वाह रे नगर निगम कोरबा! नीम–गुलमोहर खरीदना है या कोई मशीन चालू करनी है?

पौधों के टेंडर में Factory Test Report, Testing–Commissioning, Capacity–Output और O&M Manual की शर्त—किस खास फर्म के कागज देखकर बुना गया GeM का GAME?
पौधे पहले ही जमीन में रोपे गए, टेंडर अब पोर्टल पर; वन विभाग मुफ्त पौधे दे रहा, फिर 3,070 पौधों की लाखों की खरीदी क्यों?
Class-I/Class-II में विरोध, OEM का ₹50 लाख टर्नओवर, स्वतंत्र Inspection भी नहीं—क्या सामान्य नर्सरियों को बाहर कर किसी विशेष आपूर्तिकर्ता के लिए बनाया गया तकनीकी चक्रव्यूह?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
नगर पालिक निगम कोरबा को शहर में पौधे लगाने हैं या किसी औद्योगिक कारखाने की मशीन चालू करनी है?
यह सवाल व्यंग्य नहीं, निगम द्वारा जारी GeM निविदा क्रमांक GEM/2026/B/7982716 की अपनी शर्तों से पैदा हुआ है। निगम खरीद रहा है नीम, अर्जुन, अशोक, अमलतास, गुलमोहर, कचनार और चंपा के पौधे; लेकिन बोलीदाता से मांगे जा रहे हैं:
– Factory/Manufacturer Test Report;
– Testing and Commissioning;
– Capacity,किए जाने वाले शब्द;
– Output और Efficiency Parameters;
– Pre-Dispatch Equipment Testing;
– Operation and Maintenance Manual;
– Plant/Equipment का Successful Operation और Handover।
अब नगर निगम को जनता को बताना चाहिए—क्या नीम का पौधा मशीन की तरह Commission किया जाएगा? क्या गुलमोहर की प्रति घंटे Output निकाली जाएगी? क्या अर्जुन की Efficiency का Load Test होगा? क्या चंपा के पौधे के साथ Operation Manual मिलेगा?
या फिर पौधों की निविदा में मशीनों की यह तकनीकी बारूदी सुरंग इसलिए बिछाई गई कि सामान्य नर्सरी संचालक उलझकर बाहर हो जाएं औरकिए जाने वाले शब्द, दस्तावेजों में कमी निकालकर वास्तविक प्रतियोगियों को अपात्र किया जा सके और अंत में वही विशेष फर्म बचे जिसके पास इस कृत्रिम चक्रव्यूह की चाबी पहले से मौजूद हो? पौधों का टेंडर या किसी खास फर्म के प्रमाणपत्रों की नकल?
इस विचित्र निविदा में बोलीदाता का न्यूनतम औसत वार्षिक टर्नओवर ₹18 लाख रखा गया है,किए जाने वाले शब्द, लेकिन कथित OEM का टर्नओवर ₹50 लाख मांगा गया है। साथ में OEM Authorization Certificate भी अनिवार्य किया गया है।
जीवित पौधे का OEM कौन है? क्या जंगल में उगा पौधा किसी कंपनी की मशीन है? क्या स्थानीय पंजीकृत नर्सरी को अपने ही उगाए पौधे बेचने के लिए किसी काल्पनिक निर्माता से Authorization लेना पड़ेगा?
नगर निगम को सार्वजनिक करना चाहिए कि निविदा जारी करने से पहले उसने कितनी नर्सरियों का बाजार सर्वेक्षण किया और उनमें से कितनी फर्में:
– ₹50 लाख OEM टर्नओवर;
– OEM Authorization;
– Factory Test Report;
– Testing–Commissioning;
– Capacity–Output;
– Oकिए जाने वाले शब्द;
– O&M Manual
जैसी शर्तें पूरी करती थीं। यदि बाजार सर्वेक्षण में केवल एक या दो फर्में ही इन शर्तों पर खरी उतरती थीं, तो यह जांचना जरूरी है कि टेंडर की शर्तें आवश्यकता देखकर बनाई गईं या किसी पहले से चुनी हुई फर्म की फाइलकिए जाने वाले शब्दाइल देखकर। कॉपी-पेस्ट की मूर्खता या चयन की सुनियोजित खिड़की? निगम इस गलती को केवल “कॉपी-पेस्ट की भूल” कहकर नहीं बच सकता। यदि किसी अधिकारी ने पौधों की निविदा पढ़े बिना मशीनरी की शर्तें चिपका दीं तो यह लाखों रुपये की सार्वजनिक खरीद में घोर प्रशासनिक अक्षमता और कर्तव्यहीनता है। और यदि शर्तें जानबूझकर रखी गईं तो मामला कहीं अधिक गंभीर है—क्योंकि इन्हीं अस्पष्ट शर्तों के सहारे:
– किसी बोलीदाता को तकनीकी रूप से बाहर किया जा सकता है;
– किसी विशेष फर्म के अधूरे दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं;
– समान बोलीदाताओं के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा सकता है;
– एकल पात्र बोली का रास्ता बनाया जा सकता है;
– पहले से लगाए गए पौधों का भुगतान चयनित विक्रेता को दिलाया जा सकता है।
दोनों परिस्थितियों में जिम्मेदार अधिकारी जांच के घेरे में आते हैं। पौधे पहले, टेंडर बाद में—अब मशीनों वाली शर्तों का जाल! नगर निगम 18 जुलाई 2026 से वन विभाग के सहयोग से पौधरोपण करा रहा था। 24 अगस्त को दादर रोड से जलविहार तक पौधे लगाए गए। इसके केवल 10 दिन बाद 3 सितंबर को 3,070 पौधों की खरीदी निविदा जारी हुई। अब इस उलटे समयक्रम के साथ मशीनों वाली पेचीदी शर्तें जुड़ने पर संदेह और गहरा हो जाता है:
«क्या पहले पौधे लगवाए गए, फिर किसी विशेष आपूर्तिकर्ता को पात्र बनाने के लिए मशीनरी वाला जटिल टेंडर खड़ा किया गया?»
यदि नहीं, तो निगम बताए:
1. पौधों की निविदा में Testing–Commissioning किसने जोड़ी?
2. Capacity, Output और Efficiency किस पौधे की मापी जाएगी?
3. Factory Test Report का निर्धारित प्रारूप कहां है?
4. O&M Manual किस प्रजाति के लिए चाहिए?
5. इन शर्तों को किस सक्षम अधिकारी ने अनुमोदित किया?
6. क्या अनुमोदन से पहले उद्यानिकी विशेषज्ञ की राय ली गई?
7. संभावित बोलीदाताओं का बाजार सर्वेक्षण कहां है?
8. क्या किसी संभावित फर्म ने निविदा से पहले इन शर्तों का प्रारूप उपलब्ध कराया था?
9. ATC तैयार करने वाले सिस्टम और यूजर का GeM Audit Trail क्या कहता है?
10. क्या मशीनरी की शर्तों की आड़ में किसी विशेष बोलीदाता को लाभ पहुंचाने की तैयारी थी?
जांच में केवल पौधे नहीं, टेंडर बनाने वाले हाथ भी गिने जाएं इस मामले की जांच केवल यह देखकर समाप्त नहीं हो सकती कि 3,070 पौधे आए या नहीं। जांच यह भी करे कि टेंडर की प्रत्येक पेचीदी शर्त:
– किस अधिकारी ने लिखी;
– किस स्रोत से कॉपी की;
– किसने अनुमोदित की;
– किस संभावित बोलीदाता को उसका लाभ मिलता;
– और किन वास्तविक नर्सरियों को उससे बाहर होना पड़ता।
पौधों के टेंडर में मशीन चलाने की शर्त यदि महज भूल है तो जिम्मेदार अधिकारियों की योग्यता और लापरवाही की जांच हो। और यदि यह तकनीकी भूलभुलैया किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है, तो यह GeM की निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर हमला और नगर निधि को निजी जेब की ओर मोड़ने का संभावित षड्यंत्र है।
नगर निगम को अब जवाब देना ही होगा:
«पेड़ खरीद रहे थे या किसी चहेती फर्म के लिए टेंडर की मशीन चला रहे थे?»
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