बालको की चिमनी पर हथौड़ा, निगम की निगरानी कहां? अनुमति दिखाइए, आयुक्त महोदय!

पॉट लाइन की FTP चिमनी बिना वैध अनुमति तोड़े जाने का आरोप—पूर्व में अनुमति से इनकार के बावजूद डिस्मेंटलिंग की शिकायत पर क्या हुआ? कलेक्टर तत्काल जांच कराएं; निगम बताए, मंजूरी दी या नियमों की अनदेखी हो रही है?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क क्या कोरबा में नियमों की सख्ती सिर्फ आम आदमी के लिए है? क्या बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के सामने अनुमति, निरीक्षण और कार्रवाई की सरकारी व्यवस्था सवालों में घिर जाती है? बालको–वेदांता की पॉट लाइन की FTP चिमनी को कथित तौर पर बिना वैध अनुमति डिस्मेंटल किए जाने की सूचना ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली और नगर निगम की निगरानी—दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि चिमनी तोड़ने का कार्य आवश्यक वैध अनुमति के बिना किया जा रहा है। इसकी पुष्टि संबंधित अभिलेखों और तत्काल स्थल निरीक्षण से होनी है। लेकिन प्रशासन यह तय करने के लिए चिमनी पूरी तरह हटने का इंतजार क्यों करे कि काम नियमानुसार था या नहीं? यह ऐसा कार्य है जिसे पूरा हो जाने के बाद कागजों पर हुई बहस से वापस नहीं किया जा सकता। इसलिए अनुमति और सुरक्षा की जांच भी तत्काल होनी चाहिए। उद्योग चलाने की ताकत, नियमों को अपनी सुविधा से चलाने का अधिकार नहीं देती।
पहले इनकार हुआ था तो उसके बाद क्या हुआ?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने पूर्व में भी चिमनी डिस्मेंटलिंग और अनुमति का मुद्दा उठाया था। संपादकीय पक्ष के अनुसार, तत्कालीन नगर निगम आयुक्त महोदया ने अनुमति देने से इनकार किया था, फिर भी डिस्मेंटलिंग किए जाने की शिकायत सामने आई थी। यदि यह आरोप सही है तो सवाल केवल बालको से नहीं, उस प्रशासनिक व्यवस्था से भी है जिसने अपने निर्णय का पालन सुनिश्चित नहीं कराया। पूर्व आवेदन कहां है? अनुमति से इनकार का आदेश क्या था? उसके बाद कोई संशोधित स्वीकृति जारी हुई थी या नहीं? निरीक्षण और कार्रवाई का रिकॉर्ड कहां है?
सरकारी इनकार का अर्थ क्या केवल फाइल में एक टिप्पणी है? यदि उसके बावजूद कार्य हुआ, तो जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
पुराने मामले का हिसाब सामने आए बिना वर्तमान शिकायत को सामान्य औद्योगिक गतिविधि बताकर किनारे नहीं किया जा सकता। आयुक्त महोदय, जवाब अनुमति के दस्तावेज से दीजिए नगर निगम कोरबा के आयुक्त से सवाल बिल्कुल स्पष्ट है—क्या संबंधित FTP चिमनी को डिस्मेंटल करने की अनुमति दी गई है? यदि दी गई है, तो उसका क्रमांक, तारीख, स्वीकृत कार्य का विवरण और शर्तें सार्वजनिक कीजिए। यह भी बताइए कि शर्तों के पालन की जांच किस अधिकारी ने की और कब की। यदि इस कार्य के लिए निगम की अनुमति आवश्यक नहीं है, तो उसका नियमगत आधार और संबंधित सक्षम प्राधिकारी का विवरण स्पष्ट कीजिए। और यदि आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, तो निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई में विलंब किस बात का? जनता को अस्पष्ट आश्वासन नहीं, स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय चाहिए। अनुमति है तो प्रमाण दीजिए; उल्लंघन है तो कार्रवाई कीजिए।
निगम का अधिकार कागजों तक सीमित है क्या?
नगर निगम की भूमिका केवल आवेदन लेने और पत्र भेजने तक सीमित नहीं हो सकती। जहां उसके अधिकार क्षेत्र का प्रश्न उठता है, वहां उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। आम नागरिक से अनुमति का कागज मांगने वाली व्यवस्था बड़े प्रतिष्ठान से वही दस्तावेज मांगने में संकोच क्यों करे? यहां किसी कंपनी के आकार या प्रभाव का प्रश्न नहीं है। प्रश्न है कि प्रशासनिक मानक समान रूप से लागू हो रहे हैं या नहीं। बालको प्रबंधन को भी यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित कार्य के लिए कौन-कौन सी स्वीकृतियां लागू हैं और उनमें से कौन-सी प्राप्त की गई हैं।
सुरक्षा का हिसाब हादसे के बाद नहीं मांगा जाए
चिमनी डिस्मेंटलिंग के आरोप की जांच केवल अनुमति तक सीमित रखना भी अधूरा होगा। कार्य की तकनीकी योजना, ठेका एजेंसी की क्षमता, श्रमिकों की सुरक्षा, आसपास सुरक्षित दूरी और मलबा नियंत्रण की व्यवस्था का परीक्षण जरूरी है। चिमनी किस विधि से हटाई जा रही है? तकनीकी निगरानी किसकी है? जोखिम आकलन और आपातकालीन योजना कहां है? इन सवालों का जवाब कार्य शुरू होने से पहले तैयार होना चाहिए। प्रशासन को मौके पर जाकर देखना होगा कि दस्तावेजों में लिखी व्यवस्था जमीन पर मौजूद भी है या नहीं। सुरक्षा की कमी मिले तो सुधार और रोकथाम अभी हो—दुर्घटना के बाद जिम्मेदार खोजने की कवायद जनता स्वीकार क्यों करे?
कलेक्टर हस्तक्षेप करें—मौके और फाइल, दोनों की जांच हो
जिला प्रशासन को तत्काल संयुक्त निरीक्षण कराकर संबंधित चिमनी की पहचान, वर्तमान स्थिति, कार्य कराने वाली एजेंसी और उपलब्ध स्वीकृतियों का रिकॉर्ड तैयार कराना चाहिए। नगर निगम, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग और पर्यावरण संरक्षण मंडल सहित संबंधित सक्षम विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जांच करें। पूर्व अनुमति आवेदन, कथित अस्वीकृति और उसके बाद के आदेश भी सामने लाए जाएं। यदि आवश्यक अनुमति या पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना कार्य होता मिले, तो उसे तत्काल रुकवाकर जिम्मेदारी तय की जाए। केवल ठेकेदार से जवाब मांगकर प्रबंधन की भूमिका को जांच से बाहर नहीं रखा जा सकता।
बालको बताए—किस मंजूरी पर चल रहा काम?
बालको–वेदांता प्रबंधन के लिए स्थिति स्पष्ट करने का रास्ता सीधा है: संबंधित स्वीकृतियां, तकनीकी आधार और सुरक्षा व्यवस्था सामने रखे। कारखाने की चारदीवारी के भीतर होने वाला कार्य भी लागू नियमों और सक्षम अधिकारियों की निगरानी से बाहर नहीं हो जाता। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मांग है कि वर्तमान शिकायत और पूर्व अनुमति विवाद की दस्तावेज आधारित जांच हो। वैध कार्य है तो उसका आधार सार्वजनिक हो; अनियमितता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
कोरबा में प्रशासन की मौजूदगी उसके कार्यालयों से नहीं, उसके निर्णयों के पालन से दिखाई देनी चाहिए। चिमनी टूटने की शिकायत सामने है—अब जवाबदेही को फाइलों में मत दबाइए। तथ्य स्थिति: वर्तमान कार्य बिना अनुमति होने तथा पूर्व में अनुमति से इनकार के बावजूद डिस्मेंटलिंग किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। मूल अस्वीकृति पत्र, वर्तमान स्वीकृतियां और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब उपलब्ध होने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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