कोरबा DMF फाइल्स – भाग 3

क्या DMF ट्रस्ट की बैठकों का पूरा सच जनता के सामने आएगा? CAG रिपोर्ट के बाद अब जवाबदेही से बचना आसान नहीं
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EXCLUSIVE | CAG REPORT EXPOSES – PART 3
करोड़ों की मंजूरी किसने दी? किस आधार पर दी? क्या अब हर फाइल खुलेगी?
कोरबा/रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने केवल खर्च की प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि DMF ट्रस्ट की निर्णय प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं रह गया कि करोड़ों रुपये कहां खर्च हुए, बल्कि यह है कि—
उन करोड़ों की मंजूरी किसने दी? किस आधार पर दी? क्या निर्णय पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप लिए गए? DMF ट्रस्ट कोई साधारण समिति नहीं । जिला खनिज न्यास (DMF) एक वैधानिक ट्रस्ट है।
इसकी बैठकों में लिए गए निर्णयों के आधार पर ही करोड़ों रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत होती हैं। ट्रस्ट का नेतृत्व जिला प्रशासन करता है तथा इसमें संबंधित जनप्रतिनिधियों सहित अन्य नामित सदस्य शामिल रहते हैं। यही कारण है कि CAG की टिप्पणियों के बाद अब जनता सीधे निर्णय प्रक्रिया पर जवाब चाहती है।
अब सबसे बड़ा सवाल — क्या हर बैठक का कार्यवृत्त सार्वजनिक होगा? यदि प्रत्येक निर्णय नियमों के अनुसार लिया गया था—
तो फिर जनता को यह जानने का अधिकार है कि—
✔ किस बैठक में कौन-कौन उपस्थित था?
✔ किस परियोजना को किस आधार पर स्वीकृति मिली?
✔ किस अधिकारी ने क्या सुझाव दिया?
✔ किस जनप्रतिनिधि ने क्या आपत्ति या समर्थन दर्ज कराया?
✔ क्या किसी सदस्य ने प्रभावित गांवों की प्राथमिकता का प्रश्न उठाया?
पारदर्शिता ही सबसे बड़ा उत्तर
यदि सभी निर्णय पूरी प्रक्रिया के अनुसार हुए हैं—
तो ट्रस्ट के कार्यवृत्त (Minutes of Meeting), परियोजना सूची, स्वीकृतियां और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
इससे जनता का विश्वास भी बढ़ेगा और सभी पक्षों को अपना दृष्टिकोण रखने का अवसर मिलेगा।
CAG की सिफारिशों के बाद अब क्या होगा?
अब निगाहें राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर हैं।
जनता जानना चाहती है—
क्या CAG की प्रत्येक टिप्पणी पर विभागवार कार्रवाई होगी?
क्या जिम्मेदार विभागों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा?
क्या लंबित और अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा होगी?
क्या भविष्य में DMF व्यय को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा?
कोरबा की जनता के पांच सीधे सवाल
1. क्या DMF ट्रस्ट की सभी बैठकों का कार्यवृत्त सार्वजनिक किया जाएगा?
2. क्या ग्रामवार यह बताया जाएगा कि किस गांव को कितना लाभ मिला?
3. क्या 44 प्रतिशत विकास से वंचित गांवों के लिए अलग कार्ययोजना बनेगी?
4. क्या CAG द्वारा चिन्हित कमियों पर जिम्मेदारी तय होगी?
5. क्या भविष्य में प्रत्येक DMF परियोजना का सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कराया जाएगा?
अब जनता केवल घोषणा नहीं, जवाब चाहती है
DMF का उद्देश्य स्पष्ट है—
खनन प्रभावित लोगों का जीवन बेहतर बनाना। यदि इस उद्देश्य की प्राप्ति में कहीं कमी रही है, तो उसे स्वीकार कर सुधार करना भी लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।
ग्राम यात्रा का संपादकीय प्रश्न
खनिज से निकली संपदा का पहला अधिकार उसी क्षेत्र के लोगों का है, जिन्होंने वर्षों तक धूल, प्रदूषण, विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव झेले हैं।
यदि CAG जैसी संवैधानिक संस्था गंभीर प्रक्रियागत कमियों की ओर संकेत करती है, तो अब समय आ गया है कि—
DMF की हर फाइल जनता के सामने आए।
हर परियोजना का सामाजिक और वित्तीय अंकेक्षण हो।
हर निर्णय की पारदर्शी समीक्षा हो।
और यदि कहीं त्रुटियां हुई हैं, तो उन्हें सुधारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू की जाए।
अब निगाहें इन पर… जिला प्रशासन
क्या CAG रिपोर्ट पर विस्तृत जिला स्तरीय समीक्षा होगी?
राज्य सरकार
क्या सभी जिलों के DMF ट्रस्टों का विशेष ऑडिट कराया जाएगा?
केंद्र सरकार
क्या देशभर में DMF संचालन के लिए और अधिक पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी?
अगले अंक में
कोरबा DMF फाइल्स – भाग 4 (सबसे बड़ा खुलासा)
“कोरबा में DMF के करोड़ों रुपये किन-किनपरियोजनाओं पर खर्च हुए? कौन-सी योजनाएं सफल रहीं, किन पर CAG ने सबसे गंभीर सवाल उठाए, और अब आगे क्या होना चाहिए?”
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संपादकीय टिप्पणी: यह रिपोर्ट भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट टिप्पणियों तथा सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध दोष सिद्ध होने का दावा नहीं किया गया है। यदि संबंधित विभाग, DMF ट्रस्ट या जनप्रतिनिधि अपना पक्ष देना चाहें, तो ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
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