नोटिस लेने से इंकार के बाद भी 13 दिन की मोहलत: क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावा?

राजस्व विभाग पर उठ रहे सवाल ?
कोरबा। पहाड़ी कोरवा आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल और गहरे हो गए हैं। न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक जमीन खाली नहीं कराई गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है।
ताज़ा जानकारी के अनुसार, दिनांक 05/05/2026 को तहसील कार्यालय से कब्जा हटाने का नोटिस तामील कराने भेजा गया, लेकिन कब्जाधारी द्वारा नोटिस लेने से इंकार कर दिया गया। इसके बावजूद संबंधित पक्ष को 18/05/2026 तक का समय दिया गया है।
ऐसे में बड़ा सवाल उठता है:
जब नोटिस लेने से ही इंकार कर दिया गया, तो फिर अतिरिक्त समय क्यों दिया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से यह संदेह पैदा हो रहा है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। यह भी चर्चा है कि इस बीच मामले को अन्य न्यायालयों में ले जाकर लंबित करने की कोशिश हो सकती है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या नोटिस की तामिली की वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई गई?
क्या प्रशासन बेदखली की तैयारी में है या सिर्फ समय दिया जा रहा है?
क्या गरीब आदिवासी परिवार को समय पर न्याय मिल पाएगा?
अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला जिला प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन सकता है।
एक लाइन का तीखा पंच:
नोटिस ठुकराया, फिर भी मोहलत—न्याय या सिर्फ प्रक्रिया?
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