कोरबा: बालको की काली फाइल!

सरकारी जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा — प्रदूषण, अवैध कब्जा, मजदूर शोषण, सुरक्षा में भारी लापरवाही और पुनर्वास घोटाले के आरोपों से हिला कोरबा
कोरबा . ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क...
बालको प्रबंधन पर लगे आरोप अब सिर्फ जनआक्रोश नहीं रहे, बल्कि सरकारी जांच रिपोर्ट में भी कई गंभीर बिंदु प्रमाणित होने की बात सामने आई है।
कलेक्टर कोरबा के आदेश पर गठित जिला स्तरीय जांच दल ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें उद्योग विस्तार, पर्यावरण अनुमति, मजदूर सुरक्षा, जमीन कब्जा, प्रदूषण और शांतिनगर पुनर्वास जैसे मामलों में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।
1. “कारखाना नहीं मौत का कुंड!
बॉयलर ब्लास्ट में 26 मजदूरों की मौत पर वेदांता-एनजीएसएल पर गंभीर सवाल तितिक्षा सामाजिक संगठन ने शासन को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि सिंघीतराई स्थित वेदांता छत्तीसगढ़ पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट में लगभग 26 मजदूरों की मौत हुई।
आरोप है कि कंपनी ने ज्यादा मुनाफे के लालच में बॉयलर को उसकी क्षमता से अधिक दबाव में चलाया।
रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जोखिम भरे कार्यों में भारी लापरवाही बरती गई बॉयलर की तकनीकी जांच और रखरखाव में गंभीर कमी थी मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया गया
2. “मजदूरों की लाशों पर मुनाफा?
जांच में खुलासा — बॉयलर के अंदर जमा था भारी प्रेशर
आवेदन में आरोप लगाया गया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में फ्यूल जमा था, जिससे अचानक तेज दबाव बना और विस्फोट हुआ। अगर निर्धारित समय पर पाइप और सिस्टम की जांच होती, तो हादसा टल सकता था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाइप लाइन की स्थिति खराब थी तकनीकी खराबी को नजरअंदाज किया गया 350 मेगावाट से 590 मेगावाट तक अचानक लोड बढ़ाया गया इससे सिस्टम पर असामान्य दबाव बना
3. सरकारी विभाग भी कटघरे में!
शक्ति ज़िले में वेदांता पावर प्लांट में ब्लास्ट हुआ और जिला प्रशासन ने तत्काल कार्यवाही करते हुए वेदांता प्रबंधन और चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर एफआईआर दर्ज किया गया।
कोरबा बालको वेदांता प्रबंधन पर इन सभी बातों की सरकारी जांच में पुष्टी होने पर एफआईआर क्यों नहीं क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग पर सिर्फ कागजी निरीक्षण का आरोप रिपोर्ट में बड़ा आरोप लगाया गया कि औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सिर्फ कागजों में निरीक्षण करता रहा।
जमीनी निरीक्षण की जानकारी शासन तक नहीं पहुंची।
आरोप यह भी है
सुरक्षा विभाग ने वास्तविक स्थिति छिपाई निरीक्षण रिपोर्ट प्रभावित लोगों से साझा नहीं की गई कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत से सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज किया गया
4.कारखाना अधिनियम की धज्जियां!
जांच में कई गंभीर कानून उल्लंघन प्रमाणित
जांच रिपोर्ट में फैक्ट्री एक्ट 1948 और छत्तीसगढ़ फैक्ट्री नियमावली 1962 के कई नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में दर्ज प्रमुख उल्लंघन:
धारा 7-A(1) का उल्लंघन
धारा 32(a) का उल्लंघन
धारा 38(1)(b) का उल्लंघन
धारा 41-C(a) का उल्लंघन
धारा 107 और 109 का उल्लंघन नियम 67-4(B), 119, 120, 131-A(1)(C) आदि का उल्लंघन
रिपोर्ट में कहा गया कि श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद कमजोर मिली।
5. “बालको पर जमीन कब्जाने का आरोप”
सरकारी जांच में अतिरिक्त कब्जे की पुष्टि
रिपोर्ट में उल्लेख है कि कंपनी द्वारा कई हेक्टेयर वन, राजस्व और निजी भूमि पर अतिरिक्त कब्जा किया गया। मौका जांच में कई खसरों में अतिरिक्त प्रभावित रकबा पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार बड़े झाड़ के जंगल क्षेत्र में भी कब्जे के संकेत मिले।
6. कोरबा की हवा जहरीली?
ध्वनि और वायु प्रदूषण में बड़ा खुलासा जांच टीम ने पाया कि दिन में ध्वनि स्तर 72 dB(A) रात में 70.4 dB(A) दर्ज हुआ
जबकि रिहायशी क्षेत्र के लिए मानक इससे बहुत कम है। वायु गुणवत्ता जांच में PM स्तर खतरनाक श्रेणी के करीब पाया गया क्षेत्र को “Moderately Polluted” बताया गया रिपोर्ट में कहा गया कि इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
7. “बीमारियों का गांव बनता शांति नगर?
मेडिकल कैंप में सामने आए डराने वाले आंकड़े
स्वास्थ्य शिविरों में दर्ज मरीजों में: खांसी-जुकाम बीपी और डायबिटीज अस्थमा एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस एलर्जिक डर्मेटाइटिस खुजली और अन्य बीमारियां बड़ी संख्या में मरीज मिले इससे स्थानीय लोगों ने प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट का मुद्दा उठाया।
8. पुनर्वास या धोखा?
शांतिनगर के 87 परिवारों का दर्द रिपोर्ट में दर्ज
रिपोर्ट में उल्लेख है कि
प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और नौकरी का वादा किया गया लेकिन कई परिवारों का आज तक पूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ मुआवजा किस्तों में दिया गया कई परिवारों ने प्रशासन और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
रिपोर्ट में कहा गया कि पुनर्वास को लेकर बालको प्रबंधन की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
9. CSR का हिसाब दो!
सामाजिक दायित्व निभाने में भी सवाल शिकायत में कहा गया कि कंपनी ने CSR की स्पष्ट जानकारी नहीं दी स्थानीय विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर पारदर्शिता नहीं रही जांच दल भौतिक सत्यापन तक नहीं कर सका रिपोर्ट में इसे गंभीर विषय माना गया।
10. “स्थानीय रोजगार के दावों पर भी विवाद
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने दावा किया कि: 86% कर्मचारी छत्तीसगढ़ के हैं 14% अन्य राज्यों के
पर आरोप यह भी
लेकिन शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को अपेक्षित रोजगार नहीं दिया गया और ना ही स्थानीय लोगों का जों आंकड़ा बालको वेदांता प्रबंधन बताता है उस के बिल्कुल विपरीत है यहां की स्थिति।
मतलब स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं?
सबसे बड़ा सवाल…
क्या अब होगी कार्रवाई?
जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कई शिकायतों को प्रमाणित माना है और अलग-अलग विभागों को कार्रवाई की अनुशंसा की है।
अब सवाल यह है कि:
क्या दोषियों पर FIR होगी? क्या प्रबंधन पर कार्रवाई होगी? क्या प्रभावित परिवारों को न्याय मिलेगा? या फिर यह रिपोर्ट भी फाइलों में दब जाएगी?
और अंत मेंकोरबा की धरती पूछ रही है — आखिर मजदूरों की जान की कीमत कितनी?
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