देश में पर्यावरण की खतरे की घंटी, कोरबा में हालात और गंभीर! कोरबा जिले की जनता हों जाएं सावधान….

NGT की संयुक्त समिति ने कोरबा को बताया ‘Critically Polluted Industrial-Mining Airshed’—पांच वर्षों में बिगड़ी हवा, प्रदूषण में उद्योगों की बड़ी हिस्सेदारी
कोयला, बिजली, खनन और फ्लाई ऐश के बीच सांस लेता कोरबा; करोड़ों खर्च के बावजूद सवाल—आखिर कब साफ होगी ऊर्जाधानी की हवा?
कोरबा। Environmental Performance Index-2026 में भारत का 177 देशों में 176वें स्थान पर पहुंचना पूरे देश के लिए पर्यावरणीय चेतावनी है, लेकिन छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी कोरबा की जमीनी स्थिति को देखें तो चिंता और गहरी हो जाती है।
कोरबा की कोई अलग EPI रैंक जारी नहीं हुई है, इसलिए उसे EPI में कोई जिला-स्तरीय स्थान देना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। लेकिन National Green Tribunal (NGT), Central Pollution Control Board (CPCB) और National Clean Air Programme (NCAP) से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को एक साथ पढ़ें तो सवाल बेहद गंभीर हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य 7 अप्रैल 2026 के NGT आदेश में सामने आया है।
NGT के समक्ष प्रस्तुत Joint Committee Report ने कोरबा को सीधे—
“Critically Polluted Industrial-Mining Airshed”बताया है। इतना ही नहीं, समिति की Source Apportionment Analysis के अनुसार कोरबा में PM10 प्रदूषण में औद्योगिक उत्सर्जन की हिस्सेदारी लगभग 53% और PM2.5 में करीब 50% आंकी गई। रिपोर्ट के अनुसार इसका प्रमुख संबंध coal-based thermal power plants और allied industries से है।
पांच वर्षों में सुधरी नहीं, बिगड़ी कोरबा की हवा!
Joint Committee Report का एक और निष्कर्ष बेहद चिंताजनक है। कोरबा में Rampur स्थित CECB कार्यालय और Gevra coal mine के निकट Urja Nagar में Continuous Ambient Air Quality Monitoring Stations लगे हैं।
समिति ने इन स्टेशनों के cumulative annual air-quality data का अध्ययन कर दर्ज किया कि—
2019-20 के बाद पिछले पांच वर्षों में कोरबा की वायु गुणवत्ता खराब हुई है। यानी यह मामला किसी एक दिन के खराब AQI या मौसम की अस्थायी स्थिति का नहीं, बल्कि कई वर्षों के trend का प्रश्न है।
रात 8 बजे से सुबह 3 बजे तक बिगड़ती हवा!
संयुक्त समिति ने वर्ष 2025-26 के data analysis में एक और महत्वपूर्ण observation दर्ज किया। रिपोर्ट के अनुसार कोरबा में रात लगभग 8 बजे से सुबह 3 बजे के दौरान heavy coal transportation activity के समय हवा सबसे अधिक deteriorate होती पाई गई। यह निष्कर्ष कोयला परिवहन और शहर की वायु गुणवत्ता के बीच गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सिर्फ उद्योग नहीं—सड़क की धूल, खनन और वाहन भी जिम्मेदार
Source Apportionment Analysis में प्रदूषण के स्रोतों की तस्वीर भी सामने आती है। औद्योगिक उत्सर्जन के बाद PM10 में road dust लगभग 15% और mining activities करीब 12% योगदान देती हैं।
Vehicular emissions की PM10 में हिस्सेदारी लगभग 7% बताई गई, लेकिन अधिक खतरनाक fine particulate matter PM2.5 में वाहनों का योगदान करीब 14% आंका गया है। निर्माण गतिविधियां, घरेलू ईंधन, DG sets, कचरा/biomass burning और commercial activities भी सामूहिक रूप से प्रदूषण भार बढ़ाते हैं।
मणिकपुर रेलवे साइडिंग में भारी कोल डस्ट
संयुक्त समिति केवल कागजी रिकॉर्ड देखकर नहीं लौटी। उसने कोरबा में कई स्थानों का मौके पर निरीक्षण किया। Manikpur Railway Siding को hotspot के रूप में चिन्हित करते हुए समिति ने coal transportation routes पर भारी coal-dust accumulation पाया।
सड़कें unpaved/non-concretized पाई गईं, जिससे उड़ने वाली धूल यानी fugitive dust emissions बढ़ने की स्थिति दर्ज की गई।
SECL के गेवरा कोल ट्रांसपोर्ट मार्ग पर भी सवाल
समिति ने SECL coal transportation route at Gevra का भी निरीक्षण किया। यहां सड़कें unpaved और poorly maintained पाई गईं तथा भारी वाहनों की आवाजाही से महत्वपूर्ण मात्रा में dust generation होने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई। NTPC ash dyke पर भी मिली उड़ती धूल
मामला यहीं नहीं रुकता।
Joint Committee ने NTPC Korba ash dyke area में significant fugitive dust emissions दर्ज किए। रिपोर्ट के अनुसार water sprinkling systems लगाए गए थे, लेकिन निरीक्षण के दौरान वे चालू नहीं पाए गए।
समिति ने यह भी दर्ज किया कि low-lying areas में ash disposal पर्याप्त compaction और soil covering के बिना होने से हवा के साथ राख उड़ने और ambient air quality प्रभावित होने की आशंका बढ़ती है।
Transport Nagar का C&D प्लांट—समिति ने कहा ‘सिर्फ showcase’
कोरबा के Transport Nagar स्थित Construction & Demolition Waste Processing Plant को लेकर रिपोर्ट की टिप्पणी और भी गंभीर है। निरीक्षण के दौरान air-pollution-control systems और water sprinkling arrangements उपलब्ध नहीं पाए गए।
Joint Committee Report में इस facility को यहां तक कहा गया—
“just a showcase having no practical operation.” यदि सरकारी समिति की यह टिप्पणी जमीनी स्थिति को सही दर्शाती है तो सवाल सीधे संबंधित नगरीय और पर्यावरणीय एजेंसियों की निगरानी पर खड़ा होता है।
2019-20 से 2025-26 तक ₹9.76 करोड़—फिर भी हवा क्यों बिगड़ी?
कोरबा National Clean Air Programme के तहत Non-Attainment City है। NGT में प्रस्तुत समिति रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 से 2025-26 तक कोरबा को NCAP के अंतर्गत कुल ₹9.76 करोड़ मिले, जिनमें लगभग ₹6.69 करोड़ यानी 68.5% राशि का उपयोग हुआ था।
अगस्त 2025 के CPCB/PRANA दस्तावेज में FY 2025-26 के लिए कोरबा को ₹1.58 करोड़ allocation भी दर्ज है। इसलिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ पैसा खर्च होने का नहीं है।
यदि करोड़ों रुपये स्वच्छ हवा के नाम पर आए और खर्च भी हुए, तो पांच वर्षों में हवा सुधरने के बजाय बिगड़ने की स्थिति क्यों दर्ज हुई?
कोरबा का प्रदूषण कोई आज की कहानी नहीं
CPCB के पुराने Korba Action Plan में कोरबा का Comprehensive Environmental Pollution Index (CEPI) 83 दर्ज था।
इसमें—
Air – 67
Water – 57
Land – 72.50
Composite CEPI – 83
दर्ज किया गया था और उस assessment में कोरबा को critically polluted industrial areas/clusters की सूची में पांचवें स्थान पर बताया गया था।
यह पुराना assessment है, इसलिए इसे वर्तमान 2026 की राष्ट्रीय रैंक बताना गलत होगा। लेकिन इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह दिखाता है कि कोरबा में पर्यावरणीय दबाव वर्षों पुरानी और आधिकारिक रूप से पहचानी हुई समस्या है।
NGT को क्यों करना पड़ा हस्तक्षेप?
16 जनवरी 2026 को NGT ने रायपुर, भिलाई और कोरबा में वायु प्रदूषण के मामले का संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के Environment और Urban Development विभाग, State Pollution Control Board तथा CPCB के प्रतिनिधियों की Joint Committee गठित कर स्थल निरीक्षण और factual/action-taken report मांगी थी।
NGT ने राज्य के लिए दिल्ली के GRAP जैसी परिस्थितियों के अनुरूप Air Pollution Response Mechanism तैयार करने की आवश्यकता भी रेखांकित की थी।
7 अप्रैल के अंतिम आदेश में Tribunal ने समिति की रिपोर्ट राज्य के Environment और Urban Development Secretaries को भेजने तथा सुझावों के क्रियान्वयन पर विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही industrial areas सहित विभिन्न जिलों में AQI निर्धारित सीमा के भीतर सुनिश्चित करने की बात कही।
‘ऊर्जाधानी’ की असली कीमत कौन चुका रहा है?
कोरबा देश को बिजली देता है। कोरबा की धरती से कोयला निकलता है। यहां thermal power generation, coal mining और बड़े उद्योगों ने देश तथा प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
लेकिन अब सवाल यह भी पूछा जाना चाहिए—
इस विकास की पर्यावरणीय कीमत कौन चुका रहा है?
अगर एक सरकारी संयुक्त समिति ही कह रही है कि क्षेत्र में industrial emissions सबसे बड़ा particulate pollution source हैं, coal transportation routes पर धूल है, ash dyke में fugitive emissions हैं और पांच वर्षों में air quality deteriorate हुई है, तो इन निष्कर्षों को सामान्य टिप्पणी मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। न्यायमूर्ति भुइयां की चेतावनी कोरबा में और प्रासंगिक। यहीं सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां द्वारा रेखांकित Precautionary Principle का महत्व समझ आता है।
पर्यावरणीय शासन का उद्देश्य केवल प्रदूषण हो जाने के बाद जुर्माना वसूलना नहीं होना चाहिए।
पहली जिम्मेदारी प्रदूषण और अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति को होने से रोकना है।
कोरबा के संदर्भ में इसलिए अब केवल “Polluter Pays” का सवाल पर्याप्त नहीं है।
सवाल यह भी होना चाहिए कि प्रदूषण रोकने के लिए Environmental Clearance, Consent Conditions, emission-control systems, ash management, coal transportation और dust-suppression की शर्तों का वास्तविक अनुपालन कौन जांच रहा है?
अब जवाब चाहिए—सिर्फ आश्वासन नहीं
NGT की Joint Committee Report के बाद जिम्मेदारी और स्पष्ट हो गई है। अब छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित औद्योगिक तथा खनन प्रतिष्ठानों से यह सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए कि समिति द्वारा चिन्हित कमियों पर क्या सुधार हुआ, कितने निर्देश जारी हुए और उनके अनुपालन का सत्यापन कैसे किया गया?
क्योंकि यह मुद्दा किसी एक कंपनी, विभाग या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।
यह सवाल कोरबा के लाखों नागरिकों की सांस, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरणीय अधिकार का है।
देश को रोशन करने वाले कोरबा को साफ हवा मांगने की नौबत क्यों?
यह सवाल अब टाला नहीं जा सकता।
ऊर्जाधानी का गौरव तभी सार्थक होगा, जब विकास के साथ यहां रहने वाले नागरिकों को स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वस्थ पर्यावरण भी मिले।
कोरबा देश को ऊर्जा देता है—अब व्यवस्था को जवाब देना होगा कि कोरबा को स्वच्छ हवा कौन देगा?
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