खरसिया कॉलेज में जर्जर भवन से विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल, गिरी सीलिंग

खरसिया। रायगढ़ जिले के खरसिया स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पुराने भवन की जर्जर हालत विद्यार्थियों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बारिश के मौसम में भवन की छत से पानी का रिसाव, दीवारों में सीलन और दरारें तथा जगह-जगह प्लास्टर उखड़ने की स्थिति सामने आ रही है। हाल ही में महाविद्यालय के बाथरूम की सीलिंग का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। घटना के बाद मौके पर मलबा बिखरा नजर आया। गनीमत रही कि जिस समय सीलिंग गिरी, उस दौरान कोई विद्यार्थी उसकी चपेट में नहीं आया।
जानकारी के अनुसार महाविद्यालय के पुराने भवन में कई कक्षाओं के अलावा कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण हिस्से संचालित हो रहे हैं। बारिश के दौरान इन स्थानों की छत से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। लगातार पानी और नमी के कारण भवन की दीवारों और छतों पर सीलन बढ़ रही है। कई जगह प्लास्टर उखड़ चुका है और निर्माण में इस्तेमाल लोहे की सरिया भी दिखाई देने लगी है। इससे भवन की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बाथरूम की सीलिंग गिरने की घटना ने खतरे को और गंभीर बना दिया है। सीलिंग का हिस्सा टूटकर नीचे गिरने से बड़े-बड़े मलबे के टुकड़े वहां बिखरे दिखाई दिए। यदि ऐसी घटना किसी कक्षा, गलियारे या विद्यार्थियों की आवाजाही वाले स्थान पर होती, तो गंभीर हादसा हो सकता था। ऐसे में भवन के सभी हिस्सों का तत्काल निरीक्षण कराकर कमजोर और जोखिम वाले स्थानों को सुरक्षित करना जरूरी हो गया है।
बारिश के दौरान पानी का रिसाव विद्यार्थियों के लिए केवल छत और सीलिंग गिरने का खतरा ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि विद्युत सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर रहा है। नमी और पानी के संपर्क में आने से विद्युत तार, स्विच, बोर्ड या अन्य उपकरणों में करंट आने की आशंका रहती है। पुराने भवन में विद्युत व्यवस्था की तकनीकी जांच कराना इसलिए भी जरूरी है, ताकि किसी तरह की विद्युत दुर्घटना को रोका जा सके।
महाविद्यालय परिसर में लगे लोहे के दरवाजे और अन्य धातु संरचनाएं भी यदि विद्युत प्रवाह के संपर्क में आती हैं, तो विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में पानी रिसाव वाले स्थानों की पहचान कर विद्युत लाइन और उपकरणों की जांच कराने के साथ आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जर्जर भवन की स्थिति के बावजूद वहां नियमित रूप से कक्षाएं और कार्यालयीन गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं। विद्यार्थी और महाविद्यालय का स्टाफ प्रतिदिन इन भवनों का उपयोग करते हैं। ऐसे में छत से पानी टपकने, सीलिंग गिरने, दीवारों में दरार और नमी जैसी समस्याओं को सामान्य मानना किसी बड़े जोखिम को नजरअंदाज करने जैसा हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि संबंधित विभाग और प्रशासन महाविद्यालय के पुराने भवन का तत्काल स्थल निरीक्षण कराए। भवन की संरचनात्मक मजबूती की तकनीकी जांच के साथ विद्युत सुरक्षा का भी परीक्षण कराया जाए। जिन हिस्सों में खतरा अधिक है, उन्हें अस्थायी रूप से बंद कराकर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इसके साथ ही आवश्यक मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम भी प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना जरूरी है।
महाविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय समय रहते संभावित खतरे को दूर करना अधिक जरूरी है। बाथरूम की सीलिंग गिरने की घटना को चेतावनी के रूप में लेते हुए पूरे पुराने भवन की स्थिति की जांच कराना आवश्यक है।
फिलहाल महाविद्यालय भवन की तस्वीरें उसकी बदहाल स्थिति को सामने ला रही हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं। सवाल यही है कि प्रशासन समय रहते जर्जर भवन की मरम्मत और सुरक्षा जांच कराएगा या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही व्यवस्था हरकत में आएगी।
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