कांग्रेसी नेता की पत्नी का बोनट पर रील, सड़क पर जोखिम—क्या पुलिस व्यवस्था को खुली चुनौती?

प्रशासन संभाले शहर की सुरक्षा, और सार्वजनिक सड़क बने स्टंट का मंच? कोरबा के पंडित रविशंकर शुक्ल नगर के बताए जा रहे वीडियो पर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। एक तरफ त्योहारों में भीड़, यातायात और शहर की सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी। दूसरी तरफ चलती दिखाई दे रही कार के बोनट पर लेटकर कैमरे के लिए पोज देती महिला। क्या सार्वजनिक सड़क पर ऐसा प्रदर्शन कानून लागू करने वाली व्यवस्था को खुली चुनौती जैसा संदेश नहीं देता? सवाल किसी की खुशी या पहनावे का नहीं है। सवाल उस आचरण का है, जिसमें अपनी और दूसरों की सुरक्षा का जोखिम उठाकर सार्वजनिक रास्ते को रील बनाने का मंच बना दिया जाए। क्या सड़क पर मौजूद बाकी लोग किसी की रील के लिए अपनी सुरक्षा दांव पर लगाएं? क्या नियमों का पालन केवल उन्हीं को करना है जिनके पास राजनीतिक पहचान नहीं है?
रील के लिए जोखिम—कीमत कौन चुकाएगा?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क को उपलब्ध वीडियो में एक महिला कार के बोनट पर लेटी दिखाई देती है। वाहन आगे बढ़ता नजर आता है और अन्य महिलाएं भी उसके ऊपरी खुले हिस्से से बाहर निकली दिखती हैं। अचानक ब्रेक लगने, संतुलन बिगड़ने या सामने किसी राहगीर के आ जाने पर यह दृश्य गंभीर दुर्घटना में बदल सकता है। गिरते व्यक्ति को बचाने की कोशिश में चालक का नियंत्रण बिगड़ा तो आसपास के लोग भी खतरे में पड़ सकते हैं। रील बनाने का फैसला किसी का निजी हो सकता है; सार्वजनिक सड़क पर उससे पैदा खतरा निजी नहीं रहता।
क्या संदेश है—‘हम कानून से ऊपर हैं’?
‘हम कानून से ऊपर हैं’, ‘हमारा कौन बिगाड़ेगा?’—ये वीडियो में संबंधित व्यक्तियों के प्रमाणित कथन नहीं हैं। लेकिन ऐसे जोखिमपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई न हो तो जनता के बीच इसी तरह की छूट और प्रभाव का संदेश जाने का खतरा रहता है। यही वजह है कि पुलिस का स्पष्ट, निष्पक्ष और समय पर कदम जरूरी है। नियम तोड़ने वाले की पहचान चाहे जो हो, कार्रवाई का आधार उसका आचरण होना चाहिए। सड़क पर रसूख की परीक्षा नहीं, नियमों का पालन होना चाहिए। राजनीतिक परिचय किसी को दुर्घटना का जोखिम पैदा करने का विशेषाधिकार नहीं देता।
प्रशासन सुरक्षा संभाले—और सड़क पर यह तमाशा चले?
त्योहारों के दौरान पुलिस और प्रशासन को भीड़, पैदल यात्रियों, वाहनों और आयोजन स्थलों की व्यवस्था एक साथ संभालनी पड़ती है। नागरिकों से भी जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा है। ऐसे में बोनट पर लेटकर चलती गाड़ी में पोज देना उस व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालता है। जिस सड़क को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस तैनात हो, उसी सड़क पर जोखिमपूर्ण प्रदर्शन को सामान्य मनोरंजन बताकर नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है? कार धीमी होने का तर्क भी मूल सवाल नहीं मिटाता। बोनट यात्री सीट नहीं है और आसपास के राहगीर किसी की शूटिंग के सहायक कलाकार नहीं हैं।
कांग्रेस नेता की पत्नी होने का दावा—पहचान की पुष्टि जरूरी
वीडियो उपलब्ध कराने वाले का दावा है कि घटना रविशंकर शुक्ल नगर, कोरबा की है और बोनट पर दिखाई दे रही महिला कांग्रेस नेता राजेंद्र बरनवाल की पत्नी हैं। उन्हें पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का करीबी भी बताया गया है। इन पहचान और राजनीतिक संबंधों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। इन दावों के आधार पर किसी नेता की संलिप्तता या संरक्षण का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस संबंधित व्यक्तियों की पहचान और घटनाक्रम की पुष्टि करे तथा उनका पक्ष भी लिया जाए।
कानून स्पष्ट है—बोनट पर यात्रा प्रतिबंधित
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123(2) वाहन के बोनट, छत अथवा रनिंग बोर्ड पर यात्रा करने पर रोक लगाती है। धारा 123(1) चालक अथवा वाहन के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निर्धारित करती है। इसलिए जांच में बोनट पर मौजूद व्यक्ति के साथ चालक की भूमिका देखना भी जरूरी है। वास्तविक परिस्थितियों में ड्राइविंग जनता के लिए खतरनाक पाई जाए तो धारा 184 भी प्रासंगिक हो सकती है। लागू धाराओं का निर्णय पुलिस वीडियो, यातायात की स्थिति और अन्य साक्ष्यों के आधार पर करे।
कोरबा पुलिस संज्ञान ले—दुर्घटना का इंतजार क्यों?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पुलिस अधीक्षक, यातायात पुलिस और जिला प्रशासन से मांग करता है कि वीडियो की तारीख, स्थान और प्रामाणिकता की जांच की जाए। वाहन, वास्तविक चालक और संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कार्रवाई हो चुकी हो तो उसकी जानकारी सामने रखी जाए।सख्ती का अर्थ किसी को पहले से दोषी घोषित करना नहीं; साक्ष्य पर कार्रवाई करके यह स्पष्ट करना है कि सड़क सुरक्षा पर समझौता नहीं होगा। शहर के लोगों को सुरक्षित रास्ता चाहिए—ऐसा रास्ता जहां किसी की रील देखकर उन्हें अपनी जान बचाने के लिए किनारे न भागना पड़े। चंद सेकंड की वाहवाही के लिए सड़क पर खतरा पैदा करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई ही जवाब दे सकती है—कोरबा की सड़कों पर नियम चलेंगे या प्रभाव का भ्रम?
वीडियो में दिख रहे दृश्य सड़क सुरक्षा के गंभीर सवाल उठाते हैं। घटना की तारीख, स्थान, संबंधित व्यक्तियों की पहचान और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। संबंधित पक्ष का उत्तर प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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