आरोप लगाया गया कि:
▪ CSR मद से ₹10 करोड़ देने की बात थी
▪ लेकिन केवल ₹2.95 करोड़ मिले
▪ लगभग ₹7.05 करोड़ लंबित हैं
यह आवेदन मुख्यमंत्री निवास, रायपुर तक पहुंचा।
मुख्यमंत्री निवास से भी कार्रवाई का आदेश
दिनांक 09/12/2024 को मुख्यमंत्री निवास से कलेक्टर कोरबा को पत्र भेजा गया।
पत्र में कहा गया:
“मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए।” इसके बाद:
20/02/2025 को कलेक्टर कार्यालय ने BALCO के CEO को पत्र जारी कर आवेदन पर कार्रवाई करने और आवेदक व कलेक्टर कार्यालय को अवगत कराने को कहा।
सबसे बड़ा सवाल: CSR केवल विज्ञापन है या जिम्मेदारी?
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक तरफ BALCO–Vedanta करोड़ों के CSR, मेडिकल और सामाजिक निवेश के बड़े दावे करती है…
लेकिन दूसरी तरफ: कोरबा के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज को वर्षों से लंबित सहायता राशि के लिए:
– कलेक्टर
– मंत्री
– मुख्यमंत्री कार्यालय
– और कॉलेज स्टाफ़ को बार-बार पत्राचार करना पड़ रहा है।
तो क्या CSR केवल कॉर्पोरेट रिपोर्ट और विज्ञापन तक सीमित है?
क्या जिला प्रशासन की बात भी अनसुनी?
दस्तावेज बताते हैं कि:
– जिला कलेक्टर ने पत्र लिखा
– शासन स्तर पर बैठक हुई
– मुख्यमंत्री कार्यालय ने निर्देश दिया फिर भी यदि राशि लंबित रही, तो यह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा प्रश्न बन जाता है।* मतलब साफ है।
शिक्षा बनाम कॉर्पोरेट इमेज?
विशेषज्ञों का कहना है कि CSR का मूल उद्देश्य:
– शिक्षा
– स्वास्थ्य
– सामाजिक विकास
– स्थानीय जनहित। होता है।
लेकिन यदि किसी जिले के पहले इंजीनियरिंग कॉलेज को ही वर्षों तक बालको वेदांता प्रबंधन से फंड के लिए संघर्ष करना पड़े, तो CSR मॉडल की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब उठ रही हैं ये मांगें
स्थानीय लोगों और शिक्षा जगत से अब मांग उठ रही है कि:
▪ IT कॉलेज कोरबा CSR मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
▪ BALCO द्वारा घोषित CSR commitments सार्वजनिक किए जाएं
▪ लंबित राशि की स्थिति स्पष्ट की जाए
▪ CSR उपयोग और भुगतान का audit कराया जाए
▪ शिक्षा संस्थानों के लिए घोषित कॉर्पोरेट फंडिंग का सत्यापन हो
कानूनी और जनहित का प्रश्न
यह मामला केवल एक कॉलेज का नहीं है।
यह सवाल है:
क्या बड़े कॉर्पोरेट समूह CSR के बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर संस्थाएं आर्थिक संकट से जूझती रहती हैं?
यदि सरकारी बैठकों, कलेक्टर पत्राचार और मुख्यमंत्री निर्देशों के बावजूद लंबित सहायता जारी नहीं हुई, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।
IT कॉलेज कोरबा से जुड़े दस्तावेजों ने CSR मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ करोड़ों के CSR निवेश और सामाजिक सेवा के दावे, दूसरी तरफ:
– कॉलेज का आर्थिक संकट
– लंबित सहायता राशि
– बार-बार सरकारी पत्राचार
– और मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत। यह पूरा मामला अब जनहित, शिक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा विषय बन चुका है ।
अब नजर इस बात पर है कि:
क्या छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस मामले में पारदर्शी जांच करेंगी?
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