वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक की पैरवी में राहत—डॉ. राकेश कुमार सिंह के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट की रोक

अनुसूचित क्षेत्र में लंबी सेवा और गरियाबंद में पद रिक्त नहीं होने का आधार रखा; अभ्यावेदन के निर्णय तक स्थगित रहेगा स्थानांतरण
कोरबा/बिलासपुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कोरबा में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने 30 सितंबर 2026 को पारित आदेश में उनके कोरबा से गरियाबंद स्थानांतरण के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अभ्यावेदन के निराकरण तक रोक लगा दी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में उनकी लंबी सेवा, शासन की स्थानांतरण नीति तथा गरियाबंद में पद रिक्त नहीं होने के महत्वपूर्ण आधार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
प्रकरण WPS क्रमांक 7196/2026 से संबंधित है। शासन के 16 सितंबर 2026 के आदेश द्वारा डॉ. सिंह का स्थानांतरण सहायक आयुक्त आबकारी कार्यालय, कोरबा से जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय, गरियाबंद में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के पद पर किया गया था।
लंबी सेवा के बाद फिर अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरण को चुनौती
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि डॉ. सिंह अपनी सेवा का बड़ा हिस्सा अनुसूचित क्षेत्रों में बिता चुके हैं। इस परिस्थिति में उन्हें पुनः अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरित करने को राज्य शासन की 3 जून 2015 की स्थानांतरण नीति के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई। अधिवक्ताओं ने डिवीजन बेंच के रिट अपील क्रमांक 549/2016, निर्णय दिनांक 14 दिसंबर 2016 का उल्लेख करते हुए स्थानांतरण संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए गठित समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति भी माँगी।
गरियाबंद में पद की उपलब्धता का महत्वपूर्ण सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से यह आधार भी रखा गया कि गरियाबंद में पदस्थ लालजी दीवान के कबीरधाम स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने WPS क्रमांक 7034/2026 में रोक लगाई है। इसके परिणामस्वरूप डॉ. सिंह की पदस्थापना के लिए संबंधित पद वर्तमान में रिक्त नहीं है।
न्यायालय ने समिति को अभ्यावेदन पर विचार करते समय लालजी दीवान के प्रकरण में पारित आदेश और गरियाबंद में पद रिक्त नहीं होने की स्थिति को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया है।
दस दिनों में अभ्यावेदन, निर्णय तक रोक
हाईकोर्ट ने डॉ. सिंह को आदेश की तारीख से दस दिनों के भीतर संबंधित समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। निर्धारित अवधि में अभ्यावेदन प्रस्तुत होने पर समिति उसका विचार और निर्णय राज्य की लागू नीति के अनुसार करेगी। अभ्यावेदन पर समिति का निर्णय होने तक 16 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश का प्रभाव और क्रियान्वयन, याचिकाकर्ता से संबंधित सीमा तक, स्थगित रहेगा।
इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है। आदेश से डॉ. सिंह को स्थानांतरण के विरुद्ध संरक्षण मिला है; स्थानांतरण आदेश अंतिम रूप से निरस्त नहीं किया गया है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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