हम गुंडे-माफिया या आतंकवादी नहीं, सांसद हैं’: संजय सिंह का दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला

धक्का-मुक्की, घसीटने और जबरन हिरासत में लेने का आरोप; राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजे नोटिस, पुलिस आयुक्त समेत अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
नई दिल्ली | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान बार-बार बल प्रयोग और अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मामला राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित अपने बयान में उन्होंने कहा—“हम कोई गुंडे, माफिया या आतंकवादी नहीं, देश की संसद के सदस्य हैं।” उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटाने और प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।
सवाल अब पुलिस कार्रवाई के साथ उसके तरीके का भी है—प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कितना बल इस्तेमाल हुआ और क्या उसका औचित्य था? संजय सिंह ने इन्हीं परिस्थितियों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
दो नोटिस, तीन तारीखों की घटनाओं का उल्लेख
उपलब्ध कराए गए 12 अक्टूबर 2026 के पत्र, संदर्भ संख्या ADML/2026/22642, में संजय सिंह ने 2 और 10 अक्टूबर को उनके साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला उठाया है। राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति के सभापति को संबोधित पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें घसीटा, धक्का-मुक्की की और बलपूर्वक पुलिस बस में बैठाकर हिरासत में लिया।
पत्र के अनुसार, 2 अक्टूबर को वह चुनावी अनियमितताओं, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आयोजित विरोध मार्च में शामिल हुए थे। उनका आरोप है कि उस दौरान उन्हें सड़क पर धक्का भी दिया गया।
इसके बाद 13 अक्टूबर 2026 के पूरक नोटिस, संदर्भ संख्या ADML/2026/22648, में उन्होंने 12 अक्टूबर की एक और घटना का उल्लेख किया है। इसमें संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जनपथ मेट्रो स्टेशन तथा संसद मार्ग–जंतर-मंतर क्षेत्र के समीप प्रदर्शन के दौरान उनके साथ फिर धक्का-मुक्की हुई, उन्हें खींचा गया और पुलिस बस में बैठाकर हिरासत में लिया गया।
‘फोन और संदेश का जवाब भी नहीं मिला’
पूरक पत्र में संजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस आयुक्त से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। उन्होंने समिति से पुलिस आयुक्त का विस्तृत स्पष्टीकरण प्राप्त करने और अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के आचरण पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
उनका कहना है कि पूर्व शिकायत के बावजूद ऐसी घटनाओं का दोहराया जाना गंभीर है। उन्होंने इसे संसदीय विशेषाधिकार के हनन और सदन की अवमानना का मामला बताते हुए समिति से हस्तक्षेप मांगा है। ये शिकायतकर्ता सांसद के आरोप हैं; विशेषाधिकार हनन का कोई निर्णय उपलब्ध दस्तावेजों में नहीं है।
वीडियो और तस्वीरों के आधार पर जांच की मांग
संजय सिंह ने समिति से घटनाओं से संबंधित वीडियो और तस्वीरों में मौजूद साक्ष्यों का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। अपने सार्वजनिक बयान में उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त, जाफरपुर कलां थाने के एसएचओ और अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करने तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात कही है। सांसद की शिकायत पर अब जवाब दस्तावेजों और घटनाक्रम से आना चाहिए। हिरासत का आधार क्या था, मौके पर अधिकारियों के निर्देश क्या थे और बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी—इन प्रश्नों की निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
शिकायत हुई है; कार्रवाई का फैसला अभी स्पष्ट नहीं
उपलब्ध पत्र संजय सिंह की शिकायत और जांच की मांग को सामने रखते हैं। इनसे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि समिति ने अधिकारियों को दोषी ठहरा दिया है या उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। अदालत जाने की बात भी उनके घोषित अगले कदम के रूप में सामने आई है। इस विशिष्ट शिकायत पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक जवाब उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है। पुलिस का पक्ष और समिति की आगे की कार्यवाही सामने आने पर प्रकरण की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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