कोरबा सर्विस स्टेशन: कार्रवाई की फाइल पर किसका दबाव? GM–CGM से CMD स्तर तक कथित ‘मैनेजमेंट’ की स्वतंत्र जाँच की मांग

देवजानी मजुमदार और तीवरता ग्रुप से जुड़े प्रकरण में अधिकारियों को प्रभावित करने की सूचना का दावा; बिचौलियों की कथित सक्रियता पर भी उठे सवाल
कुसमुंडा/कोरबा। कोरबा सर्विस स्टेशन से संबंधित शिकायतों में अब SECL के अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें GM, CGM और CMD स्तर तक अधिकारियों को कथित रूप से ‘मैनेज’ कर कार्रवाई प्रभावित करने की जानकारी मिल रही है। यह गंभीर आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी सच्चाई संबंधित अभिलेखों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच से सामने आनी चाहिए।
यदि कार्रवाई जानबूझकर रोकी गई है, तो किसके निर्देश पर? और यदि यह आरोप गलत है, तो प्रबंधन कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं रखता?
देवजानी मजुमदार और तीवरता ग्रुप की कथित कारोबारी अथवा संचालन संबंधी भूमिका के साथ यह भी जाँचा जाए कि संबंधित पक्षों को किसी अधिकारी ने अनुचित सुविधा दी या नहीं। किसने फाइल देखी, किसने निर्णय लिया, किस स्तर पर मामला लंबित रहा और उसका लिखित कारण क्या था—इन प्रश्नों के उत्तर फाइल की टिप्पणियों और पत्राचार से मिल सकते हैं।
बिचौलिये सक्रिय होने का दावा—कौन, किसके लिए और किस उद्देश्य से?
शिकायतकर्ता ने प्रकरण में बिचौलियों की कथित सक्रियता पर भी सवाल उठाए हैं। यदि किसी व्यक्ति ने संचालकों और अधिकारियों के बीच संपर्क कर कार्रवाई प्रभावित करने का प्रयास किया है, तो उसकी पहचान, भूमिका और संबंधित संपर्कों की जाँच हो। किसी आर्थिक लेन-देन का ठोस संकेत मिलने पर उसका भी सक्षम एजेंसी से परीक्षण कराया जाए। ‘मैनेज’ किए जाने का आरोप केवल चर्चा बनकर नहीं रहना चाहिए। उपलब्ध जानकारी को लिखित शिकायत, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर परखा जाए।
जिनकी भूमिका पर सवाल, उनसे ऊपर के स्वतंत्र स्तर पर जाँच हो
आरोप वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के कारण जाँच की स्वतंत्रता विशेष महत्व रखती है। कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया और सक्षम सतर्कता प्राधिकारी से मांग है कि प्रकरण की जाँच विवादित निर्णयों में शामिल अधिकारियों से स्वतंत्र स्तर पर कराई जाए।
जाँच में विशेष रूप से—
– भूमि, लीज, संचालन और कथित हस्तांतरण के मूल अभिलेख सुरक्षित किए जाएँ।
– शिकायतों पर प्राप्ति से निर्णय तक की तारीखवार कार्रवाई और फाइल टिप्पणियों का परीक्षण हो।
– कार्रवाई में देरी के प्रशासनिक अथवा न्यायालयीन कारणों की दस्तावेजों से पुष्टि हो।
– कथित बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जाँची जाए।
– अनुचित संरक्षण, जानबूझकर देरी या अनुमति उल्लंघन प्रमाणित होने पर संबंधित पक्षों और अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
सरकारी संपत्ति की रक्षा का जिम्मा संभालने वाले अधिकारी जवाबदेही से बाहर नहीं हैं। प्रबंधन रिकॉर्ड सार्वजनिक करे और स्पष्ट बताए—कार्रवाई कहाँ पहुँची, देरी क्यों हुई और अगला निर्णय कब होगा?यह प्रतिक्रिया शिकायतकर्ता के आरोपों और जाँच की मांग पर आधारित है। अधिकारियों को ‘मैनेज’ किए जाने, बिचौलियों की सक्रियता अथवा जानबूझकर कार्रवाई रोकने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों, देवजानी मजुमदार और तीवरता ग्रुप का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
Live Cricket Info
