छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : 11 अधिवक्ताओं को मिला सीनियर एडवोकेट का दर्जा…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के 11 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को “सीनियर एडवोकेट” घोषित कर न्यायिक जगत में बड़ी पहचान दी है। हाईकोर्ट द्वारा 7 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार यह दर्जा तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
हाईकोर्ट की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि एडवोकेट्स एक्ट 1961, हाईकोर्ट ऑफ छत्तीसगढ़ (Designation of Senior Advocates) Rules 2025 तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में यह निर्णय लिया गया।
इन अधिवक्ताओं को मिला सम्मान
- श्री शैलेन्द्र दुबे
- श्री रणवीर सिंह मरहास
- हमीदा सिद्दीकी
- श्री यशवंत ठाकुर
- श्री अनुप मजूमदार
- श्री नीलाभ दुबे
- श्री अमृतो दास
- श्री मतीन सिद्दीकी
- श्रीमती नौशिना अफरीन अली
- श्री अरविंद श्रीवास्तव
- श्री तरेंद्र कुमार झा
क्या होता है ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा ?
कानूनी क्षेत्र में “सीनियर एडवोकेट” का दर्जा बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यह सम्मान केवल उन्हीं वकीलों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक महत्वपूर्ण मामलों में प्रभावी पैरवी कर न्यायिक क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई हो। ऐसे अधिवक्ताओं को कोर्ट में विशेष विशेषज्ञता रखने वाला माना जाता है।
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद संबंधित वकीलों की न्यायिक प्रतिष्ठा और प्रभाव दोनों बढ़ जाते हैं। बड़े संवैधानिक, आपराधिक और जनहित मामलों में उनकी भूमिका अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रतिष्ठा के साथ बढ़ती है जिम्मेदारी
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद कुछ विशेष नियम भी लागू होते हैं। वे सीधे क्लाइंट से वकालतनामा नहीं लेते और उनका मुख्य कार्य कोर्ट में कानूनी बहस करना होता है। न्यायिक व्यवस्था में उन्हें विशेषज्ञ बहसकर्ता के रूप में देखा जाता है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के न्यायिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था में अनुभवी अधिवक्ताओं को मिली बड़ी मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
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