कोरबा : 2 साल से लंबित गिरफ्तारी वारंट ! सजा के बाद भी आरोपी बेखौफ, पुलिस पर उठे सवाल
कोरबा । जिले में न्यायिक व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है । चेक बाउंस प्रकरण में न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्तारी से बाहर है और खुलेआम क्षेत्र में घूम रहा है ।

मिली जानकारी के अनुसार प्रकरण क्रमांक 937/2017 में धारा 138 परि. अधिनियम के तहत आरोपी संतोष कुर्रे निवासी डॉ. राजेंद्र प्रसाद नगर, कोरबा के विरुद्ध न्यायालय ने कार्रवाई करते हुए 6 माह की सजा सुनाई थी । साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 70, 71 और 72 के तहत गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था ।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद पिछले लगभग 2 वर्षों से उक्त गिरफ्तारी वारंट की तामील नहीं हो सकी है । शिकायतकर्ता के अनुसार जब भी संबंधित थाना रामपुर या सिविल लाइन में जानकारी लेने पहुंचा जाता है, तो पुलिस द्वारा यह कहा जाता है कि वारंट मिल नहीं रहा है ।
वारंट गायब या लापरवाही ?
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं । क्या वाकई वारंट गुम हो गया है या फिर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की जा रही ? न्यायालय के आदेश की इस तरह अनदेखी होना कानून व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है ।
आरोपी बेखौफ, पुलिस बेखबर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी लगातार कोरबा आता-जाता रहता है, लेकिन पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया । न तो उसकी तलाश की गई और न ही वारंट की प्रभावी तामील सुनिश्चित की गई ।
न्याय व्यवस्था पर असर
इस तरह के मामलों से आम जनता के बीच यह संदेश जाता है कि यदि सजा सुनाए जाने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम सकता है, तो न्याय व्यवस्था की सख्ती पर सवाल उठना लाजमी है ।
SP से शिकायत की तैयारी
मामले को लेकर अब पुलिस अधीक्षक कोरबा को लिखित शिकायत देने की तैयारी की जा रही है, जिसमें वारंट की तामील में देरी और संबंधित थाना की भूमिका की जांच की मांग की जाएगी ।
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है । अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या लंबे समय से लंबित वारंट की तामील आखिरकार हो पाती है या नहीं ।

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