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छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में लागू होगी प्रीपेड बिजली व्यवस्था

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1 अगस्त से पहले चरण की शुरुआत, मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज कर फिर मिलेगी बिजली; 3,432 करोड़ रुपये का बकाया चार किस्तों में चुकाना होगा

 

 

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कोरबा ।   छत्तीसगढ़ के सरकारी कार्यालयों में अब बिजली उपयोग की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। राज्य सरकार ने भारत सरकार की पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत सभी शासकीय कार्यालयों में दो चरणों में प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और प्रीपेड बिलिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सरकारी विभागों को अब आम उपभोक्ताओं की तरह बिजली का उपयोग करने से पहले मोबाइल रिचार्ज की तर्ज पर बिजली खाते में राशि जमा करनी होगी।

 

 

 

केंद्र सरकार की योजना की शर्तों का समय पर पालन नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की एक-तिहाई राशि रोक दी गई है। इसके बाद ऊर्जा विभाग ने समीक्षा बैठक कर योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करने का फैसला लिया। पहले चरण में 1 अगस्त 2026 तक ब्लॉक स्तर एवं उससे ऊपर के सभी शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड बिलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में निचले स्तर के कार्यालयों को इसमें शामिल किया जाएगा।

 

 

 

सरकारी विभागों पर मार्च 2026 तक बिजली बिल का बकाया 2,883.42 करोड़ रुपये था, जो जून 2026 तक बढ़कर लगभग 3,432.64 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। राज्य सरकार ने 30 जून 2026 की स्थिति में इस बकाया राशि को फ्रीज कर दिया है। इसका भुगतान बिजली कंपनी के एसबीआई रायपुर कमर्शियल ब्रांच के माध्यम से चार त्रैमासिक किस्तों में किया जाएगा। यदि कोई विभाग 31 मार्च 2027 तक पूरा बकाया जमा नहीं करता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

 

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक विभाग के सभी बिजली कनेक्शनों का एक समूह बनाया जाएगा, जिसे बिजली कंपनी यूनिक ग्रुप आईडी प्रदान करेगी। विभाग द्वारा नियुक्त प्रीपेड नोडल अधिकारी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बैलेंस कम होने या समाप्त होने से 7 दिन, 3 दिन और 1 दिन पहले एसएमएस एवं व्हाट्सएप के माध्यम से अलर्ट भेजा जाएगा। यदि महीने के अंत तक बैलेंस माइनस रहता है तो सरचार्ज लगेगा, लेकिन महीने के बीच में बैलेंस समाप्त होने पर अंतिम तिथि से पहले रिचार्ज कराने पर सरचार्ज नहीं लगेगा। बैलेंस शून्य होने के बाद भी तिमाही समाप्ति से 15 दिन तक की मोहलत मिलेगी।

यदि रिचार्ज नहीं होने से बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है तो उपभोक्ता ‘मोर बिजली’ एप या चैटबॉट के माध्यम से केवल एक बार 7 दिनों का ग्रेस पीरियड प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद भी रिचार्ज नहीं होने पर दोबारा बिजली आपूर्ति तभी बहाल होगी, जब पूरा बकाया रिचार्ज कर दिया जाएगा।

 

सफल रिचार्ज के बाद अधिकतम 60 मिनट के भीतर बिजली आपूर्ति स्वतः बहाल हो जाएगी। यदि किसी तकनीकी कारण से आपूर्ति बाधित होती है तो टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद 6 घंटे के भीतर समस्या का समाधान किया जाएगा। योजना की निगरानी के लिए विभाग ने प्रीपेड मॉनिटरिंग सेल का भी गठन किया है।

बिजली विभाग के प्रबंध संचालक भीम सिंह ने बताया कि सभी विभागों को नई व्यवस्था की जानकारी दे दी गई है और तैयारियां तेजी से चल रही हैं। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो अगस्त 2026 से योजना लागू होने की पूरी संभावना है।

 

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