मंच पर सूर्पणखा की एंट्री, सड़क पर बोनट वाली रील—मनोरंजन के नाम पर सुरक्षा ‘वनवास’ में क्यों?

एक वीडियो में स्कॉर्पियो से नाटकीय प्रवेश का दावा, दूसरे में कार के बोनट पर महिला; सवाल—प्रदर्शन की सीमा कौन तय करेगा और सड़क सुरक्षा का ध्यान कौन रखेगा?
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। रामलीला में पात्रों की नाटकीय एंट्री दर्शकों का ध्यान खींचती है। सोशल मीडिया पर रील बनाने वालों को भी ध्यान चाहिए। लेकिन इस ध्यान खींचने की होड़ में सुरक्षा ही दृश्य से बाहर हो जाए तो सवाल पूछना जरूरी है—तालियां और लाइक्स बटोरने के लिए जोखिम उठाने की सीमा आखिर कहां है?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क को उपलब्ध दो अलग-अलग वीडियो इसी बहस को सामने लाते हैं। पहले वीडियो में एक महिला आगे बढ़ती दिखाई दे रही कार के बोनट पर लेटकर पोज देती नजर आती है। दूसरे वीडियो पर “स्कॉर्पियो पर बैठकर सूर्पणखा की एंट्री” लिखा है और उसमें वेशभूषा में एक कलाकार तथा मंचन के दृश्य दिखाई देते हैं। दोनों वीडियो एक ही आयोजन, स्थान या व्यक्ति के हैं—इसकी पुष्टि नहीं है। नए वीडियो में वाहन की गति, रास्ते और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति भी स्पष्ट नहीं होती। लेकिन दोनों को देखकर मनोरंजन के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी पर चर्चा जरूरी हो जाती है।
कहानी का मंच अलग है—सार्वजनिक सड़क की जिम्मेदारी अलग
मंच पर पात्र अभिनय करते हैं। सार्वजनिक सड़क पर पैदल यात्री, बच्चे, बुजुर्ग और वाहन चालक अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए निकलते हैं। उन्हें किसी और के प्रदर्शन का जोखिम उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। रील बनाने वाले को कैमरे का फ्रेम दिख सकता है; चालक को उसके बाहर मौजूद लोगों की सुरक्षा भी देखनी होगी। नाटकीय प्रवेश नियंत्रित आयोजन परिसर में हुआ या सार्वजनिक मार्ग पर? वाहन खड़ा था या चल रहा था? कलाकार की सुरक्षा का क्या इंतजाम था? नए वीडियो के संदर्भ में इन तथ्यों की पुष्टि के बिना उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पहले उपलब्ध वीडियो में बोनट पर लेटी महिला और आगे बढ़ती दिखाई देती कार का दृश्य स्पष्ट रूप से जांच की मांग करता है।
कोरबा के बताए जा रहे वीडियो पर पुलिस स्थिति स्पष्ट करे
पहले वीडियो को उपलब्ध कराने वाले का दावा है कि वह पंडित रविशंकर शुक्ल नगर, कोरबा का है और बोनट पर दिखाई दे रही महिला कांग्रेस नेता राजेंद्र बरनवाल की पत्नी हैं। पहचान, संबंध, स्थान और तारीख की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। पुलिस इन दावों का सत्यापन करे। संबंधित महिला, चालक और वाहन स्वामी का पक्ष लिया जाए। राजनीतिक परिचय की चर्चा से ज्यादा जरूरी यह पता लगाना है कि वाहन किस परिस्थिति में चलाया गया और क्या यातायात नियमों का उल्लंघन हुआ।
प्रशासन यातायात संभाले, नागरिक जोखिम बढ़ाएं—यह कैसी समझदारी?
त्योहारों में पुलिस और प्रशासन को भीड़ तथा यातायात की व्यवस्था संभालनी पड़ती है। नागरिकों और आयोजकों की जिम्मेदारी है कि वे इस काम में सहयोग करें। बोनट पर लेटकर आगे बढ़ती गाड़ी में प्रदर्शन करना अचानक ब्रेक या संतुलन बिगड़ने की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। आसपास के दूसरे वाहन और राहगीर भी प्रभावित हो सकते हैं।
वीडियो पर ‘वाह’ लिखना आसान है; दुर्घटना के बाद किसी परिवार को जवाब देना कठिन।
बोनट यात्री सीट नहीं है मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123(2) वाहन के बोनट, छत अथवा रनिंग बोर्ड पर यात्रा करने पर रोक लगाती है। धारा 123(1) के संदर्भ में चालक अथवा वाहन के प्रभारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसी विशिष्ट घटना में कार्रवाई का निर्णय वास्तविक परिस्थितियों और साक्ष्यों पर होना चाहिए। इसलिए जांच केवल कैमरे के सामने दिख रहे व्यक्ति तक सीमित न हो। चालक, वाहन के उपयोग और आयोजन की परिस्थितियों को भी देखा जाए।
कोरबा पुलिस से मांग—वीडियो का सत्यापन हो, कार्रवाई का विवरण आए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कोरबा पुलिस और यातायात विभाग से मांग करता है कि स्थानीय बताए जा रहे वीडियो की जांच करके तथ्य स्पष्ट किए जाएं। उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो। कार्रवाई पहले ही हो चुकी हो तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। नए वीडियो के स्थान और आयोजन की पहचान होने पर वहां की वास्तविक परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा सकती है। उसे बिना पुष्टि कोरबा की घटना बताना या पहले वीडियो से जोड़ देना उचित नहीं होगा।
रामलीला का मंच हो या सोशल मीडिया की रील—सुरक्षा को पर्दे के पीछे नहीं भेजा जा सकता। मनोरंजन यादगार बने, किसी दुर्घटना की वजह नहीं। दोनों वीडियो के बीच व्यक्ति, स्थान या आयोजन का संबंध स्थापित नहीं है। पहले वीडियो की पहचान संबंधी दावों तथा दोनों घटनाओं की तारीख, स्थान और कार्रवाई की पुष्टि शेष है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
सच के साथ एक कदम आगे
Live Cricket Info