कोल लेवी की जांच बढ़ी तो किन SECL अधिकारियों की भूमिका पर उठेंगे सवाल?

एन. खुर्शीद, राजेश सिंह, संतोष सिन्हा, संतोष राठौर और मारुति शंकर सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांचने की मांग; भुगतान, डिस्पैच और कारोबारी लाभ का पूरा हिसाब सामने लाने पर जोर
कोरबा/बिलासपुर। कथित कोल लेवी तंत्र की जांच केवल वसूली करने वालों तक सीमित रहेगी या भुगतान, कारोबारी लाभ और विभागीय भूमिका की भी पड़ताल होगी? भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे की शिकायत ने यह सवाल उठाया है। उपलब्ध पुलिस नोटिस में उनकी शिकायत की जांच और कथन दर्ज कराने के लिए बुलाने का उल्लेख है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क अपनी पूर्व खबरों में कथित ‘गब्बर टैक्स’, रोड सेल, लोडिंग, कोयला परिवहन और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाता रहा है। अब दुबे की शिकायत में भी भुगतानकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की व्यापक जांच की मांग सामने आई है।
खुर्शीद सहित इन नामों पर मांगी जाए स्पष्ट जवाबदेही
ग्राम यात्रा की पूर्व रिपोर्टों में उठे सवालों के संदर्भ में एन. खुर्शीद, राजेश सिंह, संतोष सिन्हा, संतोष राठौर और मारुति शंकर की संबंधित अवधि में तैनाती, वास्तविक दायित्व और निर्णयों की पड़ताल की मांग प्रमुख है। इसके साथ तत्कालीन संबंधित क्षेत्रीय महाप्रबंधकों तथा बिक्री, डिस्पैच, लोडिंग, सैंपलिंग और वेब्रिज व्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी अभिलेखों के आधार पर जांची जानी चाहिए। इन नामों का उल्लेख जवाबदेही की मांग के संदर्भ में है। उपलब्ध पुलिस नोटिस में इन्हें आरोपी घोषित करने या इनके विरुद्ध जांच शुरू होने का उल्लेख नहीं है।
किस अधिकारी के पास कौन-सा अधिकार था?
किसके निर्देश पर अनुमति, लोडिंग या डिस्पैच हुआ?
किसने शिकायत प्राप्त की और क्या कार्रवाई की?
इन सवालों का उत्तर पदनाम और अनुमान से नहीं, संबंधित रिकॉर्ड से निकलेगा।
भुगतान मजबूरी था या अनुचित लाभ का रास्ता?
दुबे ने कोल वाशरी संचालकों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और औद्योगिक लाभार्थियों के भुगतान की जांच मांगी है। जांच को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किससे दबाव में रकम वसूली गई और किसने मिलीभगत से अनुचित लाभ प्राप्त किया।
हर भुगतानकर्ता स्वतः अपराधी नहीं है; लेकिन साक्ष्य मिलने पर किसी प्रभावशाली भुगतानकर्ता या अधिकारी को जांच से बाहर रखने का भी आधार नहीं होना चाहिए।
रिकॉर्ड खुलेगा तो जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी
DO का क्रम, अनुमति की तारीखें, लोडिंग और डिस्पैच विवरण, सैंपलिंग रिपोर्ट, वेब्रिज का मूल डेटा, गेट रिकॉर्ड, रेलवे रैक विवरण और वित्तीय लेन-देन का मिलान कथित तंत्र की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है।
जहां रिकॉर्ड में अनियमितता मिले, वहां संबंधित निर्णय लेने वाले और उसे लागू करने वाले व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित हो। जहां मिलीभगत का साक्ष्य मिले, वहां विधिसम्मत कार्रवाई हो।
ग्राम यात्रा का सवाल कायम—कोयले का पूरा हिसाब कौन देगा?
ग्राम यात्रा ने जिन मुद्दों को लगातार उठाया है, उनका जवाब अब दस्तावेजी जांच से सामने आना चाहिए। खुर्शीद सहित संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही की मांग किसी को पहले से दोषी ठहराना नहीं है—यह सार्वजनिक संपदा के कारोबार का हिसाब मांगना है।
कोयला जनता का है। इसलिए कथित अवैध वसूली, अनुचित कारोबारी लाभ और विभागीय भूमिका—हर कड़ी की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उपलब्ध दस्तावेज फरवरी 2026 की शिकायत-संबंधी कार्रवाई दर्शाते हैं। संबंधित नामों के विरुद्ध वर्तमान जांच स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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