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नेहरू सभागार में “सागौन सफाचट, बजट चकाचक”!

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पुराने बेशकीमती फर्नीचर का पता नहीं—नए फर्नीचर, साउंड, स्क्रीन, हरियाली और रखरखाव के नाम पर ₹2.30 करोड़ से अधिक की निविदा-श्रृंखला

 

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बोली खुलने के एक महीने बाद वेबसाइट पर दिखा 58 मदों का BOQ; मूल निविदा और सरकारी प्रचार की रकम में ₹2.97 लाख का फर्क—अब सवाल, पौधों से PA सिस्टम तक किस “सर्वगुण संपन्न चहेते” का ठेका-साम्राज्य?

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर पालिक निगम कोरबा के जवाहरलाल नेहरू सभागार में विकास की ऐसी चमक बिखेरी गई कि नया फर्नीचर दमकने लगा, BOSE का साउंड बोलने लगा, BOSCH के माइक्रोफोन गर्दन उठाने लगे, PeopleLink का कैमरा घूमने लगा और बाहर लैंडस्केपिंग भी मुस्कुराने लगी।

बस एक चीज चुपचाप गायब हो गई—सभागार का वर्षों पुराना बेशकीमती सागौन फर्नीचर!

न कोई सार्वजनिक सूची।
न स्थानांतरण आदेश।
न अपलेखन पंचनामा।
न नीलामी सूचना।
न बिक्री रसीद।
न गोदाम का पता।

वाह निगम सरकार! नया खरीदने के लिए करोड़ों का प्राक्कलन तैयार, लेकिन पुराने सागौन का हिसाब पूछो तो फाइलों पर ऐसा मौन, जैसे फर्नीचर को पंख लगे और वह रातों-रात सभागार से उड़ गया!

अब जनता पूछ रही है—पुराना सागौन किसके बंगले की शोभा बढ़ा रहा है?

नया फर्नीचर आया—पुराना सरकारी माल किस दरवाजे गया?

सरकारी फर्नीचर किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की पुश्तैनी संपत्ति नहीं होता। प्रत्येक टेबल, कुर्सी, सोफा और आलमारी का स्टॉक रजिस्टर, संपत्ति क्रमांक और भौतिक सत्यापन होना चाहिए।

पुराना सामान हटाया गया तो निगम बताए:

– कितनी सागौन की कुर्सियां थीं?
– कितनी टेबल और सोफे थे?
– किसने उन्हें अनुपयोगी घोषित किया?
– मूल्यांकन समिति में कौन-कौन था?
– सामान किस गोदाम या कार्यालय में भेजा गया?
– वाहन क्रमांक और गेट पास क्या था?
– यदि नीलाम किया गया तो खरीदार कौन था?
– कितनी राशि निगम को मिली?
– क्या कोई सामान ठेकेदार को dismantling या disposal के नाम पर सौंपा गया?

यदि ये रिकॉर्ड नहीं हैं, तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं रहता। यह सरकारी संपत्ति के संभावित गायब होने, अनधिकृत हस्तांतरण या निजी उपयोग का गंभीर प्रश्न बनता है। नई कुर्सियों की चमक पुराने सागौन का हिसाब नहीं निगल सकती₹2.30 करोड़ की आधुनिकता—लेकिन हिसाब के कमरे में अंधेरा!

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार नेहरू सभागार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े कार्यों की श्रृंखला:

– फर्नीचर, PA, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और साउंड: ₹1,60,67,000
– लैंडस्केपिंग एवं संबंधित सिविल कार्य: ₹55,64,000
– हाईमास्ट और प्रकाश व्यवस्था: ₹5,39,122
– DG, साउंड, लाइट, PA और AC का संचालन: ₹9,01,108

कुल प्राक्कलित श्रृंखला: ₹2,30,71,230

अर्थात आधुनिकता के मंच पर दो करोड़ तीस लाख रुपये से अधिक का सरकारी खेल!  लेकिन जनता के सामने अब तक न पूरा कार्यादेश है, न ठेकेदार का पुष्ट नाम, न L-1 दर, न माप-पुस्तिका, न अंतिम बिल और न वास्तविक भुगतान का हिसाब।  सभागार में साउंड सिस्टम इतना आधुनिक लगाया गया कि आवाज दीवारों से टकराकर लौट आती होगी—लेकिन जनता का सवाल निगम कार्यालय पहुंचते ही शायद “म्यूट” हो जाता है!

मूल टेंडर में ₹2.16 करोड़—सरकारी प्रचार में ₹2.19 करोड़!

फाइल क्रमांक 515/2024, सिस्टम टेंडर 164860 में फर्नीचर, PA, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और साउंड सिस्टम की राशि ₹1,60,67,000 है।  फाइल 516/2024, सिस्टम टेंडर 164857 में लैंडस्केपिंग और संबंधित सिविल कार्य की राशि ₹55,64,000 है।

मूल कुल राशि: ₹2,16,31,000

लेकिन 20 मई 2025 की सरकारी प्रेस सूचना में यही रकम बढ़कर:

– पहला पैकेज: ₹1,62,53,000
– दूसरा पैकेज: ₹56,75,000
– कुल: ₹2,19,28,000। हो गई। सीधा अंतर: ₹2,97,000

यह ₹2.97 लाख किस फाइल की कोख से पैदा हुआ?

क्या संशोधित प्राक्कलन बना? क्या अतिरिक्त तकनीकी स्वीकृति हुई? क्या variation order जारी हुआ? क्या GST या अन्य मद बाद में जोड़े गए? किस अधिकारी ने हस्ताक्षर किए?

या फिर सरकारी प्रचार में रकम भी उसी तरह सजाई गई जैसे सभागार के बाहर लैंडस्केपिंग?

निगम दस्तावेज सामने रखे, वरना यह अंतर “टाइपिंग की भूल” नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन पर खड़ा वित्तीय प्रश्न माना जाएगा। बोली फरवरी में खुली—BOQ मार्च में जनता को दिखा!

मूल NIT की समय-सारणी कहती है:

– निविदा जारी: 20 जनवरी 2025
– बोली की अंतिम तिथि: 11 फरवरी 2025
– भौतिक दस्तावेज: 12 फरवरी 2025, दोपहर 3 बजे तक
– निविदा खोलना: 12 फरवरी 2025, शाम 4 बजे       लेकिन इसी कार्य का 58 मदों वाला विस्तृत BOQ नगर निगम वेबसाइट पर 12 मार्च 2025 की अलग प्रविष्टि में दिखाई देता है।

यानी बोली पहले खुल गई और जनता के सामने BOQ एक महीने बाद आया!

यह वैसा ही है जैसे परीक्षा फरवरी में हो जाए और प्रश्नपत्र मार्च में सूचना-पटल पर चिपकाया जाए।

यदि यह दूसरी निविदा थी तो:

– पहली निविदा निरस्त करने का आदेश कहां है?
– दूसरा सिस्टम टेंडर नंबर क्या था?
– नई अंतिम तिथि और opening date कहां है?
– क्या specifications बदली गई थीं?
– क्या सभी संभावित निविदाकारों को समान अवसर मिला?

यदि यह केवल विलंब से अपलोड हुई प्रति है, तो ई-प्रोक्योरमेंट का मूल digital time-stamp सार्वजनिक किया जाए।  BOQ की असली जन्मतिथि सामने आते ही इस निविदा की आधी बीमारी खुद खुल जाएगी।

पौधों से PA सिस्टम तक—कौन है निगम का “सर्वगुण संपन्न ठेकेदार”?

शहर में अब सबसे बड़ा सवाल घूम रहा है—इस भारी-भरकम पैकेज का लाभार्थी ठेकेदार आखिर कौन है?

क्या यह वही चर्चित “पौधे वाले सर” हैं?

अभी इसका पुष्ट कार्यादेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति या फर्म का नाम तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। लेकिन नगर निगम की चुप्पी ही इस सवाल को जहरीला बना रही है।

निगम तत्काल बताए:

– फाइल 515/2024 किस फर्म को मिली?
– फाइल 516/2024 का ठेकेदार कौन है?
– दोनों फाइलों के ठेकेदारों में कोई कारोबारी संबंध है?
– क्या संबंधित फर्म ने निगम के पौधा या लैंडस्केपिंग कार्य भी किए हैं?
– कितनी फर्मों ने भाग लिया?
– कितनी फर्में तकनीकी जांच में बाहर हुईं?
– L-1 और L-2 के बीच कितना अंतर था?
– समान कार्य का 50 प्रतिशत अनुभव किस विभाग ने प्रमाणित किया?

यदि एक ही ठेकेदार पौधे भी लगा रहा है, फर्नीचर भी दे रहा है, acoustic panel भी चिपका रहा है, BOSE का साउंड भी लगा रहा है, BOSCH का सम्मेलन सिस्टम भी जोड़ रहा है, PeopleLink कैमरा भी फिट कर रहा है और बाद में रखरखाव की मलाई भी चख रहा है—तो वह ठेकेदार नहीं, नगर निगम का चलता-फिरता “ऑल-इन-वन विभाग” है!

नगर निगम ऐसे अद्भुत प्रतिभाशाली ठेकेदार का नाम छिपा क्यों रहा है?

BOSE–BOSCH–PeopleLink—टेंडर था या ब्रांडों की बारात?

 

BOQ में चुनिंदा नाम चमकते हैं:

– BOSE
– BOSCH
– PeopleLink
– Samsung
– Sony
– ViewSonic
– ATEN
– Netrack
– Godrej
– Wipro
– Featherlite

लगता है सभागार का BOQ कम और बड़े ब्रांडों की शादी का निमंत्रण-पत्र ज्यादा तैयार किया गया था।

प्रश्न यह नहीं कि ब्रांड अच्छे हैं या खराब। प्रश्न यह है कि specification किसने और किस आधार पर बनाई? 

क्या स्वतंत्र तकनीकी समिति ने आवश्यकता तय की? क्या बाजार सर्वेक्षण हुआ?

क्या अन्य समकक्ष कंपनियों को वास्तविक अवसर मिला?

क्या “equivalent” उत्पाद स्वीकार करने का लिखित और मापनीय मानदंड था?

या specifications किसी पहले से पसंद किए गए catalogue से उठाकर टेंडर में चिपका दी गईं?

फर्नीचर वाला ही साउंड इंजीनियर—और पौधे वाला वीडियो विशेषज्ञ?

₹1.60 करोड़ के एक ही पैकेज में जोड़ दिया गया:

– टेबल और कुर्सियां
– acoustic panels
– PA और sound system
– conference microphones
– video-conferencing camera
– computer और UPS
– networking
– HDMI उपकरण
– 43, 55 और 98 इंच स्क्रीन

एक ठेकेदार से इतना प्रेम क्यों?
फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, IT, acoustic और professional sound को अलग-अलग पैकेज में बांटकर विशेषज्ञ कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं कराई गई?
क्या संयुक्त पैकेज इसलिए बनाया गया कि पात्रता का दरवाजा छोटा हो और कोई “विशेष मेहमान” आराम से भीतर प्रवेश कर सके?
यदि अधिक कंपनियां भाग लेतीं तो क्या निगम को बेहतर दर मिल सकती थी? क्या उत्पादों की गुणवत्ता अधिक स्पष्टता से जांची जा सकती थी?

इन सवालों का जवाब comparative statement और technical evaluation में है—बस निगम उस तिजोरी की चाबी जनता को दिखा दे।

Specification में इतना घालमेल—सामान कोई भी, भुगतान पूरा?

BOQ में कई जगह तकनीकी भ्रम दिखाई देता है:

– एक टेबल के दो अलग आकार।
– कुर्सी के लिए अलग-अलग सामग्री विकल्प।
– स्पीकर का शीर्षक 600W, फिर LF 500W और HF 100W।
– Amplifier को 300W बताकर प्रति चैनल अलग शक्ति।
– CAT-6 वायर की मात्रा “200 No.”।
– कहीं निश्चित ब्रांड, कहीं “or similar”, कहीं “equivalent”।

ऐसी शर्तें क्या भूल से बनीं या जानबूझकर इतनी खुली छोड़ी गईं कि आपूर्ति के समय कुछ भी “समकक्ष” बताकर खपा दिया जाए?
जब specification ही धुंधली हो तो बिल साफ कैसे होगा?

₹55.64 लाख की लैंडस्केपिंग—पौधे फाइल में नहीं, रकम पूरी!

लैंडस्केपिंग की सार्वजनिक PDF में:

– पौधों की संख्या नहीं
– प्रजाति नहीं
– क्षेत्रफल नहीं
– सिंचाई व्यवस्था नहीं
– रखरखाव अवधि नहीं
– दरवार विस्तृत BOQ नहीं
– साइट प्लान नहीं

₹55.64 लाख की हरियाली आखिर किस जमीन पर उगी?
कितने पौधे लगाए गए? कितने जीवित हैं? कितने वन विभाग से निःशुल्क मिले? survival verification किसने किया? भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन हुआ या फाइलों में ही हरियाली लहरा दी गई?
और यदि यह काम “पौधे वाले सर” के पास गया, तो क्या पुराने पौधा कार्यों की performance report देखी गई?
नगर निगम को बताना होगा—यह लैंडस्केपिंग थी या बजट पर हरी चादर?
हाईमास्ट पुरानी नींव पर—तो नींव का पैसा किसने खाया या बचाया?

₹5,39,122 के हाईमास्ट BOQ में “existing RCC foundation” लिखा है। दूसरी ओर foundation bolts और anchor plate का विवरण है तथा RCC foundation को अलग भुगतान योग्य बताया गया है।

यदि नींव पहले से थी तो:

– किस ठेके से बनी?
– उसका MB और भुगतान कहां है?
– stability certificate किसने दिया?
– 180 km/h wind-load test हुआ?
– earthing और commissioning report कहां है?

और यदि नई नींव बनी, तो उसका भुगतान किस फाइल से हुआ?

हाईमास्ट ऊपर खड़ा है—लेकिन उसके नीचे दबा हिसाब अभी तक बाहर नहीं आया।  ₹9 लाख का संचालन—दर खाली, मात्रा खाली, रकम का आधार खाली!  2026 की संचालन निविदा में ₹9,01,108 का अनुमान है। लेकिन Abstract में Rate, Quantity और Amount के कॉलम खाली हैं।

फिर ₹9.01 लाख निकले कहां से?
क्या हवा ने गणना की?
क्या खाली कॉलमों ने खुद जोड़-घटाव कर लिया?
या किसी बंद कमरे में रकम पहले तय हुई और estimate बाद में उसका वस्त्र पहनाने पहुंचा?

कितने कर्मचारी, कितनी शिफ्ट, कितना वेतन, कितना EPF–ESI और कितना ठेकेदार लाभ—निगम एक-एक पाई का हिसाब दे।

निगम बताए—पुराना सागौन कहां, नया ठेकेदार कौन?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम आयुक्त के सामने सीधे प्रश्न रखता है:

1. पुराने सागौन फर्नीचर की सूची कहां है?
2. वर्तमान में वह किस स्थान पर रखा है?
3. condemned/नीलामी/स्थानांतरण आदेश कहां है?
4. नया फर्नीचर किस फर्म ने दिया?
5. स्वीकृत L-1 दर क्या थी?
6. “पौधे वाले” कथित ठेकेदार से कोई संबंध है या नहीं?
7. ₹2.97 लाख बढ़ी राशि का आदेश कहां है?
8. BOQ निविदा खुलने के बाद वेबसाइट पर क्यों आया?
9. actual supplied make-model और serial number क्या हैं?
10. क्या 62 delegate microphones मौके पर मौजूद हैं?
11. 98 इंच interactive display किस asset number से दर्ज है?
12. 80 नई कुर्सियों और पुरानी सागौन कुर्सियों का सत्यापन कब होगा?
13. कुल कितना भुगतान हुआ?
14. MB और final bill कहां हैं?
15. completion certificate किस अधिकारी ने जारी किया?

सभागार आधुनिक हुआ या ठेका-तंत्र मालामाल?

जवाहरलाल नेहरू सभागार में नई कुर्सियां हैं—पुरानी सागौन की कुर्सियों का पता नहीं।  नई रकम है—₹2.97 लाख बढ़ने का आदेश नहीं।  नया BOQ है—लेकिन बोली खुलने के एक महीने बाद वेबसाइट पर।

चुनिंदा ब्रांड हैं—लेकिन चयन का औचित्य नहीं।  लैंडस्केपिंग की रकम है—लेकिन सार्वजनिक फाइल में पौधों का हिसाब नहीं।  मेंटेनेंस का अनुमान है—लेकिन Rate, Quantity और Amount खाली।  यह विकास की सीधी कहानी नहीं, सवालों का ऐसा मकड़जाल है जिसमें हर धागा किसी बंद फाइल, छिपे कार्यादेश और अज्ञात लाभार्थी की ओर जाता दिखाई देता है।

यदि सब कुछ पाक-साफ है तो निगम प्रशासन सारे दस्तावेज सार्वजनिक करे। ठेकेदार का नाम बताए। पुराने सागौन का ठिकाना बताए। L-1 और भुगतान बताए।

अन्यथा जनता यही कहेगी:

“सागौन सफाचट—बजट चकाचक; पौधे से PA तक चहेते की धमक!”

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मांग करता है कि कलेक्टर, नगरीय प्रशासन विभाग और स्थानीय निधि संपरीक्षा की संयुक्त टीम सभागार का तत्काल भौतिक एवं वित्तीय सत्यापन करे। पुराने सागौन से लेकर 98 इंच डिस्प्ले तक प्रत्येक संपत्ति का मिलान हो। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण EOW/ACB को सौंपा जाए।

संबंधित अधिकारी, ठेकेदार अथवा आपूर्तिकर्ता अपना दस्तावेजी पक्ष उपलब्ध करा सकते हैं; उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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