वाह रे नगर निगम कोरबा! पौधे पहले, टेंडर बाद में—और Bid खुलने से पहले “Umesh Sir” का ट्रक सभागार में!

एक माह पहले आधे शहर में पौधरोपण; फिर 1 मिनट 47 सेकंड में 3,290 पौधों की दो GeM Bids—क्या प्रतियोगिता केवल कागजी तमाशा थी?
नर्सरी पर्ची पर “Umesh Sir”, वाहन CG04 RB 0409 आंध्र प्रदेश से कोरबा—न L1, न Award, न Work Order; फिर सरकारी परिसर में माल किस अफसर ने उतरवाया?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम कोरबा की पौधा खरीदी में उठाए गए ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के आरोपों को अब नया दस्तावेजी आधार मिला है। पहले शहर के बड़े हिस्से—स्थानीय दावों के अनुसार लगभग आधे शहर—में पौधे रोपे गए। इसके बाद 3 सितंबर 2026 को केवल एक मिनट 47 सेकंड के अंतर में पौधों की दो GeM Bids जारी हुईं। फिर Bid बंद होने से 16 दिन पहले, 8 सितंबर को आंध्र प्रदेश से पौधों का ट्रक निगम के पं. जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर में दिखाई दिया!
और नर्सरी पर्ची पर लिखा मिला—
“Sir: Umesh Sir”
अब सवाल निगम की फाइलों को चीर रहा है:
«क्या पौधे की जड़ जमीन में बाद में लगी, लेकिन ठेके की जड़ अधिकारियों और चहेते ठेकेदार के बीच पहले ही जमा दी गई थी?»
एक मिनट में दो टेंडर—क्या पूरी फिल्म पहले तैयार थी?
नगर निगम ने एक ही buyer login CORP.KORBA5 से दो Bids निकालीं:
– GEM/2026/B/7982716—3,070 पौधे
– GEM/2026/B/7983233—220 फलदार पौधे
दोनों की closing 24 सितंबर और opening 25 सितंबर निर्धारित थी। लेकिन 8 सितंबर को ही नर्सरी बिल, Freight Voucher और Way Bill बन चुके थे। यानी उस समय:
– Bid बंद नहीं हुई थी;
– technical evaluation नहीं हुआ था;
– financial bid नहीं खुली थी;
– L1 तय नहीं था;
– Contract Award नहीं हुआ था;
– सार्वजनिक Work Order नहीं था।
फिर किस भरोसे पर हजारों किलोमीटर दूर से पौधे कोरबा मंगवाए गए?
क्या भावी ठेकेदार को पहले से भरोसा था कि सरकारी मलाई की कटोरी उसी के सामने रखी जाएगी?
क्या GeM की प्रतियोगिता केवल उस निर्णय पर मुहर लगाने का नाटक थी, जो बंद कमरे में पहले ही लिखा जा चुका था?
पर्ची पर “Umesh Sir”—क्या ठेका खुलने से पहले ठेकेदार खुल गया?
आंध्र प्रदेश की Mahadeva Nursery & Gardens की 8 सितंबर की पर्ची पर हाथ से “Umesh Sir” लिखा दिखाई देता है। स्थानीय सूत्र इसे नगर निगम में पूर्व से ठेकेदारी करते आ रहे उमेश राठौर से जोड़ रहे हैं। पर्ची में पूरा नाम अथवा firm नहीं है, इसलिए अंतिम पहचान और GeM Bid से संबंध की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लेकिन निगम तथा उमेश राठौर को जवाब देना होगा:
– क्या पौधे उमेश राठौर ने मंगवाए?
– नर्सरी को order किसने दिया?
– Freight का ₹25,000 advance किसने चुकाया?
– transporter को शेष ₹51,250 कौन देने वाला था?
– क्या उमेश राठौर अथवा संबंधित फर्म दोनों Bids में शामिल होने वाली थी?
– क्या किसी निगम अधिकारी ने Work Order से पहले माल बुलाने का मौखिक भरोसा दिया था?
यदि “Umesh Sir” उमेश राठौर नहीं हैं तो असली व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक की जाए।
सभागार जनता का है या चहेते ठेकेदार का मुफ्त गोदाम?
वीडियो में पौधों से लदा वाहन CG04 RB 0409 पं. जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर में दिखाई देता है। इसी वाहन का नंबर Freight Voucher और Way Bill पर दर्ज है।
अब आयुक्त बताएं:
– ट्रक को परिसर में किसने घुसाया?
– gate register में entry कहां है?
– unloading का लिखित आदेश किसने दिया?
– पौधे किस कर्मचारी ने गिने?
– inward और stock register कहां हैं?
– सभागार को निजी माल रखने का गोदाम किस नियम से बनाया गया?
– ठेकेदार से storage charge लिया गया या सरकारी परिसर मुफ्त में परोस दिया गया?
यदि कोई आदेश नहीं था तो सुरक्षा और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
«क्या निगम सभागार पर नया बोर्ड लगवा दिया जाए—“चहेते ठेकेदारों के माल की मुफ्त पार्किंग और भंडारण सुविधा”?»
पौधों की प्रजातियां भी Bid से अलग—तीसरा खेल कौन-सा?
नर्सरी पर्ची में लगभग 650 पौधों के साथ Badam, Date Palm, Foxtail, Tabebuia, Plumeria और Washingtonia जैसे नाम पढ़े जा रहे हैं। लेकिन दोनों GeM Bids में नीम, अर्जुन, गुलमोहर, कचनार, चंपा, अमलतास, जामुन और केसर आम जैसी प्रजातियां हैं।
तो निगम बताए:
– पर्ची के अलग पौधे किस tender से खरीदे गए?
– तीसरा Purchase Order कहां है?
– क्या अलग प्रजाति को Bid वाली प्रजाति बताकर स्वीकार किया जाना था?
– क्या पौधों के नाम और मात्रा बाद में कागजों में समायोजित होने थे?
यदि माल दोनों Bids से अलग था तो आदेश दिखाइए। यदि उसी खरीदी से जुड़ा था तो species mismatch समझाइए। मशीनों वाली शर्तें—क्या चहेती फर्म के कागजों की नाप लेकर बनाई गईं?
दोनों पौधा Bids में:
– Factory Test Report;
– Testing–Commissioning;
– Capacity और Output;
– Efficiency Parameters;
– O&M Manual;
– Successful Operation और Handover जैसी शर्तें हैं।
क्या जामुन commission होगा?
क्या नीम का output test होगा?
क्या गुलमोहर की efficiency मापी जाएगी?
या मशीनरी की यह तकनीकी जहरीली बाड़ सामान्य नर्सरियों को बाहर रखने और किसी खास फर्म को अंदर पहुंचाने के लिए खड़ी की गई?
जब Bid खुलने से पहले ही पौधों का वाहन निगम परिसर में दिखाई दे, तब इसे केवल copy-paste की मूर्खता मानना भी मूर्खता होगी। पहले पौधरोपण, फिर खरीदी की नई भूख! नगर निगम वन विभाग के सहयोग से जुलाई–अगस्त में पौधरोपण करा चुका था। शहर के बड़े हिस्से में पौधे टेंडर से लगभग एक माह पहले लगाए जाने का दावा है।
फिर 3,290 अतिरिक्त पौधों की जरूरत किस सर्वेक्षण से निकली?
– पहले कितने पौधे लगाए गए?
– वन विभाग से कितने मुफ्त मिले?
– कितने जीवित हैं?
– कितने सूखे?
– नई आवश्यकता किस वार्ड से आई?
– स्थलवार plantation plan कहां है?
«क्या पहले पौधे लगाकर फोटो खिंचाई गई, फिर उन्हीं स्थानों के नाम पर नई खरीदी की फाइल उगाई गई और अब सरकारी रकम की फसल काटने की तैयारी है?»
करोड़ों की कथित पौधा खरीदी का पांच वर्षीय ऑडिट हो! ग्राम यात्रा मांग करता है कि पिछले पांच वर्षों की पौधा खरीदी, plantation, watering, tree guards और maintenance का संयुक्त audit कराया जाए।
तत्काल सुरक्षित हों:
– दोनों GeM Bids का audit trail;
– CORP.KORBA5 login और IP records;
– 8 सितंबर का सभागार CCTV;
– gate register;
– vehicle entry;
– नर्सरी का मूल GST invoice;
– e-way bill;
– Freight payment;
– ठेकेदार का bank/UPI trail;
– inward और stock register;
– पुराने पौधरोपण की geotagged सूची;
– वन विभाग से मिले मुफ्त पौधों का रिकॉर्ड;
– सभी bidders और उनके वास्तविक लाभार्थियों का विवरण।
आयुक्त महोदय, पौधे की हरियाली से फाइलों की कालिख नहीं छिपेगी! यह अभी अंतिम रूप से सिद्ध नहीं है कि ठेका उमेश राठौर को ही मिलना था। लेकिन परिस्थितियां निगम के दामन पर गंभीर सवालों की कालिख पोत रही हैं:
– पौधरोपण पहले;
– टेंडर बाद में;
– एक मिनट में दो Bids;
– पर्ची पर “Umesh Sir”;
– Bid बंद होने से पहले माल;
– वही वाहन निगम सभागार में;
– और Work Order गायब!
«वाह भाई वाह! ठेका पैदा भी नहीं हुआ था, लेकिन कथित ठेकेदार का पौधा निगम की गोद में खेलता मिला—यह संयोग है या भ्रष्टाचार की पूरी पटकथा का ट्रेलर?»
यदि सब कुछ पाक-साफ है तो निगम आज ही Purchase Order, gate register, CCTV, invoice और stock entry सार्वजनिक करे। और यदि रिकॉर्ड नहीं हैं, तो सरकारी परिसर में निजी माल उतरवाने वाले अधिकारी तथा पौधा खरीदी की कथित पूर्वनियोजित पटकथा तैयार करने वालों पर EOW/ACB जांच कराई जाए।
«नगर निगम का सभागार जनता की संपत्ति है—किसी अधिकारी की जागीर और किसी चहेते ठेकेदार की मुफ्त गोदामशाला नहीं!»
ग्राम यात्रा की जांच जारी है—अगले खुलासे में “Umesh Sir”, GeM bidder, Freight payment और निगम अधिकारियों के डिजिटल निशानों का होगा नामवार विस्फोट।
संपादक—अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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