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बालको और इंटक की आंख में किरकिरी, पर मजदूर भाइयों में आजादी की उम्मीद बना आईडी एक्ट, इनकी चालाकी पर भारी पड़ सकते हैं अन्य ट्रेड यूनियन

कोरबा। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने औद्योगिक जगत में पुनः श्रमिक राज लाते हुए आईडी एक्ट लागू कर दिया है। प्रदेश के उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की पहल पर लाए गए आईडी एक्ट को जहां इंटक के सताए मजदूर भाई अपनी आजादी की उम्मीद मान रहे हैं, वेदांता समूह की कंपनी बालको के लिए यह आंखों की किरकिरी बन चुका है। दरअसल आगामी दिनों में बालको द्वारा कर्मचारियों के 5 वर्षीय वेतन समझौते में धारा 420 जैसे गंभीर अपराध में जमानत पर रिहा इंटक यूनियन के संजय सिंह व जयप्रकाश यादव प्रबंधन की शह पर हस्ताक्षर करने की फिराक में हैं। प्रबंधन के रवैए से भी लग रहा है कि वह 420 के जमानती लोगों से ही वेतन समझौता करने के मूड में है। पर आईडी एक्ट लागू होने से सीटू, एचएमएस, नाम्स, वाम्स, एटक, एआईसीटीयू, बीएमएस जैसे ट्रेड यूनियन श्रमिक बंधुओं की शक्ति बनने को तत्पर हैं, जो बालको प्रबंधन और इंटक की चालाकी पर भारी पड़ सकते हैं।

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उद्योग जगत के जानकारों की मानें तो बालको में होने जा रहे कर्मचारियों के 5 वर्षीय वेतन समझौते में एक बड़ी घटना होने जा रही है। ऐसे नए और ट्रैक से हटकर प्रयोग करने में बालको हमेशा से मनमानी करता रहा है। लिहाजा यह भी कोई नई बात नहीं होगी कि बालको की शह पर धारा 420 जैसे गंभीर अपराध में जमानत पर रिहा इंटक यूनियन के संजय सिंह और जयप्रकाश यादव अप्रैल में होने जा रहे 5 वर्षीय वेतन समझौते में हस्ताक्षर करने को आतुर दिख रहे हैं। प्रबंधन के रवैए से भी लग रहा है कि वह 420 के जमानती लोगों से ही वेतन समझौता करने के मूड में है। पर इस बार यह सब इतना आसान नहीं होगा। कुछ ही दिन पहले आईडी एक्ट छत्तीसगढ़ के सभी उद्योगों में लागू हो चुका है। बालको में इंटक के अलावा सीटू, एचएमएस, नाम्स, वाम्स, एटक, एआईसीटीयू, बीएमएस जैसे ट्रेड यूनियन हैं। शासन द्वारा आईडी एक्ट लाए जाने पर सभी यूनियन वार्ता के लिए स्वतंत्र है। किसी भी कर्मचारी, मजदूर की सदस्यता रसीद अब कहीं भी काटी जा सकती है। किसी भी तरह से उनको प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। सभी कर्मचारी, मजदूर बिना किसी डर के अपनी सदस्यता मनचाहे यूनियन में ले सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रबंधन क्या धारा 420 के जमानती इंटक नेताओ से कर्मचारियों के वेतन समझौते पर हस्ताक्षर करवाता है या सभी यूनियन से चर्चा करते हुए कर्मचारियों के महत्वपूर्ण वेतन समझौते पर समानता के अधिकार को तवज्जो देता है।


चेक ऑफ सिस्टम से सदस्यता को मजबूर, इंकार नहीं कर पा रहे मजदूर
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वर्तमान में इंटक की सदस्यता अधिक है। क्योंकि चेक ऑफ सिस्टम से कर्मचारियों का सदस्यता काटी जाती है, कर्मचारी न चाहते हुए भी प्रबंधन को मना नहीं कर पा रहे और कह नहीं पा रहे कि उनकी सदस्यता चेक ऑफ सिस्टम से इंटक के खाते में न डाली जाए। जब श्रमिक नेताओं ने इसका कारण जानना चाहा तो कुछ कर्मचारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इंटक के नेता प्रबंधन से बोलकर उनको प्रताड़ित करवा सकते हैं, लेकिन बाकी यूनियन के नेताओं से वार्ता करने पर उन्होंने आश्वस्त किया कि आईआर एक्ट में इंटक यूनियन को अवश्य ही प्रबंधन से वार्ता करने का एकाधिकार, जिससे कर्मचारियों को प्रताड़ित होने का भय बना रहता था।
श्रम-उद्योग मंत्री लखन हैं सीएसआईडीसीएल के अध्यक्ष

प्रदेश के श्रम एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन को छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रीयल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड (सीएसआईडीसीएल) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पूर्व की कांग्रेस सरकार में
औद्योगिक विवाद अधिनियम (आईडी एक्ट) विलोपित कर दिया था। इसके साथ ही शुरू विवादित रहे औद्योगिक संबंध अधिनियम (आईआर एक्ट) को लागू कर दिया गया, जिसे श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की पहल पर विष्णुदेव सरकार ने विलोपित कर आईडी एक्ट पुनः लागू कर दिया गया है। प्रदेश में आईडी एक्ट लागू होने के साथ ही मनमानियों और तानाशाही के साथ वर्चस्व की लड़ाई में बिखरते संगठन इंटक की मान्यता भी समाप्त हो गई है। इससे उद्योग जगत और श्रमिकों के हक के लिए आवाज बुलंद करने वाले संगठनों में हर्ष की लहर है।
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