कुचेना की सांसों पर कोयले का कारोबार: ACB के निर्माण की रफ्तार तेज, जवाबदेही किस सरकारी मेज पर अटकी?

वाशरी के स्थापना-सहमति आवेदन खारिज, साइडिंग को अलग सहमति—जमीन, वर्तमान अनुमति और ग्रामीणों की सुरक्षा पर स्वतंत्र जांच जरूरी; सत्यापन तक विवादित निर्माण रोकने की मांग
कोरबा। कोयले का कारोबार आगे बढ़े और उसके पड़ोस में बसे गांव के हिस्से धूल, भारी वाहन और सुरक्षा की चिंता आए—क्या यही विकास का सरकारी हिसाब है? कुचेना में ACB की वाशरी और रेलवे साइडिंग से जुड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड ऐसे सवाल खड़े करते हैं, जिनका जवाब कंपनी के साथ जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ सरकार और SECL को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए। कारोबार की सुविधा के लिए फाइलें चल सकती हैं, तो कुचेना के लोगों की सुरक्षा के लिए संयुक्त जांच क्यों नहीं? किसी अनुमति की मौजूदगी सवालों को समाप्त नहीं करती। अनुमति किस काम की है, किस जमीन पर लागू है और उसकी शर्तें मौके पर पूरी हैं या नहीं—असली जवाबदेही यहां से शुरू होती है।
मंजूरी का इतिहास है, लेकिन वर्तमान निर्माण का हिसाब कहां है?
राज्यसभा के सरकारी रिकॉर्ड में ACB की 5 MTPA कुचेना वाशरी को 9 फरवरी 2015 को पर्यावरणीय मंजूरी मिलने का उल्लेख है। इसलिए परियोजना को कभी मंजूरी न मिलने का दावा सही नहीं होगा। लेकिन उस पुरानी मंजूरी की वर्तमान स्थिति, संशोधन और आज के निर्माण से संबंध स्पष्ट होना चाहिए।
दूसरी ओर, सरकारी OCMMS रजिस्टर में इसी नाम की वाशरी के स्थापना-सहमति आवेदन 29 जून 2019 और 3 जून 2024 को खारिज दर्ज हैं। क्यों खारिज हुए? उसके बाद क्या नया आदेश आया? आज किस स्वीकृति के आधार पर काम हो रहा है? संबंधित अस्वीकृति आदेश और बाद की अनुमति सामने आए बिना ये सवाल बने रहेंगे। वाशरी और साइडिंग अलग गतिविधियां हैं। एक की सहमति को दूसरे के लिए सर्वाधिकार-पत्र की तरह पेश नहीं किया जा सकता।
साइडिंग को सहमति मिली—शर्तों का पालन किसने जांचा?
कुचेना रेलवे साइडिंग के लिए जुलाई 2023 का CECB सहमति पत्र उपलब्ध है। इसमें धुले कोयले की चार लाख टन और रिजेक्ट कोयले की 75 हजार टन प्रतिवर्ष लोडिंग–अनलोडिंग का उल्लेख है। धूल नियंत्रण के लिए जल-छिड़काव, पक्की आंतरिक सड़कें, कोयला ढेर की अधिकतम पांच मीटर ऊंचाई और न्यूनतम छह मीटर विंड-प्रोटेक्शन दीवार जैसी शर्तें भी हैं। कागज की दीवार गांव की धूल नहीं रोकती। प्रशासन बताए कि निरीक्षण कब हुआ, क्या पाया गया और वर्तमान निर्माण तथा प्रस्तावित संचालन को किन शर्तों के अधीन रखा गया है।
SECL की जमीन: आरोप से आगे बढ़कर खसरा-दर-खसरा जांच हो
दिसंबर 2014 की पर्यावरण विशेषज्ञ समिति की कार्यवाही में कुसमुंडा खदान से वाशरी तक कन्वेयर के लिए SECL की भूमि इस्तेमाल करने की अनुमति न मिलने का उल्लेख है। उसके बाद सड़क परिवहन की व्यवस्था पर विचार हुआ था।
यह रिकॉर्ड पूरी साइडिंग को SECL की जमीन पर साबित नहीं करता। लेकिन SECL से भूमि संबंधी स्पष्ट जवाब मांगने का पर्याप्त आधार देता है। वर्तमान निर्माण के खसरों को अधिग्रहण अधिसूचनाओं, राजस्व नक्शे और माइन प्लान से मिलाया जाए। निजी उपयोग का अधिकार दिया गया है तो उसका सक्षम आदेश सार्वजनिक हो। सरकारी जमीन का सवाल उठे और जवाब में केवल चुप्पी मिले—यह प्रशासनिक पारदर्शिता का स्वीकार्य विकल्प नहीं है।
कुचेना के लोग कारोबार की कीमत क्यों चुकाएं?
फरवरी 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट में कुचेना सहित आबादी वाले मार्गों पर भारी वाहनों, कोयला धूल और दुर्घटना की आशंका को लेकर रोक लगाने की मांग प्रकाशित हुई थी। यह व्यापक परिवहन समस्या का उल्लेख है; इसे अकेले ACB की वर्तमान परियोजना का दोष नहीं माना जा सकता। फिर भी यह चेतावनी अनदेखी करने योग्य नहीं है। रेलवे साइडिंग के पर्यावरणीय दिशानिर्देश भी आवासीय क्षेत्रों और स्कूलों से दूरी तथा धूल नियंत्रण की सिफारिश करते हैं। कुचेना में निकटतम घरों, स्कूलों और सार्वजनिक रास्तों की दूरी का प्रमाणित नक्शा कहां है? गांव की हवा, पानी और रात के शोर का आकलन किसने किया?
यदि निजी स्थायी संरचनाएं खदान के ब्लास्टिंग खतरा क्षेत्र में आती हैं, तो संबंधित खान-सुरक्षा प्रावधानों के तहत वैज्ञानिक अध्ययन और लिखित अनुमति की जांच भी आवश्यक होगी। स्थल की वास्तविक दूरी अभी प्रमाणित नहीं है।
विशेष कंपनी को सुविधा, जनता के सवालों को प्रतीक्षा?
क्या विभिन्न अनुमतियों और भूमि व्यवस्थाओं में किसी विशेष कंपनी को अनुचित लाभ मिला?
क्या आपत्तियों पर निर्णय टाले गए?
उपलब्ध रिकॉर्ड इन आशंकाओं को सिद्ध नहीं करते। इन्हें स्वतंत्र जांच में परखा जाना चाहिए। प्रशासन का उत्तर आदेशों, निरीक्षण रिपोर्टों और सीमांकन से आए—मौखिक आश्वासन से नहीं।
ग्राम यात्रा की संपादकीय मांग है कि राजस्व विभाग, CECB, DGMS, रेलवे और SECL के रिकॉर्ड की स्वतंत्र संयुक्त जांच हो। वर्तमान अनुमतियों, जमीन के अधिकार और सुरक्षा का सत्यापन होने तक विवादित निर्माण पर अंतरिम रोक लगाने का कारणयुक्त निर्णय लिया जाए। जहां उल्लंघन मिले, वहां सक्षम प्राधिकारी तत्काल रोक और सुधारात्मक कार्रवाई करे। कोयला देश की संपदा है; कुचेना के लोगों की सांसें भी किसी कारोबारी सुविधा से कम मूल्यवान नहीं। सरकार बताए—निर्माण की निगरानी हो रही है, या जनता से केवल भरोसा रखने की अपेक्षा है?
यह रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित सवाल उठाती है। वर्तमान स्थल के सभी अधिकार, अनुमतियां और अनुपालन प्रमाणित नहीं हुए हैं; कंपनी अथवा अधिकारियों की मिलीभगत या कोयला चोरी का निष्कर्ष स्थापित नहीं है। संबंधित पक्षों का दस्तावेज सहित जवाब इस पड़ताल को आगे स्पष्ट करेगा।
संपादक—अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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