एक पंप को नोटिस, शिवम की जमीन का हिसाब कब? मूल मालिक की बची 34 डिसमिल पर भी कब्जे का आरोप

भैरोताल स्थित शिवम सर्विस स्टेशन की अनुमति और वास्तविक परिसर के मिलान की मांग; 2022 में विस्तार का आवेदन, विभागीय पत्र में संशोधन की शक्ति संचालक के पास होने का उल्लेख—अंतिम मंजूरी कहां है?
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। पेट्रोल पंप की अनुमति वाली फाइल में कई विभागों की अनापत्तियां हैं। लेकिन हर अनापत्ति के साथ शर्तें भी हैं। अब सवाल यह है कि शिवम सर्विस स्टेशन का वर्तमान परिसर उन्हीं स्वीकृत सीमाओं के भीतर है, या कागजों की सीमा और जमीन पर इस्तेमाल की सीमा अलग-अलग हैं?
कोरबा सर्विस स्टेशन के मामले में SECL का बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस सामने आने के बाद भैरोताल, कुसमुंडा–बांकीमोगरा मार्ग स्थित शिवम सर्विस स्टेशन की जमीन से जुड़े सवालों पर भी स्पष्ट जवाब जरूरी है।
इसके साथ अब नया आरोप सामने रखा गया है कि जिस मूल भूस्वामी से पंप के लिए जमीन खरीदी गई, उसकी बची हुई लगभग 34 डिसमिल जमीन पर भी पंप संचालक ने अवैध कब्जा कर लिया है। इस आरोप की पुष्टि विक्रय विलेख, शेष भूमि के स्वामित्व रिकॉर्ड और मौके के संयुक्त सीमांकन से की जानी बाकी है।
यदि आरोप सही है तो खरीदी गई जमीन की सीमा से कारोबार बाहर कैसे पहुंचा? यदि आरोप गलत है तो सीमांकन कर स्थिति स्पष्ट करने में देरी क्यों?
अनापत्ति की मुहरें हैं—शर्तों के पालन का प्रमाण कहां है?
उपलब्ध दस्तावेजों में 12 सितंबर 2019 का जिला प्रशासन का अनापत्ति प्रमाणपत्र दिखाई देता है। इसमें नगर तथा ग्राम निवेश की शर्तों का पालन और लोक निर्माण विभाग के पत्र के अनुसार मार्ग के मध्य से दोनों ओर निर्धारित दूरी छोड़ने का उल्लेख है। नगर निगम के 28 जून 2019 के पत्र में भी शर्तों के अधीन अनापत्ति दी गई है। इसी पत्र में स्पष्ट लिखा है कि पेट्रोल पंप के लिए भवन निर्माण की अनुमति अलग से लेनी होगी।
यानी फाइल में अनापत्ति होना और हर आवश्यक अनुमति तथा उसकी शर्त का पालन होना अलग-अलग बातें हैं।
प्रशासन बताए—भवन अनुमति, स्वीकृत नक्शा और वर्तमान निर्माण का आखिरी बार मिलान कब किया गया?
2022 में विस्तार मांगा गया—आगे क्या हुआ?
HPCL के 14 फरवरी 2022 के पत्र में शिवम सर्विस स्टेशन पर बिक्री और आवागमन की सुविधा के लिए अतिरिक्त भूमि शामिल करने तथा संशोधित ले-आउट पर अनापत्ति देने का अनुरोध है। पत्र में पहले के 30×30 मीटर आयाम और प्रस्तावित 30×45 मीटर आयाम का उल्लेख मिलता है।
इसके जवाब में नगर तथा ग्राम निवेश के 31 मार्च 2022 के पत्र में कहा गया कि पूर्व जारी विकास अनुज्ञा में संशोधन की शक्तियां संचालक में निहित हैं और क्षेत्रीय कार्यालय से संशोधन संभव नहीं है। जिला प्रशासन के 6 मई 2022 के पत्र में यही स्थिति HPCL को सूचित की गई। इस पत्राचार से विस्तार का आवेदन साबित होता है; विस्तार की अंतिम स्वीकृति अपने-आप साबित नहीं होती।
अब संबंधित पक्ष और विभाग स्पष्ट करें—क्या बाद में सक्षम अधिकारी से संशोधित विकास अनुज्ञा मिली? क्या संशोधित जिला अनापत्ति और संबंधित अनुमोदित साइट प्लान उपलब्ध हैं? वर्तमान परिसर मूल स्वीकृति के अनुरूप है या किसी बाद की मंजूरी के अनुसार?
आवेदन को अनुमति और पत्राचार को अंतिम मंजूरी मान लेने से जमीन की सीमा नहीं बदल जाती।
34 डिसमिल का आरोप: फैसला फीते और रिकॉर्ड से हो
मूल मालिक की बची हुई लगभग 34 डिसमिल भूमि पर कथित कब्जे का आरोप मामले को नया आयाम देता है। यह करीब 1,376 वर्गमीटर भूमि होती है। लेकिन पहले यह निर्धारित होना जरूरी है कि यह भूमि किस खसरे में है, किसके नाम दर्ज है और कथित कब्जा किस हिस्से पर बताया जा रहा है।
विक्रय विलेख की चौहद्दी, नामांतरण, बटांकन और शेष रकबे का मिलान किया जाए। संबंधित भूस्वामी तथा पंप पक्ष की उपस्थिति में सीमांकन हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। कागज में खरीदा कितना, मौके पर इस्तेमाल कितना—इसका उत्तर अनुमान से नहीं, माप से मिलेगा।
इस आरोप को अनुमति और डायवर्सन के क्षेत्रफल संबंधी पुराने सवालों के साथ बिना जांच जोड़कर एक ही जमीन नहीं माना जा सकता। हर हिस्से का अलग स्वामित्व और अलग सीमा स्पष्ट करनी होगी।
SECL का अपना पत्र भी पढ़ना होगा
25 मई 2019 के SECL पत्र में लिखा है कि ग्राम भैरोताल, SECL कुसमुंडा क्षेत्र के अंतर्गत अर्जित ग्राम नहीं है। यह दस्तावेज जमीन को बिना अतिरिक्त प्रमाण SECL की घोषित करने से रोकता है। यदि इसके विपरीत संबंधित खसरे अथवा उससे लगी भूमि के अर्जित होने का दावा है तो अधिग्रहण अधिसूचना, पुराने–नए खसरे का मिलान, अवार्ड और कब्जा अभिलेख सामने आने चाहिए।
SECL से सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन उसके रिकॉर्ड में दर्ज उत्तर को छिपाकर नहीं। प्रबंधन स्पष्ट करे कि 2019 का उत्तर किन अभिलेखों पर आधारित था और क्या वर्तमान परिसर से लगी किसी भूमि पर उसका अधिकार बनता है।
कोरबा सर्विस स्टेशन और शिवम सर्विस स्टेशन की भूमि की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। एक पर नोटिस जारी होना दूसरे पर उसी कार्रवाई का स्वतः आधार नहीं है। समान अपेक्षा इतनी है कि दोनों मामलों में रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष निर्णय हो।
वन विभाग की अनापत्ति भी शर्त के साथ
वन विभाग के उपलब्ध 2019 के पत्र में भूमि को राजस्व भूमि बताया गया है। साथ ही अनापत्ति को इस शर्त से जोड़ा गया है कि संबंधित भूमि 1980 से पूर्व वनभूमि न रही हो। इसलिए पुरानी भूमि-प्रविष्टियों पर सवाल उठने की स्थिति में मूल मिसल, पुराने खसरे और वन रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। उपलब्ध अनापत्ति को नजरअंदाज करना भी गलत होगा और उसकी शर्त का परीक्षण किए बिना उसे हर विवाद का अंतिम उत्तर मानना भी।
पुराने रिकॉर्ड पर दावा है तो प्रमाण सामने आए; विभागों ने परीक्षण किया है तो उसका आधार सामने आए।
क्षेत्रफल में भी स्पष्टता चाहिए
विकास अनुज्ञा और नगर निगम के उपलब्ध पत्र में 0.252 हेक्टेयर के साथ 2,521 वर्गमीटर लिखा दिखाई देता है, जबकि गणितीय रूपांतरण में 0.252 हेक्टेयर 2,520 वर्गमीटर होता है। यह एक वर्गमीटर का अंतर अपने-आप बड़े कब्जे का प्रमाण नहीं है। इसे मूल नक्शे और आदेश से स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसी तरह पूर्व में उठाए गए डायवर्सन क्षेत्रफल के सवाल पर संबंधित मूल आदेश का मिलान जरूरी है।
खबर की ताकत बड़े आरोप में नहीं, सही माप और सही दस्तावेज में है।
कलेक्टर संयुक्त सीमांकन कराएं—SECL और HPCL अपना रिकॉर्ड खोलें
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मांग करता है कि राजस्व विभाग संबंधित पक्षों की उपस्थिति में वर्तमान परिसर का संयुक्त सीमांकन कराए। स्वामित्व, खरीदी गई जमीन, मूल मालिक की कथित शेष भूमि, सड़क की सीमा और आसपास के जलनिकास का नक्शे से मिलान हो। नगर तथा ग्राम निवेश, नगर निगम और संबंधित पेट्रोलियम प्राधिकार अपने स्वीकृत नक्शों तथा बाद के संशोधनों की स्थिति स्पष्ट करें। HPCL विस्तार आवेदन के बाद प्राप्त अंतिम अनुमतियां सामने रखे। SECL अपने अधिकार से संबंधित अभिलेखों का खसरा-विशिष्ट उत्तर दे।
नोटिस जहां जरूरी हो वहां निकले, और आरोप जहां गलत हों वहां रिकॉर्ड से खारिज हों। लेकिन सवालों को अनिश्चितता में छोड़ देना प्रशासनिक जवाब नहीं है।
शिवम सर्विस स्टेशन की जमीन पर फैसला सुर्खियों से नहीं होगा—विक्रय विलेख, स्वीकृत नक्शे और मौके की नाप से होगा। अब विभाग बताएं: संयुक्त जांच कब और सार्वजनिक जवाब कब?
रिपोर्ट उपलब्ध पठनीय दस्तावेजों तथा लगभग 34 डिसमिल शेष भूमि पर कब्जे संबंधी दी गई सूचना पर आधारित है। कथित कब्जे की स्वतंत्र पुष्टि, वर्तमान सीमांकन और बाद में जारी अनुमतियों का सत्यापन शेष है। संबंधित भूस्वामी, पंप संचालक, HPCL और विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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