शराब दुकान का फीता, भाषण और राजनीति: क्या छत्तीसगढ़ में यही नया विकास मॉडल है? भाजपा नेत्री का अजीबोगरीब भाषण, अब क्या कहेंगे छत्तीसगढ़ की सरकार और आबकारी विभाग?

रायपुर/राजनांदगांव।
इस विकसित छत्तीसगढ़ कहा जाए या की जाए आलोचना?
जिस राज्य में युवा रोजगार, शिक्षा और नशामुक्ति की उम्मीद कर रहे हैं, वहां शराब दुकान के उद्घाटन पर नेताओं की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में शायद पहली बार ऐसा दृश्य सामने आया है, जब किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कथित रूप से शराब दुकान का फीता काटकर शुभारंभ किए जाने और उसके समर्थन में भाषण देने का मामला चर्चा का विषय बन गया है।
आमतौर पर नेता स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल, सामुदायिक भवन या जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्घाटन करते दिखाई देते हैं। लेकिन यदि शराब दुकान का उद्घाटन भी अब सार्वजनिक गौरव का विषय बनने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को दिया जा रहा एक संदेश भी माना जाएगा।
सवाल सरकार से भी, नेताओं से भी
क्या अब विकास की परिभाषा बदल गई है?
क्या छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोजगार, उद्योग, खेल मैदान और पुस्तकालयों की जगह शराब दुकानों के उद्घाटन का संदेश दिया जा रहा है?
क्या जनप्रतिनिधियों का दायित्व नशामुक्त समाज की दिशा में काम करना है या फिर शराब बिक्री को सामाजिक स्वीकृति दिलाना?
क्या यह युवाओं के लिए सही संदेश है?
आज जब नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर समाज चिंतित है, परिवार टूट रहे हैं, सड़क हादसे बढ़ रहे हैं और युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, ऐसे समय में यदि राजनीतिक मंचों से शराब दुकानों के उद्घाटन को उत्सव की तरह प्रस्तुत किया जाए, तो इसका सामाजिक प्रभाव क्या होगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि जनप्रतिनिधि समाज के रोल मॉडल होते हैं। उनके प्रत्येक सार्वजनिक कदम का असर युवाओं और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।
सत्ता बदल गई, सोच भी बदल गई क्या?
विपक्ष में रहते हुए शराब नीति को लेकर बड़े-बड़े सवाल उठाने वाले नेता आज यदि शराब दुकानों के उद्घाटन मंच पर दिखाई दें, तो जनता यह पूछने का अधिकार रखती है कि आखिर बदला क्या है?
क्या सत्ता में आने के बाद सिद्धांत बदल जाते हैं?
क्या राजनीतिक दलों के लिए शराब केवल विपक्ष में मुद्दा और सत्ता में राजस्व का साधन बन जाती है?
जनता पूछ रही है…
- क्या किसी जनप्रतिनिधि को शराब दुकान के उद्घाटन में शामिल होना चाहिए?
- क्या यह नशामुक्त समाज की अवधारणा के विपरीत नहीं है?
- क्या सरकार युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की जगह गलत संदेश नहीं दे रही?
- क्या कल को शराब बिक्री बढ़ाने के लिए भी राजनीतिक अभियान चलेंगे?
छत्तीसगढ़ की जनता और विशेषकर युवा वर्ग आज इन सवालों के जवाब चाहता है। क्योंकि सरकारें केवल कानून से नहीं, बल्कि अपने आचरण और संदेशों से भी समाज का भविष्य तय करती हैं।
नोट: स्रोत – भिलाई टाइम्स
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