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नगर निगम कोरबा की तिजोरी पर बड़ा सवाल—वर्षों की FD आखिर कहां गई?

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क्या विकास के नाम पर तोड़ दी गई निगम की वर्षों पुरानी जमा पूंजी? अब एक-एक रुपये का हिसाब मांग रहा कोरबा

 

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2023-24 से 2025-26 की पूरी वित्तीय कड़ी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं; FDR Register खुला तो सामने आ सकता है असली सच

CAG पहले पकड़ चुका ₹7.88 करोड़ का Excess Payment, बैंक खातों में ₹79 लाख के अंतर का मामला भी आ चुका सामने—अब FD, बैंक और भुगतान का होगा असली हिसाब

 

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा की तिजोरी को लेकर उठ रहा एक सवाल अब सामान्य वित्तीय चर्चा से कहीं आगे निकल चुका है।

आखिर नगर निगम की वर्षों से जमा Fixed Deposit/FDR में कितनी रकम थी? आज कितनी बची है? यदि करोड़ों रुपये की FD तोड़ी गई तो किसके आदेश से? और वह पैसा आखिर गया कहां?

शहर में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि नगर निगम द्वारा लंबे समय से बैंकों में सुरक्षित रखी गई बड़ी जमा राशि को हाल के वर्षों में तोड़कर विभिन्न भुगतानों में खर्च किया गया।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस दावे को दस्तावेजी पुष्टि होने तक तथ्य घोषित नहीं कर रहा।

लेकिन हमारी पड़ताल में जो वित्तीय सवाल सामने आए हैं, वे इतने गंभीर हैं कि अब निगम प्रशासन को केवल मौखिक सफाई नहीं बल्कि FDR Register, Bank Statement, Balance Sheet, Bank Reconciliation और Payment Vouchers जनता के सामने रखने चाहिए।

एक दस्तावेज खुला और पूरी कहानी बदल सकती है—FDR REGISTER। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी चाबी किसी राजनीतिक बयान या आरोप में नहीं छिपी है। वह छिपी है निगम के— FDR/TERM DEPOSIT REGISTER में। इस एक रिकॉर्ड से पता चल जाएगा—

किस बैंक में कितनी FD थी?

किस तारीख को बनाई गई?

कितने वर्षों से चली आ रही थी?

कितना ब्याज मिला?

कौन-सी FD maturity पर बंद हुई?

और सबसे महत्वपूर्ण—

कौन-सी FD समय से पहले तोड़ी गई?

यदि कोई बड़ी FD premature encash हुई है तो उसके बाद असली पड़ताल शुरू होगी।

FD से पैसा निकला तो गया कहां?

पैसा हवा में गायब नहीं होता। हर रुपये का accounting footprint होता है। अगर FD तोड़ी गई तो बैंक में FD Closure Entry होगी। उसकी रकम निगम के किसी बैंक खाते में Credit हुई होगी। Cash Book/Bank Book/General Ledger में entry होगी। सक्षम अधिकारी की Approval/Note Sheet होगी। और उसके बाद भुगतान हुआ होगा तो—

Voucher होगा।

Vendor होगा।

Contractor होगा।

Work Order/GeM Order होगा।

इसीलिए ग्राम यात्रा की पड़ताल का फार्मूला बेहद सीधा है—

FD → BANK ACCOUNT → APPROVAL → VOUCHER → VENDOR

यह श्रृंखला मिल गई तो पूरा पैसा खुद अपनी कहानी बताएगा। 2023 से 2026 के बीच आखिर क्या हुआ?

इस जांच का सबसे बड़ा Missing Link तीन वित्तीय वर्ष हैं

2023-24

2024-25

2025-26

पुराने audited financial records उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान विवाद के लिए निर्णायक इन वर्षों की पूरी financial trail सार्वजनिक वेब रिकॉर्ड में आसानी से उपलब्ध नहीं मिल रही।

यही कारण है कि सबसे पहला सवाल निगम प्रशासन से है—

31 मार्च 2023 को निगम की कुल FD कितनी थी?

31 मार्च 2024 को कितनी थी?

31 मार्च 2025 को कितनी बची?

31 मार्च 2026 को आंकड़ा क्या था?

और आज—

नगर निगम के नाम कुल कितनी FD मौजूद है?

इन पांच आंकड़ों को सार्वजनिक करने में आखिर कठिनाई क्या है?

यदि FD नहीं टूटी तो रिकॉर्ड जारी कर विवाद खत्म कीजिए नगर निगम के पास इस पूरे विवाद को समाप्त करने का सबसे आसान रास्ता है। FDR Register सार्वजनिक कर दिया जाए। अगर वर्षों की जमा पूंजी सुरक्षित है तो शहर को पता चल जाएगा कि आरोप निराधार हैं।

अगर FD maturity पर नियमानुसार निकाली गई और पैसा वैध विकास कार्यों में लगाया गया तो उसका रिकॉर्ड भी सामने रखा जाए।

लेकिन यदि बड़ी संख्या में FD premature encash हुई हैं तो यह बताया जाना चाहिए—

किसने अनुमति दी?

क्यों दी?

कितनी रकम निकाली गई?

किस खाते में आई?

और किसे भुगतान हुआ?

₹7.88 करोड़—CAG पहले ही दिखा चुका है कि सवाल पूछना क्यों जरूरी है। नगर निगम कोरबा के वित्तीय इतिहास में एक पुराना मामला इस जांच को और गंभीर बनाता है।

CAG audit में निगम द्वारा एक contractor को करीब ₹7.88 करोड़ Excess Payment किए जाने का मामला सामने आया था।  बाद में रकम के साथ करीब ₹50 लाख ब्याज की recovery की जानकारी सामने आई और जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश भी हुई।

यह वर्तमान FD मामले में किसी भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है।

लेकिन सवाल जरूर छोड़ता है—

अगर ऑडिट नहीं पकड़ता तो करोड़ों का Excess Payment कब सामने आता?

इसीलिए वर्तमान FD मामले में भी केवल “सब ठीक है” कह देना पर्याप्त नहीं होगा। रिकॉर्ड दिखाना होगा। ₹79 लाख का बैंक अंतर भी भूला नहीं है कोरबा

2022-23 और 2023-24 में नगर निगम की revenue collection से जुड़े CMS deposits और bank statement के बीच करीब ₹79 लाख के अंतर का मामला भी सामने आ चुका है। बाद में यह मामला पुलिस कार्रवाई तक पहुंचा। इस घटना का वर्तमान FD विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध अभी स्थापित नहीं है।

लेकिन एक गंभीर प्रश्न जरूर बनता है—

जिस वित्तीय व्यवस्था में Bank Statement और जमा रिकॉर्ड के बीच लाखों का अंतर सामने आ चुका हो, वहां करोड़ों की FD movement का स्वतंत्र Bank Reconciliation क्यों नहीं होना चाहिए?

2025 में Internal/Pre-Audit के लिए CA Firm—क्या कहते हैं उसके रिकॉर्ड?

वर्ष 2025 में नगर निगम ने Chartered Accountant firm के लिए Internal/Pre-Audit, Management Reporting और Municipal Bond Related Support Services से संबंधित प्रक्रिया निकाली।  इस व्यवस्था में bank entries reconciliation, expenditure scrutiny, payment processing और financial discrepancies की reporting जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल थे।

अब सवाल है—

2025-26 की Monthly Internal/Pre-Audit Reports कहां हैं?

यदि इसी अवधि में कोई बड़ी FD encash हुई है तो क्या वह auditor के रिकॉर्ड में दर्ज है?

क्या CA firm ने कोई objection किया?

क्या कोई discrepancy report बनी?

क्या compliance मांगी गई?

अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ तो इन रिपोर्टों को सार्वजनिक करने में हिचक क्यों होनी चाहिए?

जुलाई 2026 में फिर Accounting के लिए CA Firm 17 जुलाई 2026 को निगम ने Accrual-Based Double Entry Accounting System से संबंधित accounting services के लिए CA firm चयन की प्रक्रिया निकाली। CA firm की नियुक्ति अपने-आप में किसी अनियमितता का संकेत नहीं है।  लेकिन सवाल यह जरूर है कि जब आधुनिक accounting और financial transparency की दिशा में निगम बढ़ रहा है तो—

2023-26 की Balance Sheet, Trial Balance, Bank Reconciliation और FDR स्थिति जनता के सामने क्यों न रखी जाए? अब GeM और बड़े भुगतान भी जांच के दायरे में। अगर जांच में यह सामने आता है कि 2023 से 2026 के बीच बड़ी FD तोड़ी गई तो अगला चरण और महत्वपूर्ण होगा। हर FD closure date के आसपास किए गए बड़े भुगतानों को निकाला जाए।

फिर देखा जाए—

किस vendor को भुगतान हुआ?

किस contractor को हुआ?

किस tender/GeM order के विरुद्ध हुआ?

क्या सामान वास्तव में प्राप्त हुआ?

क्या कार्य वास्तव में हुआ?

Measurement Book क्या कहती है?

Invoice कितना था?

Payment Voucher कितना था?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या कुछ चुनिंदा vendors को असामान्य रूप से बड़ी रकम गई?

अभी इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन यही वह जांच है जो संभावित वित्तीय अनियमितता की जड़ तक पहुंच सकती है।‘ऊल-जुलूल खर्च’ नहीं—दस्तावेज बताएंगे पैसा सही जगह लगा या नहीं। शहर में किसी खर्च को बेकार या अनावश्यक बताना आसान है।

लेकिन ग्राम यात्रा की पड़ताल इससे आगे जाएगी।

हम देखना चाहते हैं—

कार्य की administrative sanction क्या थी?

Technical sanction क्या था?

Tender/GeM प्रक्रिया क्या थी?

बाजार दर और खरीदी दर में कितना अंतर था?

भुगतान से पहले verification किसने किया?

और—जिस उद्देश्य के लिए जनता का पैसा निकाला गया, वह उद्देश्य जमीन पर पूरा भी हुआ या नहीं?

यही अंतर आरोप और दस्तावेजी खोजी पत्रकारिता के बीच है। 15–20 वर्षों की जमा पूंजी—निगम बताए वास्तविक आंकड़ा यह चर्चा है कि नगर निगम वर्षों से surplus/bachत राशि FD में जमा करता आया है। इस दावे की पूरी अवधि और रकम अभी दस्तावेजी रूप से प्रमाणित होना बाकी है। इसलिए ग्राम यात्रा कोई काल्पनिक आंकड़ा प्रकाशित नहीं करेगा।

बल्कि निगम प्रशासन से सीधा सवाल करता है—

पिछले 15 वर्षों की वर्षवार FD स्थिति सार्वजनिक कर दीजिए।  फिर न किसी आरोप की जरूरत होगी, न किसी अनुमान की। रिकॉर्ड खुद फैसला कर देगा। ग्राम यात्रा की मांग—जारी हो ‘FD श्वेतपत्र’ नगर निगम कोरबा शहर की जनता के सामने FD एवं बैंक जमा पर श्वेतपत्र जारी करे।

उसमें वर्षवार बताया जाए—

Opening FD कितनी थी।

नई FD कितनी बनी।

ब्याज कितना मिला।

कितनी FD mature हुई।

कितनी premature encash हुई।

Closing FD कितनी बची।

और— निकाली गई रकम किस-किस काम और किस-किस vendor को दी गई।

साथ में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की Balance Sheet, Trial Balance, FDR Register, Bank Reconciliation Statements तथा Internal/Pre-Audit Reports सार्वजनिक पोर्टल पर डाली जाएं।

अगर सब साफ है तो कागज सामने रखिए!

मामला किसी अधिकारी को बिना प्रमाण कटघरे में खड़ा करने का नहीं है। लेकिन जनता के पैसे के मामले में सवाल पूछना भी अपराध नहीं हो सकता।  नगर निगम की जमा पूंजी किसी अधिकारी, ठेकेदार, जनप्रतिनिधि या विभाग की निजी संपत्ति नहीं है। यह शहर की जनता का पैसा है। इसलिए जनता को जानने का अधिकार है—

कल निगम की तिजोरी में कितना था?

आज कितना है?

बीच में कितना निकला?

किसने निकाला?

और आखिर गया कहां?

ग्राम यात्रा का सबसे सीधा सवाल—

नगर निगम कोरबा, अपनी FD का हिसाब सार्वजनिक कीजिए!” अगर पैसा सुरक्षित है तो दस्तावेज दिखाकर सवाल खत्म कर दीजिए। अगर पैसा खर्च हुआ है तो बताइए—किसकी मंजूरी से, किस काम पर और किसे भुगतान हुआ? और यदि दस्तावेजों में अनियमितता सामने आती है तो फिर मामला केवल FD टूटने का नहीं रहेगा— तब सवाल होगा कि जनता की वर्षों की जमा पूंजी के साथ आखिर हुआ क्या?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर इस वित्तीय कड़ी की पड़ताल जारी रखेगा। संबंधित अधिकारियों, निगम प्रशासन और अन्य पक्षों का जवाब भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

क्योंकि हिसाब साफ है तो डर कैसा?

FDR Register खोलिए—सच शहर के सामने रखिए!

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