छा गए तिवारी जी..! किस्मत या कनेक्शन

तिवारी जी के चर्चे तेज! आखिर यह किस्मत का कमाल है या कनेक्शन का खेल? कोरबा प्रशासन के गलियारों में उठ रहे सवालों और चर्चाओं पर एक खास नजर।
कोरब। क्रिकेटर,कॉमेडियन और पॉलिटिशियन का संवाद छा गए गुरु… म्युनिसिपल कारपोरेशन के एक तिवारी पर फिट और सुपरहिट है। साहब किस्मत के धनी हैं या नेतागिरी की पिच पर कोई मजबूत कनेक्शन रखते हैं, यह तो निगम क्षेत्र की जनता और अफसर ही बेहतर जानते होंगे। पर उनकी पोस्टिंग देखकर डिपार्टमेंट के अफसर कह रहें हैं “आप तो छा गए गुरु…!”
बात कोरबा के मीठा बोल बड़ा अनमोल वाले सहायक स्वच्छता अधिकारी की है । साहब ने कांग्रेस सरकार मे भी स्वच्छता अधिकारी को सुपर सीट कर कचरा और सफाई से खूब मलाई निकाला। फिर सरकार बदली। सत्ता का मौसम बदला। निगम की हवा बदली। लेकिन साहब की किस्मत का मौसम शायद स्थायी रूप से सुहाना ही रहा। सरकार बदली तो फिर से किस्मत ने ऐसी बाजी पलट दी कि फिर सीनियर के बॉस बनकर सड़क और सफाई के खास बन गए। हालांकि मेयर के शुरुआती कार्यकाल में तालमेल बैठाने के लिए मशक्कत करना पड़ा लेकिन साहब के पास दो पुराने हथियार हमेशा मौजूद रहे, अनुभव और मीठे बोल। सो अनुभव और मीठे बोल के सहारे फिर से मेयर को भी अपने खांचे में ढाल लिया।
वैसे तो कोरबा की माटी बहुत ही शांत है और हर कोई यहां लंबी पारी खेलना चाहता है। तभी तो जिस पर नेताओं का आशीर्वाद रहता है वो आयुक्त के नियम को तार – तार कर कुर्सी छोड़ने तैयार नही होता।
उनकी पोस्टिंग और अपने कंडीशन को परखकर निगम के पंडित कहने लगे हैं, “छा गए साहब ! ये किस्मत है या कनेक्शन…! “
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